ऊर्जा का वर्गीकरण

ऊर्जा का वर्गीकरण

ऊर्जा का वर्गीकरण :- ऊर्जा का मानव के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। मानव की वर्तमान ऊर्जा की आपूर्ति का प्रमुख भार खनिज ऊर्जा स्रोतों द्वारा उठाया जा रहा है, इसके अलावा भी कई ऊर्जा के कई और अन्य स्रोत भी उपलब्ध है। ऊर्जा स्रोतों को कई आधारों से वर्गीक्रत किया जाता है। यहां पर प्रमुख तीन आधारों में वर्गीक्रत किया गया है –

ऊर्जा का वर्गीकरण (Classification of energy)

1. अनवीकरणीय एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत

  • अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत

    • खनिज पदार्थों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा अनवीकरणीय कहलाती है।
    • अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत वह ऊर्जा स्रोत है जोकि प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनर्स्थापित नहीं होती है।
    • अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मानवीय क्रियाओं द्वारा समाप्त होते जा रहें है तथा इन्हें पुनः स्थापित होने में करोड़ों वर्ष लगते है।
    • अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रमुख उदाहरण कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु ईंधन आदि हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत

    • नवीकरणीय संसाधन वे संसाधन है जोकि प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा पुनर्स्थापित हो जाते है। परन्तु यदि इनके दोहन की दर इनके पुनर्स्थापन की दर से अधिक होती है तो ये नवीकरणीय नहीं रह जाते हैं।
    • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद होते हैं।
    • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के प्रमुख उदाहरण है जल विद्युत ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, बायोडीजल, बायोगैस आदि हैं।

2. प्रदूषणकारी एवं अप्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोत

  • प्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोत

    • प्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोत वे स्रोत है जिनसे ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया में पर्यावरण में प्रदूषण(जल, वायु, आणविक) उत्पन्न होता है।
    • सभी अनवीकरणीय स्रोत इसके अंतर्गत आते हैं।
  • अप्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोत

    • सभी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत इसके अंतर्गत आते हैं।

3. परम्परागत ऊर्जा स्रोत एवं गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत

  • परम्परागत ऊर्जा स्रोत

    • ऊर्जा के वे स्रोत जो किसी न किसी प्रकार से पर्यावरण या पारिस्थितिकी(प्रदूषण और प्रदूषण से अलग भी) को हानि पहुँचाते हैं परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के अंतर्गत आते हैं।
    • इसके अंतर्गत आने वाले सभी स्रोत अनवीकरणीय होते है।
    • परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से प्रदूषण(वायु, जल, आणविक) होता है।
    • परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के प्रमुख उदाहरण कोयला, पेट्रोलियम, गैस आदि हैं।
    • 25MW से अधिक क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाएं भी इसे के अंतर्गत आती है। वैसे तो जल विद्युत एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है परन्तु बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं पर्यावरण/पारिस्थितिकी को हानि पहुँचाती हैं। अतः इन्हे परम्परागत ऊर्जा स्रोत के अंतर्गत रखा जाता है।
  • गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत

    • सभी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत(सूर्य, पवन, जलविद्युत आदि)।
    • परमाणु खनिज से प्राप्त ऊर्जा स्रोत भी गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के अंतर्गत आती है।
    • लघु जल विद्युत परियोजनाए(25MW या उससे कम क्षमता वाली)।
Geography Notes पढ़ने के लिए — यहाँ क्लिक करें

प्रातिक्रिया दे

Your email address will not be published.

*