कंप्यूटर वायरस क्या होता है ? कंप्यूटर में वायरस संक्रमण के कारण

कंप्यूटर वायरस क्या होता है ? कंप्यूटर में वायरस संक्रमण के कारण

कंप्यूटर वायरस क्या होता है ? कंप्यूटर में वायरस संक्रमण के कारण, कंप्यूटर वायरस क्या है इसके प्रकार, Virus के प्रकार, कंप्यूटर वायरस से बचने के उपाय, कंप्यूटर में वायरस के लक्षण, What is a computer virus in hindi, What are the types of computer virus in hindi आदि प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

कंप्यूटर वायरस क्या होता है ? (What is a computer virus in hindi)

कंप्यूटर वायरस एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर कोड होता है जिसे इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के लिए बनाया गया है। कंप्यूटर वायरस एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो किसी कंप्यूटर या नेटवर्क में फैलता जाता है और अन्य सॉफ्टवेयर कोड और कंप्यूटर नेटवर्क को संक्रमित करता है।

कंप्यूटर वायरस के होने से कंप्यूटर डिवाइस या नेटवर्क की प्रोसेसिंग बहुत धीमी हो जाती है जिससे उपयोगकर्ता को कार्य करने में बहुत कठिनाई होती है।

‘Virus’ वायरस का पुरा नाम या फुल फॉर्म ‘Vital Information Resources Under Seize’ होता है।

कंप्यूटर या नेटवर्क में वायरस संक्रमण के कारण (Causes of virus infection in computer or network)

कंप्यूटर या नेटवर्क में वायरस संक्रमण होने के कई कारण होते है जो निम्नलिखित है –

  • इंटरनेट Internet – इंटरनेट का प्रयोग करते समय कंप्यूटर में सबसे अधिक वायरस होने की आशंका होती है क्योंकि इंटरनेट बहुत बड़ा और खुला नेटवर्क है जिसमें कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने के लिए इसमें हजारों वायरस डाले जाते है।
  • स्टोरेज Storage – वायरस संक्रमण का दूसरा सबसे बड़ा कारण स्टोरेज डिवाइस है। स्टोरेज डिवाइस के अंतर्गत पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, आदि सम्मिलित है। स्टोरेज डिवाइस में वायरस डिवाइस को किसी अन्य कंप्यूटर पर लगाते समय आ जाते है जिससे उसमे हजारों वायरस होते है और जब इसे किसी सही कंप्यूटर में लगाया जाता है तो उस कंप्यूटर में वायरस सक्रीय हो जाते है, जिससे कंप्यूटर संक्रमित हो जाता है।
  • डाउनलोड Download – कंप्यूटर में जब हम किसी भी प्रोग्राम जैसे गाने, मूवी या कोई भी प्रोग्राम को डाउनलोड करते है तो उन प्रोग्रामों में कईं वायरस पहले से विद्यमान होते है जिसे डाउनलोड करने के बाद वह हमारे कंप्यूटर में सक्रीय हो जाते है और कंप्यूटर संक्रमित हो जाता है।
  • ईमेल अटैचमेंट  Email Attachment – कईं बार हमे कंपनियों द्वारा संक्रमित अटैचमेंट भेजे जाते है। इन अटैचमेंट को यदि गलती से खोल दिया जाए तो इसमें वायरस सक्रीय हो जाता है और हमारे कंप्यूटर या नेटवर्क को संक्रमित कर देता है।

Virus वायरस के प्रकार (Types of computer virus in hindi) –

कंप्यूटर वायरस के कई प्रकार होते हैं कंप्यूटर को संक्रमित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण वायरस या कंप्यूटर वायरस का वर्गीकरण निम्नलिखित हैं –

मल्टीपरटाईट वायरस (Multipartite Virus) –

मल्टीपरटाईट वायरस (Multipartite Virus) बहुत तेजी से फैलने वाला हाइब्रिड वायरस है यह कई प्रकार से फैलने वाला वायरस है यह बूट सेक्टर और फाइल्स में अलग-अलग फेल सकता है। सर्वप्रथम ज्ञात मल्टीपरटाईट वायरस घोस्टबॉल (Ghostball) था।

बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus) –

बूट सेक्टर किसी भी डिवाइस के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है और यह वायरस डिवाइस के बूट सेक्टर को संक्रमित कर देता है। बूट सेक्टर डिवाइस का वह हिस्सा होता है जहाँ डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करने की महत्वपूर्ण फाइल मौजूद रहती है जिसमें वायरस संक्रमण के ऑपरेटिंग सिस्टम खराब हो जाता है और जिससे डिवाइस लगातार रीस्टार्ट होती रहती है। सर्वप्रथम ज्ञात बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus) ब्रेन (Brain) था। यह वायरस जनवरी 1986 में जारी हुआ था जोकि MS-DOS को प्रभावित करने वाला पहला वायरस था।

फाइल वायरस (File Virus) –

Executable files वह फाइल होती है जो सॉफ्टवेयर को इनस्टॉल करने में प्रयोग की जाती है। इस फाइल वायरस Executable files को Overwrite करके उसमे अपना एक कोड डाल देता है और Executable फाइल को जैसे ही चलाया जाता है और चलते ही वायरस भी इसके साथ सक्रीय हो जाता है और फाइल को पूरी तरह खराब कर देता है।

एफ.ए.टी. वायरस (FAT Virus) –

एफ.ए.टी. वायरस (FAT Virus) कंप्यूटर की हार्ड डिस्क के फाइल एलोकेशन टेबल पर आक्रमण कर उसे संक्रमित कर देता है। FAT Virus कंप्यूटर के सबसे महत्वपूर्ण भाग स्टोरेज सिस्टम को संक्रमित करता है। जिससे स्टोरेज में एकत्रित सारा डाटा ही नष्ट हो जाता है। सर्वप्रथम ज्ञात FAT Virus भी ब्रेन (Brain) ही था जोकि सर्वप्रथम ज्ञात Boot Sector Virus भी था।

पोलीमॉर्फिक वायरस (Polymorphic Virus) –

यह एक जटिल वायरस है जो Encrypted Mode में रहता है जिससे किसी एंटी वायरस को इसे पकड़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यह वायरस निरंतर अपने रूप में बदलाव करता रहता है।

ओवरराईट वायरस (Overwrite Virus) –

ओवरराईट वायरस (Overwrite Virus) कंप्यूटर या डिवाइस में सेव फाइलों को ओवरराईट कर देता है यह फाइल के डाटा में पूरी तरह से बदलाव कर देता है जिससे फाइल में सेव डाटा को समझना बहुत मुश्किल हो जाता है और फाइल को पूरी तरह से डिलीट करना पड़ता है। ओवरराईट से बचने के लिए वायरस ईमेल अटैचमेन्ट को खोलने से बचना चाहिए।

रेसिडेंट वायरस (Resident Virus) –

रेसिडेंट वायरस (Resident Virus) कंप्यूटर की सिस्टम मेमोरी (RAM) से परमानेंट समय के लिए जुड़ जाता है इसलिए इसे परमानेंट वायरस भी कहते हैं। यह कंप्यूटर में उस समय ओपन फाइल्स और प्रोग्राम्स (Files & Programs) को करप्ट कर देता है।

डायरेक्ट एक्शन वायरस (Direct Action Virus) –

डायरेक्ट एक्शन वायरस (Direct Action Virus) फोल्डर डायरेक्टरी को संक्रमित करता है खासकर उन फाइल्स या फ़ोल्डर्स को संक्रमित करता है जिनमें AUTOEXE.BAT फाइल होती है। संक्रमित फाइल्स को ओपन करते ही यह वायरस संचालित हो जाता है।

वेब स्क्रिप्टिंग वायरस (Web Scripting Virus) –

वेब स्क्रिप्टिंग वायरस (Web Scripting Virus) कंप्यूटर में मौजूद वेब ब्राउज़र को संक्रमित कर उसमें बदलाव करता है। ओपन होने वाली वेबसाइटों को प्रभावित करता है। स्पैम एडवरटाइजिंग भी प्रदर्शित करता है और ब्राउज़र को काफी स्लो कर देता है।

कंप्यूटर में वायरस के लक्षण (Symptoms of virus in computer in hindi)

कंप्यूटर में वायरस होने के लक्षण निम्नलिखित होते हैं –

  • कंप्यूटर का स्लो बूट होना और स्लो प्रोग्राम्स या सॉफ्टवेयर को ओपन या क्लोज करना। कंप्यूटर का बार-बार हैंग होना और सभी प्रोग्राम्स का पहले के मुकाबले बहुत ही स्लो चलना या कंप्यूटर का अपने आप बंद होना।
  • कंप्यूटर में सेव फाइल्स, फ़ोल्डर्स या प्रोग्राम्स को करप्ट, एक से अधिक कॉपी बना देना या डिलीट कर देना।
  • कंप्यूटर ब्राउज़र में अपने आप नयी विंडो या टेब खुलना, ब्राउज़र का स्लो चलना, वेबसाइट का स्लो लोड होना या टॉप लेवल वेबसाइटों पर पहले के मुकाबले अधिक और अजीब से विज्ञापन आना। ओपन की जाने वाली वेबसाइट का अपने आप रिडायरेक्ट होकर कोई और वेबसाइट खुल जाना।
  • इंटरनेट की स्पीड का पहले के मुकाबले स्लो हो जाना।

कंप्यूटर वायरस से बचने के उपाय (ways to prevent computer virus in hindi)-

कंप्यूटर वायरस से बचने के उपाय निम्नलिखित हैं –

  • लाइसेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
  • एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
  • स्टोरेज डिवाइस का ध्यान से इस्तेमाल करें।
  • अज्ञात स्रोत से आईं हुई ईमेल अटैचमेंट न खोलें।
  • इंटरनेट पर कार्य करते समय सचेत रहे।

पढ़ें – कंप्यूटर प्रोग्राम किसे कहते हैं एवं प्रोग्राम की विशेषताएं बताएं ?

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