कलिंग युद्ध के कारण तथा उसके परिणाम

कलिंग युद्ध के कारण तथा उसके परिणाम

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कलिंग युद्ध

कलिंग युद्ध मौर्य सम्राट अशोक एवं कलिंग के राजा अनंत पद्मनाभन के बीच 262-261 ई०पू० में लड़ा गया था। सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल के 12 वें वर्ष में कलिंग पर आक्रमण किया था। कलिंग का युद्ध प्राचीन काल का सबसे विशाल एवं हिंसक युद्ध में से एक माना जाता है। प्राचीन समय में कलिंग की पहचान एक शक्तिशाली राज्य के रूप में होती थी। यह पूर्व दिशा में गंगा नदी से दक्षिण दिशा में गोदावरी नदी तक फैला हुआ एक राज्य था। सम्राट अशोक कलिंग पर अपना अधिकार स्थापित करके अपने साम्राज्य में विस्तार करना चाहता था। कलिंग एक शक्तिशाली राज्य था जिस पर आक्रमण करना मौर्य सम्राट अशोक के लिए आसान नहीं था।

कलिंग युद्ध के कारण

  • मौर्य सम्राट अशोक अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था जिसके लिए कलिंग का युद्ध अत्यंत महत्वपूर्ण था। कलिंग के पास समुद्र एवं स्थल दोनों मार्गो से दक्षिण भारत तक जाने वाले मार्गो का नियंत्रण था जिसके कारण सम्राट अशोक कलिंग युद्ध को बेहद जरूरी मानता था। कलिंग का राजा बहुत ही शक्तिशाली एवं प्रभावशाली शासक था। मौर्य सम्राट अशोक कलिंग को एक खतरे के रूप में देखता था क्योंकि कलिंग किसी भी क्षण मध्य भारतीय प्रायद्वीप पर आक्रमण कर मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र के बीच संचार एवं सेवाओं को बाधित कर सकता था। इसलिए मौर्य सम्राट अशोक के लिए कलिंग को जीतना बेहद जरूरी हो गया था।
  • कलिंग के पास व्यापारिक संबंधों को स्थापित करने की भौतिक समृद्धि थी जिसके कारण सम्राट अशोक कलिंग को मौर्य साम्राज्य का हिस्सा बनाकर अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे। इसके अलावा, कलिंग के पास विशाल सैन्य शक्ति एवं समृद्धि भी मौजूद थी जिसके कारण मौर्य सम्राट अशोक कलिंग पर अपना कब्जा चाहते थे।
  • कलिंग युद्ध से पूर्व चंद्रगुप्त मौर्य एवं बिंदुसार ने कलिंग को जीतने की एक असफल कोशिश की थी जिसके कारण सम्राट अशोक ने बदले की भावना से दोबारा कलिंग को जीतने की कोशिश की।
  • सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में कलिंग के शासक को अपने आगे झुकने एवं मौर्य समाज से मिलाप करने का संदेश भेजा था परंतु कलिंग के शासक में इस प्रस्ताव के आगे झुकने से इंकार कर दिया था जिसके फल स्वरूप 261 ई०पू० में कलिंग एवं मौर्य साम्राज्य के बीच युद्ध हुआ।
  • कलिंग को दक्षिण पूर्वी देशों से संबंध बनाने में आसानी होती थी जिसके कारण सम्राट अशोक कलिंग पर विजय प्राप्त करके उस पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहता था।

कलिंग युद्ध के परिणाम

  • कलिंग का युद्ध इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है जिसमें मौर्य साम्राज्य में कलिंग पर विजय प्राप्त की। कलिंग पर विजय के उपरांत सम्राट अशोक ने इसे मौर्य साम्राज्य का पांचवा प्रांत बनाया।
  • कलिंग युद्ध की लड़ाई में करीब 100000  से अधिक सैनिक एवं नागरिकों की मृत्यु हुई। इसके अलावा, मौर्य साम्राज्य में कलिंग के 150000 सैनिकों एवं नागरिकों को बंदी बना लिया जिन्हें बाद में मृत्यु की सजा सुनाई गई।
  • कलिंग युद्ध के पश्चात पूरे साम्राज्य में अहिंसा एवं शांति की नीति को बढ़ावा दिया गया जिससे राज्य में शांति का माहौल स्थापित हो सके।
  • कलिंग के युद्ध को सम्राट अशोक की पहली एवं आखिरी लड़ाई कहा जाता है। इस युद्ध के पश्चात सम्राट अशोक ने अपनी पुश्तैनी तलवार का त्याग कर दिया था एवं बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। तत्पश्चात सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार भी किया।
  • सम्राट अशोक ने कलिंग पर विजय के बाद सत्य एवं अहिंसा का समर्थन किया एवं धर्म में परिवर्तन करते हुए अशोक धम्म की स्थापना की जिसका उद्देश्य मानवता की सेवा करना था। तत्पश्चात अशोक ने विराटनगर के बीजक नामक स्थल पर लगभग एक वर्ष की कड़ी तपस्या की थी।

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