गरीबी के कारण और निवारण

गरीबी के कारण और निवारण

गरीबी के कारण और निवारण ( garibi ke karan aur nivaran ) : गरीबी से आशय किसी व्यक्ति या जनसंख्या के निम्न जीवन स्तर से लगाया जा सकता है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी और अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमर्थ हो जाता है। गरीबी किसी भी देश की एक बहुत बड़ी समस्या है  –

गरीबी के कारण –

गरीबी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

बढ़ती जनसंख्या –

वर्तमान में बढ़ती जनसंख्या एक बहुत बड़ी समस्या है। बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी की पहली वजह है जो गरीबी का प्रमुख कारण हैं। जनसंख्या वृद्धि से स्वास्थ्य सुविधाओं एवं वित्तीय संसाधनों में निरंतर कमी होने के कारण लोगों का जीवन स्तर निम्न होता जा रहा है जो प्रति व्यक्ति आय को प्रभावित करने में भी उत्तरदायी है। जनसंख्या वृद्धि में भारत का दूसरा स्थान है और यही वजह भारत के पिछड़ेपन का कारण है। अतः किसी भी देश की जनसंख्या वहां के लोगों के जीवन स्तर को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि देश में गरीबी है अथवा नहीं।

शिक्षा का अभाव –

भारत में ऐसे बहुत से लोग है जो शिक्षा के महत्व से परिचित नहीं है जिसकी वजह से वे अपने बच्चों को शिक्षा के अलावा किसी अन्य कामों में लगा देते है। बचपन से ही बच्चों के हाथ में वे परिवार की सारी जिम्मेदारियों को सौंप देते हैं, इन सबका परिणाम यह होता है कि एक बच्चा अच्छी शिक्षा से वंचित हो जाता है और स्वयं के जीवन स्तर को उच्च बनाने में असमर्थ हो जाता है अतः व्यक्ति का गरीब होना स्वाभाविक है।

अनुचित सरकारी नीतियां –

भारत में पर्याप्त संसाधन होने पर भी यहाँ गरीबी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, इसका प्रमुख कारण है अनुचित सरकारी नीतियां। भारत में सरकारी नीतियों के अंतर्गत कुछ ऐसे श्रम कानून एवं नीतियां बनाई गई है जिनसे इन नीतियों से लोगों के लिए मेहनत करके कोई भी कार्य करना मुश्किल हो गया है और कुशल छात्र भारत छोड़कर विदेशों की ओर जाते हैं व अपना धन विदेशी बैंकों में ही रखते हैं। अतः कुशल व्यक्तियों की कमी के कारण नए व्यवसाय उत्पन्न नहीं होते और कई लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता जो बेरोजगारी का प्रमुख कारण बन जाता है।

विषम सामाजिक परिस्थितियां –

भारतीय समाज में व्याप्त विषम परिस्थितियां भी गरीबी की समस्या को उत्पन्न करती हैं। समाज में प्रचलित प्रथाएं जैसे – जातिप्रथा, संयुक्त परिवार प्रथा उत्तराधिकारी के नियम आदि जिन्हें अर्थव्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी माना जाता है। भारतीय समाज में विवाह, दहेज़ प्रथा, मृत्यु भोज व अन्य तीज त्योहारों में इतना अधिक खर्चा किया जाता है कि उनको लोन तक लेना पड़ता है। उस लोन को जीवन भर तारने के लिए उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतः गरीबी की समस्या को जन्म देने में सामाजिक परिस्थितियां उत्तरदायी है।

बढ़ती महंगाई –

वर्तमान में देश में बढ़ती महंगाई के कारण भी लोगों में गरीबी की समस्या देखी जाती है गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्ति का बढ़ती महंगाई की वजह से एक वक्त की रोटी जुटा पाना भी मुश्किल हो जाता है। भारत में दिन भर मेहनत करने वाले व्यक्तियों की आय इतनी कम होती है कि वे आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाते है जिससे उनका पूरा परिवार कुपोषण का शिकार हो जाता है और बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

प्राकृतिक आपदाएं –

भारत में गरीबी की समस्या का एक कारण वहां आने वाली प्राकृतिक आपदाए भी है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड होना, सूखा पड़ना, अधिक वर्षा होना, बाढ़, भू-स्खलन, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं की वजह से जन व धन दोनों की हानि होती है। प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव से कई लोग बेरोजगार हो जाते है या लोगों की आय इतनी कम हो जाती है कि उन लोगों को जीवन भर गरीबी का सामना करना पड़ता है।

उचित स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव –

भारत में कई ऐसे स्थान है जहाँ न अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ है और न ही सफाई जिसकी वजह से वहां रहने वाले व्यक्ति आए दिन किसी न किसी बीमारी के शिकार बन जाते है और इन बीमारियों में इतना अधिक खर्च होता है कि लोग गरीब हो जाते है। अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के न मिलने के कारण गरीबी का स्तर बढ़ता जा रहा है।

लोगों की बुरी आदतें –

लोगों की बुरी आदतों में बुरी चीजों का सेवन करने से है जिसमें शराब, गुटका-बीड़ी आदि शामिल है। व्यक्ति अपनी इन बुरी आदतों के लिए इतना अधिक खर्च कर देता है न उसके पास अच्छा स्वास्थ्य बचता है और न पैसा। इसके अलावा वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं उच्च स्तर से वंचित रखते है और इनमें इतना अधिक खर्चा करते है कि वे खुद को उच्च स्तर में लाने में असमर्थ हो जाते है।

गरीबी के निवारण –

  • लघु एवं कुटीर उद्योगों, टेक्सटाइल, कपड़े, हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगारों को बढ़ाया जा सकता है, रोजगारों में वृद्धि करने से गरीबी को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • गरीबी निवारण की समस्या को केंद्र में रखना आवश्यक है जिससे इस समस्या को गंभीरता से देखा जाए और इसका निवारण किया जा सके।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत उचित क्रियान्वयन के माध्यम से रोजगारों को बढ़ाया जा सकता है और गरीबी को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • सरकार को अकुशल कारीगरों के लिए न्यूनतम मजदूरी के मानक बनाने चाहिये। इसके अलावा मनरेगा योजना के उचित प्रयोग व संसाधनों का विकास करके गरीबी को दूर किया जा सकता है।
  • आर्थिक विकास की गति को तेज करने से गरीबी को दूर किया जा सकता है क्योंकि तीव्र आर्थिक विकास से रोजगारों के अवसरों को भी बढ़ाया जा सकता है और बहुत अधिक संख्या में लोग रोजगार प्राप्त कर सकते है।
  • भारत में गरीबी को दूर करने के लिए कृषि विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है। कृषि विकास के अंतर्गत बहु फसली कार्यक्रम, व्यावसायिक आधार पर कृषि करना, उन्नत सिंचाई, बीज आदि लघु एवं सीमांत कृषकों को उपलब्ध कराना चाहिए इससे कृषक वर्ष भर कृषि कार्यों में संलग्न रहेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।
  • जनसंख्या को नियंत्रित करके भी गरीबी से छुटकारा पाया जा सकता है अधिकांशतः गरीबी का कारण परिवार में जन्म दर का उच्च होना है। परिवार में सदस्यों की अधिक संख्या होने से उनको उच्च जीवन स्तर नहीं मिल पाता है अतः जनसंख्या को नियंत्रित करना आवश्यक है।

पढ़ें – भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण, निवारण एवं नियंत्रण

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