जर्मनी में नाजीवाद के उदय के कारण

जर्मनी में नाजीवाद के उदय के कारण

नाजीवाद क्या है ? जर्मनी में नाजीवाद के उदय के कारण (Causes of rise of Nazism in Germany in hindi), जर्मनी में नाजीवाद के उत्थान के कारण आदि प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

नाजीवाद क्या है ?

नाजीवाद, जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की एक विचारधारा थी तथा एडोल्फ हिटलर को नाजीवाद का संस्थापक कहा जाता है। नाजीवाद सरकार एवं आम जनता के मध्य एक नए रिश्ते के पक्ष में था जिसकी शुरुआत जर्मनी में हुई थी। कट्टर जर्मन राष्ट्रवाद, देशप्रेम, विदेशी विरोधी, आर्य एवं जर्मन हित नाजीवाद की विचारधारा के मूल अंग हैं। अर्थात नाजीवाद फासीवाद का एक उग्र रूप है जिसका उद्देश्य राष्ट्रवाद को सर्वोच्चता प्रदान करना है।

जर्मनी में नाजीवाद के उदय के कारण (Causes of rise of Nazism in Germany in hindi) –

बीसवीं शताब्दी के शुरुआती सालों में जर्मनी एक ताकतवर साम्राज्य हुआ करता था। जर्मनी ने ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के साथ मिलकर मित्र रष्ट्रों के विरुद्ध पहला विश्वयुद्ध वर्ष 1914-1918 लड़ा था। विश्व के सभी राष्ट्र किसी न किसी उद्देश्य से इस युद्ध में कूद पड़े परन्तु वे इस बात से परिचित नहीं थे की यह युद्ध संपूर्ण यूरोप को आर्थिक रूप से निचोड़ देगा। प्रथम विश्व युद्ध के तुरंत बाद इस पार्टी की स्थापना हुई जिसका विचार था की जर्मनी ने वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करके बहुत बड़ी गलती कर दी थी।

जर्मनी में नाजीवाद के उदय का मुख्य कारण जर्मनी की आर्थिक मंदी, वाइमर गणतंत्र की असफलता, साम्यवाद का डर, यहूदियों की विरोधी नीति, जर्मनी के संविधान की कमियां और हिटलर का व्यक्तित्व ये सभी कारण थे जिनसे जर्मनी में नाजीवाद का उदय हुआ।

जर्मनी द्वारा वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर किए गए। जर्मनी के लिए वर्साय की संधि वास्तव में अन्याय पूर्ण एवं द्वेष से भरी हुई थी। वर्ष 1919 में पेरिस शांति सम्मेलन हुआ जिसमें विभिन्न देशों के मध्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इन सभी संधियों में वर्साय की संधि सबसे विवादास्पद संधि थी। वर्साय की संधि की शर्तें इतनी अन्यायपूर्ण या कठोर थी कि कई इतिहासकारों ने इसे आरोपित संधि की संज्ञा दी। वर्साय की संधि के माध्यम से जर्मनी पर अनेक मुश्किल से मुश्किल प्रतिबंध लगाए गए। जर्मनी में इस संधि के द्वारा इतना अधिक जुर्माना लगाया गया कि जर्मनी पूरी तरीके से कमजोर पड़ गया। जर्मनी की इस बुरी स्थिति के कारण ही यहाँ नाजीवाद का उदय हुआ।

जर्मनी में वर्साय की संधि के द्वारा लगाए गए प्रतिबंध निम्नलिखित है –

  • जर्मनी को सीमित सेना आदेश दिया गया।
  • जर्मनी की नौसेना पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • जर्मनी द्वारा जीते गए क्षेत्र वापस ले लिए गए।
  • जर्मनी के खुद के देश के कुछ क्षेत्रों को लीग ऑफ नेशंस के हवाले कर दिया गया।
  • जर्मनी से जुर्माने के रूप में 650 करोड़ पॉन्ड की भारी-भरकम राशि का जुर्माना लगाया गया था।

जर्मनी में नाजीवाद के उदय के लिए हिटलर के आकर्षक कार्यक्रम ने सबसे अधिक योगदान दिया था क्योंकि हिटलर ने अपने कार्यक्रमों में वर्साय की संधि के प्रतिबंधों दूर करना, जर्मनी के सभी राज्यों को मजबूती प्रदान करना तथा प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के सभी अधिकारों एवं सम्मान को वहां के नागरिकों को वापस लाने का विश्वास दिलाया। हिटलर के इन प्रयासों ने जर्मनी के नागरिकों के ह्रदय में इस नई उम्मीद जाग्रत की और नागरिकों ने हिटलर का समर्थन करते हुए उसके नाजीवाद के सभी कार्यक्रमों में उसका साथ दिया और इस तरह जर्मनी में नाजीवाद का उदय हुआ।

वर्ष 1933 में हिटलर सत्ता में आया और जर्मनी में तानाशाही की स्थापना हुई। तानाशाह बनने के बाद हिटलर ने आस-पास के सभी राष्ट्रों को धमकाना शुरू कर दिया और अपनी नीति से वह छोटे देशों को खरतरनाक बनाता रहा। हिटलर ने उन सभी कार्यों को करना आरम्भ किया जो वर्साय की संधि के खिलाफ थे उसने अपनी सेना को हमले के लिए तैयार किया और चेकोस्लोवाकिया से शुरुआत करने के बाद पोलैंड, नार्वे, डेनमार्क और फ़्रांस को जीत लिया। हिटलर ने लगभग सभी देशों को जीत लिया था परन्तु उसकी हार तब हुई जब उसने रूस पर हमला करने का निर्णय लिया। रूस से हारने के बाद हिटलर के तानाशाह और नाजीवाद का पतन हो गया।

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