नशा विनाश का कारण है : निबंध

नशा विनाश का कारण है निबंध (reason for drug addiction essay in hindi) : नशा विनाश का कारण है (nasha vinash ka karan hai  – nibandh) विषय पर निबंध यहाँ दिया गया है।

नशा क्या है ?

नशा एक ऐसी बुराई है जिसकी वजह से व्यक्ति अपना अनमोल जीवन समय से पहले ही खो देता है, नशा करने से व्यक्ति अपने शारीरिक व मानसिक संतुलन को नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे उसका सामाजिक एवं आर्थिक जीवन भी बुरी तरह प्रभावित होता है। नशे का कुप्रभाव आज विश्व के हर देश में देखा जा रहा है। जिसकी वजह से हर वर्ष 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध यानि नशा मुक्ति दिवस और 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों और तंबाकू के सेवन पर रोक लगाना और लोगों को इसके कुप्रभावों के लिए जागरूक करना है।

नशा चाहे जैसा हो, होता है बेकार

शरीर ख़त्म कर, बीमारी लाकर कर देता है लाचार।

नशा विनाश का कारण है –

भारतीय समाज अपनी संस्कृति, सभ्यता एवं संस्कारों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है और ऐसा माना जाता है कि जितने संस्कार भारत में है। शायद ही दुनिया के किसी कोने में होंगे। जैसा की हम सभी को विविध है कि मानव एक सामाजिक प्राणी है जो समय के अनुसार परिवर्तन अवश्य चाहता है। इन परिवर्तनों में बुरे एवं अच्छे दोनों परिवर्तन सम्मिलित होते हैं। अच्छे परिवर्तन समाज को विकास की ओर ले जाते हैं और बुरे परिवर्तन समाज के विनाश का कारण बनते हैं। इन बुरे परिवर्तनों में नशा समाज का बहुत बड़ा विनाशकारी कारण है।

भारतीय समाज में सबसे अधिक संख्या युवा वर्ग की है और युवा वर्ग किसी भी देश के विकास का एक महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। वर्तमान में हमारे देश के युवा एक बहुत बड़ी समस्या यानि नशा से जूझ रहे हैं। नशाखोरी में डूबा हुआ व्यक्ति अनेक समस्याओं का सामना करने की अपेक्षा समस्याओं को भुलाने के लिए नशे का सहारा लेता है। जिसकी वजह से वह अपने व अपने परिवार के विनाश के साथ-साथ संपूर्ण समाज के विनाश का भी कारण बनता है।

नशाखोरी की चपेट में आने वाला युवावर्ग इस तरह जाल में फंसता है कि उसकी सोचने समझने की क्षमता भी नष्ट हो जाती है। जिससे वे अपने जीवन के लिए कोई भी निर्णय नहीं ले पाता है। नशा करने के लिए वे अनेक मादक पदार्थों का जैसे – शराब, गांजा, चरस, स्मैक, मोर्फिन, कोको पत्ती, ताड़ी, अफीम, बीड़ी, सिगरेट आदि का सेवन करने लगता है। नशाखोरी से व्यक्ति अनेक ऐसे गलत कार्यों को करने लगता है जो समाज के खिलाफ होते हैं। नशे के कारण आर्थिक हानि, सड़क दुर्घटना, हत्या, बलात्कार, घरेलु व सामाजिक झगड़े, स्वास्थ्य की हानि, व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा, बच्चों की शिक्षा एवं संस्कार आदि में नशे का कुप्रभाव पड़ता है। वर्तमान में देश में लगभग सभी वर्ग छोटे-छोटे बच्चे, यहाँ तक की महिलाएं भी नशे की बुरी स्थिति में पाई जाती है। नशा मुक्ति के लिए एक आदर्श-वाक्य –

दारू – विस्की छोड़कर कर, लो धर्म-ध्यान,

वरना फिर पछताओगे, हो न सकेगा कल्याण।

नशा एक गंभीर समस्या है और वर्तमान में यह सोचना आवश्यक है कि आखिर ऐसा क्या कारण है जिसकी वजह से व्यक्ति नशे की चपेट में आ रहा है ? और आखिर क्यों हमको नशा मुक्ति दिवस व तम्बाकू मुक्त दिवस आदि मनाने की आवश्यकता पड़ रही है ? इसका प्रमुख कारण आधुनिकता हो सकती है क्योंकि लोग पश्चिमी देशों की प्रथाओं को ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं। जिस प्रकार पश्चिमी देशों में रहने वाले लोग खुले आम मादक पदार्थों का सेवन करते है ठीक उसी तरह भारत देश के लोग भी उनकी सभ्यता में मिलना चाहते है।

नशाखोरी का एक प्रमुख कारण सिनेमा, विदेशी चैनल व अश्लील चैनलों आदि भी है क्योंकि जैसा मानव देखता है वैसा बन जाता है। इसके अलावा बेरोजगारी, असुरक्षा, पारिवारिक माहौल जो हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और व्यक्ति की संगति ये सभी वजह नशाखोरी का कारण बनते हैं।

नशा मुक्ति के लिए सुझाव –

अतः वर्तमान में नशाखोरी अत्यंत सोचनीय विषय है और किस तरह इस बुराई को समाज से जड़ से उखाड़ के फेंका जा सके ? नशा से मुक्ति पाने के लिए सरकार को नशाबंदी कानून कड़ाई से लागू करके मादक पदार्थों में प्रतिबंध लगाना चाहिए और मादक पदार्थों में लिप्त व्यवसाय को कड़ा दण्ड देने का प्रावधान करना चाहिए। अभिभावकों एवं शिक्षकों को छात्रों को इस विषय में जागरूक करना चाहिए। यदि आज समाज का हर व्यक्ति नशाखोरी के विरुद्ध खड़े होकर संपूर्ण समाज को नशा से मुक्ति दिलाने का प्रयास करेगा तो अवश्य ही इस विपदा से छुटकारा पाया जा सकता है।

पढ़ें – अंधविश्वास क्या है ? भारत में अंधविश्वास प्रचलन के कारण

प्रातिक्रिया दे

Your email address will not be published.

*