परिसीमन क्या होता है ? परिसीमन का इतिहास और पृष्टभूमि

परिसीमन क्या होता है, आप भी जानना चाहते हैं परिसीमन क्या होता है और केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर पर परिसीमन क्यों लागु करना चाहती है ? तो हम आपको बताते हैं परिसीमन का अर्थ, इतिहास और जम्मू कश्मीर पर इसे लागु करने का भारत सरकार का उद्देश्य।

परिसीमन क्या है ? (What is delimitation in Hindi)

परिसीमन का अर्थ होता है ‘सीमा निर्धारण’ अर्थात किसी भी राज्य की लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण को ही परिसीमन कहते हैं। जिसका सरल शब्दों में अर्थ है की किसी राज्य के कई गाँवों, कस्बों और शहरों को एक इकाई मान या राजनितिक क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र) मान कर, पुरे राज्य को इसी तरह कई इकाइयों में बाँटकर, उस पुरे राज्य को कई विधानसभा या राज्यसभा क्षेत्र/सीटों में बाँटा जा सकें, ताकि वहां के निवासी उनके विधानसभा या राज्यसभा क्षेत्र के लिए वोट डाल कर अपना पसंदीदा मंत्री और सरकार का चुनाव कर सकें।

परिसीमन का इतिहास (History of delimitation in India in Hindi)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, भारत सरकार हर 10 साल में जनगणना के पश्चात परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। हर परिसीमन के बाद जनसंख्या के हिसाब से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों की संख्या में बदलाव किया जाता है।

भारत में वर्ष 1952 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। 1952 के बाद वर्ष 1963, 1973 और वर्ष 2002 में परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं। भारत में वर्ष 2002 के बाद परिसीमन आयोग का गठन नहीं किया गया है।

12 जुलाई 2002 को उच्चतम न्यायालय से अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। जिसने अपनी रिपोर्ट को केंद्र सरकार को वर्ष 2007 में सौंपा था जिसे तत्कालीन मनमोहन सरकार ने अनदेखा कर दिया परन्तु वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के पश्चात वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया।

Jammu and Kashmir
Jammu and Kashmir

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परिसीमन को निर्धारित करने के क्या आधार हैं ?

परिसीमन के तहत राजनितिक सीमाओं का निर्धारण 5 आधारों को ध्यान में रख कर किया जाता है –

  1. क्षेत्रफल
  2. जनसँख्या
  3. क्षेत्र की भौगोलिक एवं राजनितिक प्रकृति
  4. संचार सुविधा
  5. अन्य समसामयिक कारण

जम्मू कश्मीर पर परिसीमन लागु करने की वजह

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू कश्मीर की कुल जनसँख्या 1 करोड़ 22 लाख है जिसमें से लगभग 54 लाख (राज्य की कुल आबादी का 43 %) लोग जम्मू में और 68.88 लाख (राज्य की कुल आबादी का 55 %) लोग कश्मीर में निवास करते हैं।

जम्मू कश्मीर राज्य का लगभग 26% क्षेत्रफल जम्मू संभाग के अंतर्गत आता है और यहां विधानसभा की कुल 37 सीटें हैं। कश्मीर संभाग का क्षेत्रफल 16% है और यहाँ विधानसभा की कुल 46 सीटें हैं। जबकि जम्मू कश्मीर राज्य के सबसे ज्यादा 58.33% क्षेत्रफल वाले लद्दाख संभाग में केवल 4 विधानसभा सीटें हैं।

इसी जनसँख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से असंतुलित सीटों के बंटवारों को ठीक करने और राज्य की राजनीति से अलगाववादियों के प्रभाव को खत्म करने के उद्देश्य से वर्तमान सरकार परिसीमन करना चाहती है।

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