पृथ्वी का वायुमण्डल (Atmosphere of Earth)

पृथ्वी का वायुमण्डल (Atmosphere of Earth) : पृथ्वी को जिस गैसीय आवरण ने ढ़क रखा है उसे पृथ्वी का वायुमण्डल कहते हैं। इसी वायुमंडल के कारण पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाता है। वायुमण्डल ही सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करता है और ग्रीनहाउस प्रभाव द्वारा दिन व रात के धरातलीय तापमान को संतुलित रखकर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है। यह आवरण कई गैसों से मिलकर बना हुआ है जिसका विवरण निम्नलिखत है –

  • Nitrogen (N2)-78.08%
  • Oxygen (O2)-20.92%
  • Argon (Ar)-0.93%
  • Carbon dioxide (Co2)-0.03%
  • Neon-0.0018%
  • Helium (He)-0.0005%
  • Ozone (O3)-0.00006%
  • Hydrogen (H)-0.00005%

वायुमण्डल में दाब एक समान नहीं रहता है ये ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ कम होता जाता है। पृथ्वी के वायुमण्डल को कुल पांच परतों में विभाजित कर समझा जा सकता है –

  1. क्षोभमण्डल (Troposphere)
  2. समतापमण्डल (Stratosphere)
  3. मध्यमण्डल (Mesosphere)
  4. आयनमण्डल (Ionosphere)
  5. बाह्यमण्डल (Exosphere)

वायुमण्डल की परतों का विवरण

वायुमण्डल की परतों का विवरण
वायुमण्डल की परतों का विवरण (पृथ्वी की पहली परत से अंतिम की ओर)

 

वायुमण्डल की परतों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है-

1. क्षोभण्डल (Troposphere)

  • क्षोभण्डल वायुमण्डल की सबसे निचली परत पर है।
  • क्षोभण्डल की ऊँचाई 8-18 कि०मी० तक होती है।
  • धुर्वों पर क्षोभण्डल की ऊँचाई 8 कि०मी० तथा विषुवत रेखा पर 18 कि०मी० होती है।
  • सारी मौसमी गतिविधियाँ क्षोभण्डल में ही होती हैं जैसे बिजली का कड़कना, बादल का बनना, इंद्रधनुष आदि।
  • मौसम विभाग के गुब्बारों को भी क्षोभण्डल पर ही उड़ाया जाता है।
  • तापमान ऊपर की ओर चढ़ने पर 6.4 डिग्री/कि०मी० की दर से घटता है।
  • वायुमण्डल का 75% भार यहीं पर पाया जाता है।

2. समतापमण्डल (Stratosphere)

  • समतापमण्डल पर तापमान समान रहता है।
  • समतापमण्डल की धरती से ऊँचाई 18-50 कि०मी० तक होती है।
  • ओजोन परत समतापमण्डल में ही स्थित है। जोकि सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है।
  • तापमान समान रहने व मौसमी गतिविधियों से मुक्त होने के कारण वायु यान समतापमण्डल में ही उड़ाये जाते हैं।

3. मध्यमण्डल (Mesosphere)

  • मध्यमण्डल वायुमण्डल की तीसरी परत है तथा वायुमण्डल के बीच में स्थित है।
  • मध्यमण्डल की धरती से ऊँचाई 85 कि०मी० है।
  • मध्यमण्डल, समतापमण्डल से 60 कि०मी० ऊपर तक फैला होता है।
  • अंतरिक्ष से आने वाले उल्का पिंड मध्यमण्डल पर आकर ही जलकर समाप्त हो जाते हैं।
  • मध्यमण्डल परत में तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ने लगता है।

4. आयनमण्डल (Ionosphere)

  • आयनमण्डल धरती से 690 कि०मी० की ऊँचाई पर स्थित है।
  • आयनमण्डल 60-640 कि०मी० तक फैला हुआ है।
  • आयनमण्डल परत में ऊँचाई के साथ तापमान में तेज वृद्धि होती है।
  • आयनमण्डल परत को आयनमण्डल इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर सौर्यिक विकिरण के कारण विद्युत आवेशित कण (आयनाइज कण) पाये जाते है। जोकि रेडियो संचार में सहायक होते हैं। जिससे टेलीविजन तथा रेडियो संचार संभव हो पाता है।
  • उत्तर ध्रुवीय तथा दक्षिण ध्रुवीय प्रकाश आयनमण्डल में ही बनता है-
    • उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश को बोरियालिस कहा जाता है।
    • दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश को ऑस्ट्रेलिस कहा जाता है।

5. बाह्यमण्डल (Exosphere)

  • बाह्यमण्डल वायुमण्डल की सबसे ऊपरी सतह है।
  • बाह्यमण्डल की कोई ऊपरी सीमा नहीं है यह अंततः अंतरिक्ष में जाकर मिल जाती है।
  • बाह्यमण्डल में Hydrogen तथा Helium गैसों की अधिकता पायी जाती है।
  • बाह्यमण्डल में ही कृत्रिम उपग्रह स्थापित किये जाते हैं।
  • बाह्यमण्डल धरती से 500 से 1000 कि०मी० तक पाया जाता है।
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