बाल मजदूरी के कारण या बाल श्रम के कारण

बाल मजदूरी के कारण या बाल श्रम के कारण

बाल मजदूरी के कारण या बाल श्रम के कारण ( bal majduri ke karan ya bal shram ke karan – Causes of Child Labour in hindi) : बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं परन्तु समाज के घिनौने रूप ने देश के भविष्य को अभी से ख़त्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, समाज ने बच्चों के लिए कई समस्याओं को जन्म दिया है जिनमें से एक सबसे बड़ी सामाजिक समस्या बाल मजदूरी या बाल श्रम है।

बाल मजदूरी या बाल श्रम क्या है ?

5 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों से मजदूरी के भुगतान के साथ या भुगतान के बिना शारीरिक कार्य कराना बाल मजदूरी या बाल श्रम कहलाता है। बाल मजदूरी के अंतर्गत 5 से 14 वर्ष की आयु के ऐसे बच्चों को शामिल किया जाता है जो किसी उद्योग, कल कारखानों, छोटे ढाबों, होटलों या किसी भी छोटी या बड़ी दुकान में शारीरिक व मानसिक रूप से कार्य करते हैं।

बाल मजदूरी एक वैश्विक घटना है जो न केवल भारत देश में बल्कि विश्व के लगभग सभी देशों में देखी जाने वाली एक बड़ी समस्या है। बाल मजदूरी के अंतर्गत एक बाल मजदूर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से पीड़ित होता है, स्पष्ट शब्दों में मजदूरी करने वाले बालक का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है और शिक्षा आदि से भी वंचित हो जाने के कारण उसकी स्थिति अत्यंत निम्न हो जाती है।

अतः बाल मजदूरी को ऐसे कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है जो उसमें संलग्न बच्चों के लिए अत्यंत नुकसानदायक एवं खतरनाक सिद्ध होता है। बाल मजदूरी का कोई एक विशेष कारण नहीं है अपितु ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिसकी वजह से देश में बाल मजदूरी का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है, वे कारण निम्नलिखित हैं –

बाल मजदूरी के कारण (Causes of Child labour in hindi)

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण बच्चों का अनाथ होना है, माता-पिता के अभाव में बच्चे के पास गुजारा करने के लिए मजदूरी ही एकमात्र सहारा होती है। इसके अलावा माता-पिता का शिक्षित न होना उनके बीच असंतोष एवं लालच होना भी बाल मजदूरी का कारण है।

माता-पिता या परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अधिकांश बच्चे माता-पिता पर बोझ बन जाते हैं जिस कारण उन्हें अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मजदूरी करनी पड़ती है, कई बच्चों को अपनी खेलने-कूदने और स्कूल जाने की कच्ची उम्र में मजदूरी करनी पड़ती है।

बड़े कारखानों या उद्योगों का निर्माण भी बाल मजदूरी का कारण है क्योंकि उद्योगपति अधिक लाभ कमाने की कोशिश में बच्चों से कम वेतन में मजदूरी कराते हैं वे बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाकर उनसे बड़े-बड़े कार्यों को करने के लिए उन्हें प्रेरित करते हैं, बच्चों में ज्ञान की कमी और पैसों की कमी के कारण वे हर तरह के कामों को करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

छोटे कारखानों, लघु उद्योग, कृषि फर्म हाउस, छोटे ढाबे या रेस्टोरेंट, होटल, घरों के काम, छोटी दुकानों के मालिक कम मजदूरी में बच्चों से कार्य कराते हुए अधिक लाभ कमाने में सफल हो जाते है। इसके अलावा बच्चों को मजदूरी करने के लिए उनके मालिक कई तरह शारीरिक एवं मानसिक रूप से उन्हें प्रताड़ित करते है।

बाल मजदूरी के दुष्प्रभाव

  • बाल मजदूर का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
  • शिक्षा से वंचित हो जाने के कारण बच्चे जीवनपर्यंत निम्न स्तर का जीवन ही व्यतीत कर पाते हैं और अपने भविष्य को अच्छा बनाने में सक्षम नहीं हो पाते।
  • बाल मजदूरी से बच्चों के जीवन को कई तरीकों से खतरा बना रहता है क्योंकि बुरे लोगों द्वारा कई तरीकों से उनका शोषण किया जाता है।

बाल मजदूरी या बाल श्रम की समस्या को दूर करने के प्रयास –

  • बाल अधिकारों के लिए 20 नवंबर, 1989 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा बाल अधिकार पर राष्ट्र कन्वेंशन (UNCRC) को लागू किया गया जिसका उद्देश्य 18 वर्ष की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कार्य करना प्रतिबंधित है।
  • 12 जून को हर वर्ष विश्व बाल श्रम दिवस (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2002 में ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन’ (ILO) द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य बाल श्रम को विश्व से पूरी तरह समाप्त करना है।
  • भारत में सातवीं पंचवर्षीय योजनावधि के समय 14 अगस्त, 1987 को राष्ट्रीय बाल श्रम नीति को मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर मिली जिसका उद्देश्य बाल श्रम को समाप्त करना और उनके भविष्य के लिए उद्देश्यों को निर्धारित करना था।

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