बैंकिंग सुधार से जुड़ी महत्वपूर्ण समितियां

बैंकिंग सुधार से जुड़ी महत्वपूर्ण समितियां

बैंकिंग सुधार से जुड़ी महत्वपूर्ण समितियां :- भारतीय बैंकिंग सुधारों से जुड़ी महत्वपूर्ण समितियां यहाँ दी गयी हैं। Important committees related to Indian banking reforms notes in Hindi for UPSC & PCS.

1. चक्रवर्ती समिति

चक्रवर्ती समिति (Chakravarti Committee) ने वर्ष 1985 में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए कुछ सिफारिशें की थी। बैंकिंग क्षेत्र में उच्च स्तर की कार्यप्रणाली एवं दक्षता (Efficiency) को प्राप्त करने के लिए इस समिति का गठन किया गया था। गैर निष्पादित संपत्तियों को वसूलने के सम्बन्ध में सुझाव दिए थे। सरकार द्वारा इस समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को ठीक से लागू नहीं किया गया।

2. गोइपोरिया समिति

गोइपोरिया समिति (Goiporia Committee) ग्राहक सेवा सुधार से सम्बन्धित था।

3. नरसिंहम समिति (प्रथम)

प्रथम नरसिंहम समिति (Narasimham Committee I) वर्ष 1991 में बनी और यह समिति पूरे वित्त सुधार से जुड़ी थी। प्रथम नरसिंहम समिति की प्रमुख सिफारिशें निम्नवत हैं-

  • वर्ष 1991 में देश में LPG (Liberalisation, Privatisation and Globalisation) सुधार लागू किए जा चुके थे।
  • मौद्रिक नीति के उपकरणों (SLR, CRR, Repo Rate आदि) को नीचे लाया जाए।
  • प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए गैर-सरकारी एवं विदेशी बैंकों को बढ़ावा दिया जाए।
  • भारत में 4 स्तरीय बैंकिंग हो –
    1. अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय
    2. राष्ट्रीय स्तरीय
    3. जिला स्तरीय
    4. ग्राम स्तरीय
  • बैंकों को खुद अपनी ब्याज दरें तय करने की छूट दी जाए।
  • जो बैंक नरसिम्हन समिति के सुझावों के बाद (1994 के बाद) बनाए गए थे, उन्हें दूसरी पीढ़ी के बैंक कहा गया।

4. नरसिंहम समिति (द्वितीय)

द्वितीय नरसिंहम समिति (Narasimham Committee II) वर्ष 1998 में बनाई गई थी। ये समिति पूर्णतः बैंकिंग सुधारों से सम्बन्धित थी। नरसिंहम समिति के प्रमुख सुझाव निम्नवत हैं-

  • गैर निष्पादित संपत्तियों में सुधारों के द्वारा बैंकों के परिसंपत्तियां को मजबूत बनाने की बात की।
  • नष्ट परिसंपत्तियों के लिए एक संस्था बनाई जाए ताकि उनको वसूला जा सके।
  • प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण दान को रोक दिया जाए, जिससे बैंकों के NPA में कमी की जा सके।
  • भारतीय रिजर्व बैंक के लिए वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (Board Of Financial Supervision) लाया जाए। जोकि एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त संस्था हो एवं इसे राजनीति से दूर रखा जाए।

5. वर्मा समिति

वर्मा पैनल (Verma Committee) वर्ष 1998 में बनाया गया था। वर्मा पैनल ने कमजोर बैंकों को बड़े बैंकों में विलय कराने की सलाह दी थी।

6. दामोदरण समिति

दामोदरण समिति (Damodaran Committee) वर्ष 2011 में आयी थी। दामोदरण समिति के प्रमुख सुझाव निम्नवत हैं-

  • बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों से उपयोगकर्ता शुल्क को घटाने की सिफारिश की।
  • बैंक खातों में न्यूनतम राशि बनाय रखने की आवश्यकता को हटाने की बात कही।
  • ग्राहकों द्वारा बैंकों में ऋण हेतु बंधक रखी गयी परिसंपत्तियां एवं उनसे संबंधित दस्तावेज, ऋण चुकाने के 15 दिनों की अंतराल में वापस देने का सुझाव दिया।
  • बैंकों से संबंधित शिकायतों के लिए एकीकृत सहायता केंद्र (कॉल सेंटर) का भी सुझाव दिया।

7. विमल जालान समिति

विमल जालान समिति (Vimal Jalan Committee) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके विमल जालान ने 2013 में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट की महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नवत हैं-

  • बैंकों के लाइसेंस से जुड़े नये निर्देश दिए।
  • इन्ही की सिफारिश पर 2014 पर IDFC (Infrastructure Development Finance Company) और बंधन बैंक जो कि पहले गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC-Non Banking Financial Companies) थी, इन दोनों को बैंक का दर्जा दिया गया।
  • NBFC (Non-Banking Financial Company) – ऐसे क्षेत्र जहां ऋण की मांग ज्यादा और बैंकों की पहुंच कम वहां NBFC (प्राइवेट कंपनियां) द्वारा जनता को ऋण दिया जाता है। यदि इनका काम अच्छा होता है तो इन्हें बैंक बनाया जा सकता है। ये बैंकों से 2 तरह से अलग होती हैं-
    1. भारतीय बैंकिंग एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं होती।
    2. ये जमा नहीं सिर्फ ऋण देते हैं।
    3. बैंक बनने के लिए इनके पास 200 करोड़ की परिसंपत्तियां और इनका कुल NPA 5% से कम होना चाहिए। साथ ही इन NBFCs का किसी भी औद्योगिक घराने से सम्बन्ध नहीं होना चाहिए।

8. नचिकेत मोर समिति

नचिकेत मोर समिति (Nachiket Mor Committee) वर्ष 2016 में आयी थी। नचिकेत मोर समिति की प्रमुख सिफारिशें निम्नवत हैं-

  • प्रत्येक वयस्क का एक खाता हो।
  • देश के हर जगह 15 मिनट की दूरी पर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हों।
  • प्राथमिकता क्षेत्र को मिलने वाला ऋण 40% से बढ़ाकर 50% कर दिया जाए।
  • अपना ग्राहक जानो (KYC – Know Your Customer) को लाने का सुझाव।
  • अलग-अलग क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक एवं सेवा क्षेत्र) के लिए अलग-अलग बैंक हो।
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