भारतीय विकास बैंक (Development Bank of India)

भारतीय विकास बैंक (Development Bank of India)

भारतीय विकास बैंक (Development Bank of India) :- विकास बैंक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्थापित ऐसे बैंक होते हैं जोकि अप्रत्यक्ष रूप से जनता को वित्त उपलब्ध कराते हैं। ये जनता से सीधे जुड़कर कार्य नहीं करते बल्कि विशेष क्षेत्रों को वित्तपोषित करते हैं। विकास बैंक एक ऐसी संस्था है जो व्यापार/उद्यमों के विकास हेतु तीनों प्रमुख घटक पूंजी (Capital), ज्ञान (Knowledge) एवं उद्यम (Enterprise) की आपूर्ति करते हैं। Development bank UPSC notes in Hindi.

परिभाषा- विकास बैंक एक विशेष वित्तीय संस्था है जो औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष माध्यम से मध्यम और दीर्घकालिक वित्त प्रदान करते हैं। विकास बैंक बहुउद्देश्यीय वित्तीय संस्थान हैं जोकि प्रतिभूतियों के आधार पर  कृषि एवं औद्योगिक गतिविधियों में निवेश ऋण देते हैं।

  1. अल्पावधि ऋण- 15 माह के लिए
  2. मध्यावधि ऋण- 15 माह से 5 वर्ष के लिए
  3. दीर्घावधि ऋण- 5 वर्ष से अधिक के लिए

भारत के प्रमुख विकास बैंक (Major Development Banks of India)

1. भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI – Industrial Development Bank of India)

  • भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) की स्थापना 1 जुलाई 1964 को की गयी।
  • 2004 से पहले ये एक सार्वजनिक वित्तीय संस्था थी।
  • 2004 में इसका रूपांतरण एक बैंक के रूप में हो गया।

2. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD – National Bank for Agriculture and Rural Development)

  • राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई।
  • NABARD का मुख्यालय मुंबई में स्थित है।
  • NABARD को शिवरामन समिति की सिफारिस पर बनाया गया था।
  • नाबार्ड, ग्रामीण क्षेत्रों व कृषि को साख प्रदान करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
  • नाबार्ड की स्थापना के समय इसे 100 करोड़ की संपत्ति के साथ स्थापित किया गया था।
  • स्थापना के समय इसमें 50% भारतीय रिजर्व बैंक एवं 50% भारत सरकार की हिस्सेदारी थी।
  • वर्तमान समय में भारत सरकार की 99% एवं भारतीय रिजर्व बैंक की 1% हिस्सेदारी है।
  • नाबार्ड को रिजर्व बैंक के अधीन कृषि साख विकास, ग्रामीण विकास का कार्य सौंपा गया है।
  • पुनर्वित्त संस्था(Refinance Institution)- नाबार्ड, ग्रामीण क्षेत्रों में दिए जाने वाले संस्थागत ऋण के लिए एक पुनर्वित्त संस्था के रूप में भी काम करती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में दिये जाने वाले संस्थागत ऋणों के लिए शीर्ष स्तर की पुनर्वित्त एजेंसी है। पुनर्वित्त सुविधा राज्य भूमि विकास बैंक, राज्य सहकारी बैंक, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को उपलब्ध कराई जाती है जिससे जनता को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हो।
  • नाबार्ड प्रत्यक्ष ऋण प्रदान नहीं करता। परन्तु केन्द्र सरकार के अनुमोदन पर प्रत्यक्ष ऋण भी प्रदान कर सकता है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
  • कृषि एवं लघु उद्योगों को विकास से संबंधित परियोजनाओं हेतु विदेशी सहायता नाबार्ड के ही माध्यम से प्राप्त होती है।

3. औद्योगिक पुनर्निर्माण बैंक (IRBI – Industrial Reconstruction Bank of India)

  • वर्ष 1971 में IRCI (Indian Reconstruction Corporation of India) के रूप में स्थापना की गयी।
  • वर्ष 1985 में IRBI (Industrial Reconstruction Bank of India) में परिवर्तित कर दिया गया।
  • खस्ता हालत, बीमार एवं बिगड़े हुए उद्योगों (निजी/सरकारी) के पुनर्निर्माण के लिए ऋण उपलब्ध कराता है।

4. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI – Small Industries Development Bank of India)

  • भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) की स्थापना अक्टूबर, 1989 में की गयी थी।
  • SIDBI ने अपना कार्य अप्रैल, 1990 में प्रारंभ किया।
  • सिडबी का मुख्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।

5. राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB – National Housing Bank)

  • राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) की स्थापना 9 जुलाई 1988 में की गयी थी।
  • राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) देश में आवास वित्त सम्बन्धित मामलों की प्रमुख संस्था है। सभी आवासीय वित्त संस्था का नियंत्रण कर्ता NHB ही है।

6 . भारतीय आयात निर्यात बैंक (EXIM – Export & Import Bank of India)

  • भारतीय आयात निर्यात बैंक (EXIM Bank) की स्थापना वर्ष 1982 में की गयी थी।
  • भारतीय आयात निर्यात बैंक (EXIM Bank) दूसरे देशों में आयात-निर्यात करने वाले उद्योगों की सहायता करता है एवं उनका नियामक भी है।

7. भूमि विकास बैंक (Land Development Bank)

  • भूमि विकास बैंक की स्थापना 1929 में मद्रास में की गयी थी। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में भी स्थापना की गयी।
  • भूमि विकास बैंक, भूमि को आधार मानकर दीर्घावधि ऋण प्रदान करते हैं। ये बैंक किसानों की भूमि या अचल संपत्ति को बन्धक रखकर ऋण प्रदान करते हैं।
  • इसकी संरचना द्विस्तरीय है-
    i. ऊपरी स्तर- केन्द्रीय भूमि विकास बैंक प्रत्येक राज्य में।
    ii. निचली स्तर- प्राथमिक भूमि विकास बैंक।

8. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Bank)

  • इसकी स्थापना 2 अक्टूबर 1975 को हुई थी। इन बैंकों की स्थापना एम0 नरसिम्हन समिति की सिफारिशों के आधार पर की गयी थी।
  • प्रारम्भ में केवल 5 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को स्थापित किया गया था।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को कानूनी दर्जा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम 1976 के तहत मिलता है।
  • स्थापना के समय केन्द्र सरकार की 50%, राज्य सरकार की 15% एवं प्रवर्तक बैंकों की 35% हिस्सेदारी थी। प्रवर्तक बैंक वे बैंक होते हैं जोकि उस भौगोलिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक होते हैं, उदाहरण के लिए एस0बी0आई0।
  • इन बैंकों का मुख्य उद्देश्य –
    i. ग्रामीण जनता को बैंकिंग से जोड़ना।
    ii. एक छोटे क्षेत्र को आधार बनाकर विशेषकर(ग्रामीण क्षेत्र) में सीमांत एवं लघु कृषक, कारोबार व छोटे उद्यमियों को ऋण और जमा सुविधायें दिलवाना।
  • इनकी 75% से अधिक शाखाएं ग्रामीण क्षेत्र में है।
  • इसका प्रमुख कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की शाखाओं का विस्तार करना था। सर्वाधिक शाखाएं उत्तर प्रदेश में बनायी गयी। इन बैंकों की कोई भी शाखा गोवा और सिक्किम में नहीं बनायी गयी।
  • 1990 तक इनकी संख्या 5 से बढ़कर 196 तक पहुंच गई। 1991 में नरसिम्हन समिति ने सुझाव दिया कि  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को उनके प्रवर्तक बैंकों में सम्मिलित कर दिया  क्योंकि 196 में 172 बैंक घाटे में चल रहे थे।
  • वर्ष 2005 में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी और धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होने लगी।
  • वर्तमान में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या कुल 56 रह गई है।

9. सहकारी बैंक (Cooperative Bank)

  • सहकारी बैंक छोटे आकार के बैंक है जिनके पास शहरी, ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में काम करने की क्षमता है।
  • सहकारी बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित किये जाते हैं।
  • ये बैंक भारतीय बैंकिंग अधिनियम 1949 एवं सहकारी समिति अधिनियम 1965 के तहत कार्य करते हैं।
  • इनकी स्थापना का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
  • सहकारी बैंक की संरचना त्रिस्तरीय है –
    i. राज्य स्तर पर- राज्य सहकारी बैंक।
    ii. जिला स्तर पर- केन्द्रीय जिला सहकारी बैंक।
    iii. ग्राम स्तर पर- प्राथमिक कृषि साख समितियां।
  • वर्ष 1993 में राष्ट्रीय सहकारी बैंक की स्थापना की गयी। ये सभी सहकारी साख संगठन की राष्ट्रीय शाखा के रूप में कार्य करता है।
  • सहकारी बैंकों के लिए नियम –
    i. 60% ऋण राशि प्राथमिक क्षेत्र(कृषि) में देंगे।
    ii. 25% ऋण राशि एस0सी0, एस0टी0, ओ0बी0सी0 एवं महिला को दी जाएगी। ।
  • इनकी मुख्य क्रियान्वयन की इकाईयाँ प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियां है जो कम से कम 10 लोग से मिलकर बनी होनी चाहिए।

10. भारतीय महिला बैंक (Bharatiya Mahi Bank)

  • विश्व में पाकिस्तान व तंजानिया के बाद भारत तीसरा ऐसा देश बना जहां महिला बैंक की स्थापना की गयी।
  • इसकी स्थापना 19 नवंबर 2013 को की गयी। इस दिन इंदिरा गांधी के जन्मदिवस पर मुंबई में पहला बैंक बनाया गया।
  • ध्यान देने योग्य बात यह है कि पहला बैंक मुंबई में स्थापित किया गया परन्तु भारतीय महिला बैंक का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।
  • इसकी घोषणा 2013-14 के बजट में की गयी थी। इसे सार्वभौमिक बैंक कहा गया जो निजी/सरकारी क्षेत्र के बैंकों की सारी सुविधाएं देगा।
  • भारतीय महिला बैंक के नियम-
    i. सभी कर्मचारी महिलाएं हो।
    ii. महिला उद्यमियों को ऋण देने में प्राथमिकता
    iii. इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में सभी महिलाएं है।
  • उषा अनन्त सुभ्रमण्यम इसकी पहली महिला अध्यक्ष बनायी गयी।

11. मुद्रा बैंक (MUDRA- Micro Units Development Refinance Agency)

  • मुद्रा बैंक की घोषणा वर्ष 2015-2016 के बजट में 8 अप्रैल 2015 को की गयी थी।
  • इसे 20,000 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी से शुरू किया गया।
  • इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।
  • मुद्रा बैंक का प्रमुख उद्देश्य छोटे कारोबारियों को ऋण देना है। ये सिडबी(SIDBI) की एक ईकाई के रूप में संचारक का कार्य करता है।
  • मुद्रा बैंक शिशु, किशोर एवं तरुण तीनों योजनाओं के तहत ऋण उपलब्ध कराता है –
    i. शिशु ऋण योजना- 50 हजार तक ऋण।
    ii. किशोर ऋण योजना- 50 हजार से 5 लाख तक।
    iii. तरूण ऋण योजना- 5 लाख से 10 लाख तक।
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