फासीवाद किसे कहते हैं - परिभाषा, सिद्धांत, विशेषताएं, कारण

फासीवाद किसे कहते हैं – परिभाषा, सिद्धांत, विशेषताएं, कारण

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फासीवाद किसे कहते हैं (फासीवाद का अर्थ क्या है, फासीवाद की परिभाषा)

लकड़ियों के बंधे हुए गट्ठे को फासीवाद (fascism) कहा जाता है। फासीवाद वास्तव में लकड़ी का बना हुआ एक गट्ठा एवं कुल्हाड़ी का चिन्ह होता है जिसे एकता व शक्ति का प्रतीक माना जाता है। फासीवाद एक इटैलिक शब्द है जिसकी उत्पत्ति फासियो (Fascio) शब्द से हुई है। फासीवाद शब्द को रोम में राष्ट्रीय चिन्ह को दर्शाए जाने के लिए प्रयोग किया जाता है जिसमें लकड़ी के गट्ठों एवं कुल्हाड़ी का चिन्ह निहित है। साधारण भाषा में कहा जाए तो फासीवाद एक सरकारी संरचना है जो समाज में एकता का प्रतीक है। फासीवाद एक ऐसी विचारधारा है जो राजनीतिक दल, समाज में समानता, समाजवाद, प्रजातंत्र एवं स्वतंत्रता के मानवीय मूल्यों के विरोध को प्रदर्शित करता है। यह परम्परावाद एवं युद्धवाद जैसी नीतियों का समर्थन करता है। फासीवाद की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात यूरोप में फासीवाद का प्रचलन शुरू हुआ जिसके कारण यूरोप के नागरिकों में राष्ट्रीय एकता नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई।

फासीवाद का उदय

फासीवाद की उत्पत्ति इटली में मुसोलिनी द्वारा सन 1919 में की गई। यह प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात शुरू किया जाने वाला एक आंदोलन था जिसे फासीवाद के रूप में जाना जाता था। फासीवाद की प्रक्रिया ने इटली के नागरिकों एवं सैनिकों को काफी प्रभावित किया था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद इटली की आर्थिक स्थिति अन्य देशों के मुकाबले बेहद कमजोर थी जिसके कारण फासीवाद की प्रक्रिया का उदय तेजी से होने लगा। इस स्थिति में मुसोलिनी ने मार्क्सवाद, शांतिवाद एवं स्वतंत्रता की नीतियों में फासीवाद की प्रक्रिया को एक विरोधी प्रक्रिया के रूप में उजागर किया। इटली में प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात फासीवाद आंदोलन काफी तेजी से विकसित होने लगा। परंतु फासीवाद के स्वरूप में कई कमियां थी जो एक और तो पूंजीपति वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद रहीं परंतु वहीं दूसरी ओर निम्न वर्ग के लोगों के लिए नुकसानदेह भी रहा। सन 1919 में मुसोलिनी के नेतृत्व में फासीवाद की शुरुआत हुई जिसके कारण इटली में मुसोलिनी का प्रभाव और अधिक बढ़ गया। इसके बाद सन 1922 में मुसोलिनी ने फासीवाद को एक नई गति प्रदान की जिसके कारण इटली में पूर्ण रूप से अधिनायकवाद तानाशाही की स्थापना हुई।

फासीवाद के मूल सिद्धांत

मुसोलिनी के अनुसार फासीवाद एक व्यवहारिक आंदोलन है जिसके अंतर्गत किसी निश्चित सिद्धांत का अभाव होता है। मुसोलिनी का पूरा नाम बेनिटो मुसोलिनी है जिसका जन्म सन 1883 में हुआ था। बेनिटो मुसोलिनी के पिता समाजवादी विचारधारा का समर्थन करते थे जिसके कारण मुसोलिनी अपने पिता के विचारधाराओं से बेहद प्रभावित हुआ। मुसोलिनी ने अपने जीवन काल में कई क्रांतिकारी आंदोलन किए जिसके कारण उसे कई बार जेल भी जाना पड़ा। मुसोलिनी इटली के राष्ट्रीय ध्वज एवं चर्च का विरोध करता था जिसके कारण इटली की सरकार उसे एक राष्ट्र विरोधी मानती थी। मुसोलिनी फासीवाद को मूल रूप से एक व्यवहारिक क्रांतिकारी आंदोलन मानता था जिसका समाज में गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।

इसके अलावा फासीवाद के कई अन्य सिद्धांत भी हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:-

जनतंत्र विरोधी

फासीवाद सामाजिक रुप से एक जनतंत्र विरोधी तत्व का कार्य करता है। मुसोलिनी के कथनानुसार फासीवाद एक जनतंत्र विरोधी प्रक्रिया है जो जनतंत्र एवं राजनीतिक मूल्यों को अस्वीकार करता है।

उदारवाद विरोधी

फासीवाद एक ऐसी प्रणाली है जो सामाजिक रूप से उदारवादी विचारधारा का विरोध करता है। मुसोलिनी का मानना था कि उदारवाद नागरिकों को अधिकार नहीं दिला सकता जिसके कारण फासीवाद उदारवाद का पूर्ण रूप से विरोध करता था। इसके अलावा उदारवाद की कार्यशैली कालातीत हो चुकी थी जो फासीवाद के दृष्टिकोण से उचित नहीं था।

फासीवाद की विशेषताएं

फासीवाद की कई विशेषताएं हैं जो कुछ इस प्रकार हैं :-

  • फासीवाद के अंतर्गत लोक कल्याण की भावना निहित है जो समाज में हर वर्ग के व्यक्तियों के बीच होने वाले संघर्ष को समाप्त करके लोक कल्याण की भावना को स्थापित करने का प्रयास करती है। फासीवाद के कारण समाज में समानता का भाव उत्पन्न होता है जिससे उच्च एवं निम्न वर्गीय लोगों के बीच समानता स्थापित होती है।
  • फासीवाद व्यक्तिवाद का मुख्य रूप से विरोध करता है जिसके द्वारा राज्य एवं देश में स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जाती है। फासीवाद के अंतर्गत नागरिकों की स्वतंत्रता को सर्वोपरि माना जाता है जिसके कारण व्यक्तिवाद की कई नीतियां बाधित होती हैं।
  • फासीवाद मार्क्सवाद के नियमों का उल्लंघन करके सभी वर्ग के समूह की भावना में समानता स्थापित करने का कार्य करता है। फासीवाद कार्ल मार्क्स द्वारा दिए गए सिद्धांतों को न मानकर संपूर्ण वर्ग को एकजुट होकर मिलाने का कार्य करता है।
  • फासीवाद के अंतर्गत राज्य के एक ही दल को सर्वोच्च स्तर पर बल दिया जाता है जिससे समाज में दल की सर्वोच्चता स्थापित होती है।
  • फासीवाद विश्व भर में राजनीतिक रूप से शांतिवाद का भी विरोध करता है जिसके कारण विश्व भर के राजनीतिक दलों में अशांति का प्रचलन आरंभ हुआ।

फासीवाद के कारण

फासीवाद का उदय सर्वप्रथम इटली में प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात आरंभ हुआ था जिसके कई निम्नलिखित कारण थे:-

  • व्यापक जन असंतोष
  • आर्थिक असंतोष
  • साम्यवाद विरोध
  • राष्ट्र के प्रति असंतोष
  • उग्र राष्ट्रीयता का प्रचार
  • मुसोलिनी का प्रभावशाली व्यक्तित्व

व्यापक जन असंतोष

पेरिस के एक सम्मेलन में इटली की जनता में असंतोष की भावना ने जन्म लिया जिसका मुसोलिनी ने भरपूर लाभ उठाया। पेरिस के इस सम्मेलन में इटली का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति बेहद निराश हुए जिसके कारण इटली में जन असंतोष ने व्यापक रूप ले लिया। इस दौरान मुसोलिनी ने जनता के बीच अपने सिद्धांतों का जम के प्रचार व प्रसार किया।

आर्थिक असंतोष

प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात जन-धन का व्यापक रूप से विनाश हो चूका था। इस दौरान केंद्र सरकार पर अंतरराष्ट्रीय ऋण का बोझ और अधिक बढ़ गया जिसके कारण इटली में मुद्रा का मूल्य गिर गया। इसके अलावा इटली में उद्योग कारखानों एवं व्यवसाय की भी हानि हुई जिसके कारण कई राज्यों में बेरोजगारी की समस्या और अधिक बढ़ गई। इसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने जनता के बीच असंतोष तथा समस्याओं का निवारण करने हेतु कई प्रयास किए जो विफल रहे।

साम्यवाद विरोध

फासीवाद को एक साम्यवाद विरोधी कारक माना जाता है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद इटली में दिन प्रतिदिन साम्यवाद का प्रसार बढ़ता जा रहा था जिसके परिणाम स्वरूप मध्यवर्गीय व्यवसाय से जुड़े लोगों के मूल्यों को निश्चित कर उनके मुनाफे पर अंकुश लगा दिया गया था। इससे प्रभावित होकर मध्यवर्गीय लोगों में विरोध की भावना ने जन्म लिया। मुसोलिनी ने इस अवस्था में फासीवाद की प्रक्रिया को नई गति प्रदान की जिसके कारण फासीवाद की स्थापना संपन्न हो सकी।

राष्ट्र के प्रति असंतोष

19वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में पूरे यूरोप के अधिकांश देशों ने साम्राज्यवादी नीतियों को अपनाना आरंभ कर दिया था। इस दौरान इटली की केंद्र सरकार ने भी कई महाद्वीपों में उपनिवेश स्थापित करने के कई प्रयास किए जो असफल रहे जिसके परिणाम स्वरूप इटली में राष्ट्रीयता की भावना पर आघात हुआ।

उग्र राष्ट्रीयता का प्रचार

इटली में कई विचारकों एवं दार्शनिकों द्वारा उग्र राष्ट्रीयता का प्रचार एवं प्रसार जारी था। कई विद्वानों का मानना था कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधित्व करता है जो अपने फैसलों में कभी कोई गलती नहीं कर सकता। इन विद्वानों ने इटली की जनता में कई क्रांतिकारी राष्ट्रीय विचारों का प्रचार किया जिसके कारण फासीवाद की लोकप्रियता में वृद्धि हुई।

मुसोलिनी का प्रभावशाली व्यक्तित्व

मुसोलिनी एक ऐसा व्यक्ति था जो व्यवहारवाद को अधिक महत्व देता था जिसके कारण इटली की जनता उसे अधिक महत्व देती थी। मुसोलिनी एक प्रबल राष्ट्रवादी व्यक्ति था जो देश में प्राचीन रोमन साम्राज्य को स्थापित करने का विचार रखता था। मुसोलिनी ने देश में कई बार राष्ट्रीय एकता को स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जिससे इटली की जनता उससे बेहद प्रभावित थी। इसके अलावा मुसोलिनी ने सन 1919 में फासिस्ट दल की भी स्थापना की जिसका उसका एकमात्र उद्देश्य साम्यवाद को रोककर फासीवाद को बढ़ावा देना हो चूका था। इसके बाद सन् 1921 में फासिस्ट दल के सदस्यों ने एक राजनीतिक दल में अपना गठबंधन कर लिया जिसके कारण फासिस्टों को अपनी शक्तियों को बढ़ाने का अवसर मिला। कई क्रांतिकारी आंदोलनों के पश्चात अक्टूबर, 1922 में मुसोलिनी को इटली का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया।

फासीवाद का निष्कर्ष

फासीवाद के कारण इटली एवं जर्मनी में फासिस्ट शक्तियों के उदय हेतु समकालीन यूरोपीय परिस्थितियों को उत्तरदाई माना जाता है। फासीवाद के कारण यूरोपीय देशों में कई तानाशाही प्रवृत्तियाँ आई जिसका उद्गम स्थल इटली रहा। फासीवाद उग्र राष्ट्रवाद एवं अन्य सभी प्रकार के विरोधियों के दमन में अटल विश्वास रखता है। इटली के बाद फासीवाद की प्रक्रिया को जर्मनी ने भी स्वीकार किया जिसके कारण नाजीवाद का जन्म हुआ। इसके अलावा कई विद्वानों के अनुसार फासीवाद को मृत्यु का एक दर्शन भी माना जाता है क्योंकि फासीवादी विचारधारा के अनुसार दूसरों को मारकर या दबाकर जीवन व्यतीत करने में विश्वास किया जाता है। केवल इतना ही नहीं फासीवाद को साम्यवाद के विरोधी तत्व के रूप में भी देखा जा सकता है। साम्यवाद के अंतर्गत जीवन के आदर्शों पर विचार किया जाता है परंतु फासीवाद में जीवन के आदर्शों पर विचार ना करके केवल स्वयं को महान दर्शाया जाता है। यह मूल रूप से फासीवाद का एक प्रमुख दर्शन है। वर्तमान समय में फासीवाद एक फ्रिंज आंदोलन के रूप में मौजूद है जिसके कारण कई देशों में इसका प्रभाव देखने को मिलता है।

फासीवाद और नाजीवाद में अंतर

फासीवाद की शुरुआत इटली में बेनिटो मुसोलिनी के शासनकाल के दौरान हुई थी। वही नाजीवाद की शुरुआत एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में हुई थी। फासीवाद एवं नाजीवाद की विचारधाराओं में कई अंतर है जो कुछ  इस प्रकार हैं:-

फासीवाद

  • फासीवाद को एक तानाशाही सरकार के रूप में देखा जा सकता है जो समाज के लगभग सभी वर्ग के लोगों को नियंत्रित कर सकता है।
  • फासीवाद की अवधि सन 1919- 1945 के मध्य निर्धारित की जा सकती है।
  • फासीवादी विचारधारा के पास अपना एक केंद्रीय पहलू था जो मुसोलिनी के सिद्धांतों पर आधारित था।
  • फासीवाद एक ऐसी प्रणाली थी जो नस्लवाद के विचारों से असहमत थी। इसके अंतर्गत जातिवाद को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था। केवल इतना ही नहीं फासीवाद के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को बहुमत के द्वारा सदस्यों में बदलने का मौका दिया गया।
  • फासीवाद के अंतर्गत राज्य एवं देश की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए जिसका उद्देश्य समाज में शांति व्यवस्था को स्थापित करना था।

नाजीवाद

  • नाजीवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है जो नागरिकों के राष्ट्रवादी भावना का खंडन करके एक तानाशाह व्यक्ति की नीतियों पर जीवन यापन करने हेतु बाधित करती है।
  • नाजीवाद की अवधि सन 1933-1945 के मध्य निर्धारित की जाती है।
  • नाजीवाद के पास अपना कोई केंद्रीय पहलू नहीं था।
  • नाजीवादी विचारधारा में नस्लवाद के विचार बहुत अधिक थे। इसके अंतर्गत समाज में भेदभाव की धारणा ने जन्म लिया जिसे नस्लवाद के नाम से भी जाना जाता है। नाजीवाद के कारण अल्पसंख्यकों की नस्लों को पूर्ण रूप से मिटाने का भरपूर प्रयास किया गया।
  • नाजीवाद के अंतर्गत देश की न्यायिक व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था का खंडन करके कई दुर्भाग्यपूर्ण कार्य किए गए जिसके कारण देश की शांति व्यवस्था भंग हुई।

फासीवाद और नाजीवाद में समानता

फासीवाद एवं नाजीवाद की विचारधाराओं में कई समानताएं थी। प्रथम विश्व युद्ध एवं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूरे यूरोप में शासन करने वाली केंद्र सरकार की व्यवस्था को फासीवाद के नाम से जाना जाता है वहीं नाजीवाद एक ऐसी व्यवस्था है जिसका प्रतिनिधित्व एडोल्फ हिटलर के द्वारा किया गया जिसमें कई क्रांतिकारी आंदोलन शामिल है। फासीवाद एवं नाजीवाद में कई प्रकार की समानताएं हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:-

  • फासीवाद एवं नाजीवाद की विचारधारायें अधिनायकवादी शासन का समर्थन करती हैं। अधिनायकवादी शासन वह शासन प्रणाली है जिसे तानाशाही शासन भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत एक व्यक्ति पूरे देश पर हथियारों के बल पर शासन करता है।
  • फासीवाद एवं नाजीवाद की विचारधाराओं के अनुसार राज्य को सर्वोच्च मानकर नागरिकों के सभी मौलिक अधिकारों एवं व्यक्तिगत अधिकारों की स्वतंत्रता को दबाया जाता है।
  • फासीवाद एवं नाजीवाद में विभिन्न राजनीतिक संस्थाओं एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाकर उसका तिरस्कार किया जाता है एवं नागरिकों के मूल अधिकारों पर रोक लगाकर उन पर शासन किया जाता है।
  • फासीवाद एवं नाजीवाद वह शासन प्रणाली है जिसके अंतर्गत आक्रात्मक साम्राज्यवाद एवं राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया जाता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देकर नागरिकों के मूल अधिकारों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जाता है।
  • फासीवाद एवं नाजीवाद के अंतर्गत लोकतंत्र-विरोधी, सांप्रदायिकता-विरोधी एवं अति-राष्ट्रवादी विचारधाराओं को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। मुसोलिनी एवं हिटलर के अनुसार फासीवाद व नाजीवाद युद्ध के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य कर सकते हैं।

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