Category archive

General Knowledge

भारत की प्रमुख बांध परियोजनाएँ

भारत की प्रमुख बांध परियोजनाएँ :- भारत की प्रमुख बांध परियोजनाएँ किस राज्य और किस नदी पर स्थित हैं आदि प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं उन्हीं परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए भारत की प्रमुख बांध परियोजनाओं की जानकारी यहाँ दी गयी है – (Major dam projects in India in Hindi) भारत… Keep Reading

भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं

भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं :- भारत में बड़े बांधों को बहुउद्देशीय परियोजना भी कहा जाता है क्योंकि ऐसे बांध द्वारा एक साथ कई उद्देश्यों की पूर्ति होती है जैसे जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई हेतु पानी, मछली पालन, पर्यटन, बाढ़ में कमी आदि। बड़े बांधों के साथ पारिस्थितिकी तथा पर्यावरणीय मुद्दे भी जुड़े रहते है, जिस कारण… Keep Reading

भारत की मिट्टी के प्रकार

भारत की मिट्टी के प्रकार : ICAR(Indian Council for agricultural Research, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के अनुसार भारत में 8 प्रकार की मिट्टियां पायी जाती हैं – (Soil types of India notes in Hindi for UPSC, PCS) पर्वतीय मृदा जलोढ़ मृदा काली मृदा लाल मृदा लैटेराइट मृदा पीट एवं दलदली मृदा लवणीय एवं क्षारीय मृदा भारत… Keep Reading

मृदा की संरचना

मृदा पर प्रभाव डालने वाले पांच कारक होते हैं – पैतृक शैल- मृदा को आधारभूत खनिज एवं पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। जलवायु- मृदा में होने वाले रासायनिक एवं सूक्ष्म जैविक क्रिया को नियंत्रित करती है। वनस्पति- मृदा में ह्यूमस की मात्रा को नियंत्रित करती है। भूमिगत जल- मृदा को नमी प्रदान करता है। सूक्ष्म… Keep Reading

वृष्टि छाया क्षेत्र एवं अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ)

वृष्टि छाया क्षेत्र जब आद्र पवने पहाड़ी से टकराकर ऊपर उठने लगती है तब उसके तापमान में कमी आने लगती है जिसे एडियाबेटिक ताप ह्रास कहा जाता है जिससे आद्र हवाएं संघनित होकर जल बूंदों के रूप में गिरने लगती है। इसके विपरीत जब पहले पहाड़ी की दूसरी तरफ से ढ़ाल के साथ नीचे उतरती… Keep Reading

भारत की प्राकृतिक वनस्पति का परिचय

भारत की प्राकृतिक वनस्पति का परिचय :- भारत में वन वर्षा का अनुसरण करते हैं। भारत एक मानसूनी जलवायु वाला क्षेत्र होने के कारण यहां पर अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में ऊष्णकटिबंधीय वर्षा वन पाये जाते हैं। भारत में मुख्य रूप से पांच प्रकार के वन पाये जाते हैं – ऊष्णकटिबंधीय वर्षा वन पर्णपाती वन… Keep Reading

भारत में चक्रवातों की उत्पत्ति

भारत में चक्रवात मुख्यतः बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं तथा पश्चिम से पूर्व की दिशा में गति करते हुए पूर्वी घाट से टकराते है। परिणामस्वरूप पूर्वी घाट में वर्षा तथा विनाश का कारण बनते हैं। सितंबर माह के अंत तक बंगाल की खाड़ी गरम हो जाती है। खाड़ी की ये ऊष्ण जल सतह… Keep Reading

मानसून का निवर्तन (लौटता मानसून)

21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं। 22 जून से सूर्य दक्षिणायन होना प्रारम्भ कर देता है। 23 सितंबर को सूर्य वापस विषुवत रेखा के ठीक ऊपर चमकता है। तथा 22 दिसंबर को सूर्य की लम्बवत किरणें मकर रेखा के ऊपर पड़ती हैं। इसके परिणाम स्वरूप पश्चिमोत्तर भारत में बना… Keep Reading

शीत ऋतु में होने वाली वर्षा

भारत में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा 20 दिसंबर से लेकर मार्च तक होती है। शीत ऋतु में मानसून के दो क्षेत्र है पहला पश्चिमोत्तर भारत के पहाड़ी एवं मैदानी भाग तथा तमिलनाडु का कोरोमण्डल तट। शीत ऋतु में वर्षा दो कारणों से होती है – पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पूर्वी मानसून 1. पश्चिमी विक्षोभ यह… Keep Reading

दक्षिण पश्चिम मानसून

21 मार्च को सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत चमकता है। उसके बाद धीरे-धीरे उत्तरायण होने लगता है तथा 21 जून तक कर्क रेखा के ऊपर पहुंच जाता है। इसके साथ साथ ITCZ (Inter Tropical Conversion Zone, अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) भी उत्तर की तरफ खिसकने लगता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में गर्मी बढ़ने लगती है।… Keep Reading

1 2 3 24