उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थान एवं विश्वविद्यालय

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थान एवं विश्वविद्यालय  (Higher education institutions and universities of Uttarakhand)

राज्य गठन से पूर्व उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए यहां सभी श्रेणियों (Categories) के कुल 6 विश्वविद्यालय (University) तथा इससे सम्बद्ध 100 से अधिक स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Undergraduate and Graduate College) तथा अन्य संस्थान (Other Institutions) थे। राज्य में ज्यादातर स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Undergraduate and Graduate College) कुमाऊं व गढ़वाल विश्वविद्यालय (Kumaon and Garhwal University) से सम्बद्ध थे।

राज्य के गठन के बाद 2012 के अंत तक उच्च शिक्षा (Higher education) के लिए सरकारी क्षेत्र (Government Sector) के 8 तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) के 11 नये विश्वविद्यालयों (Universities) की स्थापना की गई है।

इस प्रकार राज्य में सन 2012 के अंतर्गत सभी श्रेणी के विश्वविद्यालयों (Universities) की कुल संख्या 25 हो गई है। इसमें 13 विश्वविद्यालय सरकार के और 11 निजी क्षेत्र के है।

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (Indian Institute of Technology Roorkee)

उत्तर भारत के तकनीकी शिक्षा के मामले में सबसे प्रतिष्ठित संस्थान (Prestigious Institute) रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज (Roorkee Engineering College) देश एवं एशिया का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज है। भारत के औद्योगीकरण (Industrialization) एवं गंगा नहर (Ganga Canal) के निर्माण में लगे लोगों को प्रशिक्षण  (Training) देने के लिए इस संस्थान की स्थापना 1847 में हुई। 1854 में इसका नाम थॉमस कॉलेज ऑफ़ सिविल इंजीनियरिंग (Thomas College of Civil Engineering) तथा स्वतंत्रता के बाद 1949 में थॉमस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को रुड़की विश्वविद्यालय (Roorkee University) कर दिया गया। इस प्रकार स्वतंत्रत भारत का यह पहला तकनीकी विश्वविद्यालय (The first technical university) हो गया।

रुड़की के अलावा इसका एक परिसर (Complex) सहारनपुर (पेपर तकनीकी विश्वविद्यालय) (Saharanpur (Paper Technical University)) में भी है। यह भारत का पहला ऐसा संस्थान जहां भूकंप इंजीनियरिंग (Earthquake Engineering) के अलग विभाग (Different Departments) है, जिसे 1960 में शुरू किया गया। यहाँ पर 1995 में शुरू किया गया जल संसाधन विकास प्रशिक्षण केंद्र (Water Resources Development Training Centre) भी भारत का अकेला केंद्र है। 1986 में स्थापित मॉडल शेकटेबल फैसिलिटी (Model Sektable Facility) भी सिर्फ यही है।

इस कॉलेज को 1 जनवरी (January) 2002 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) (Indian Institute of Technology (IIT)) का दर्जा प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह देश का सातवां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बन चुका है।

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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Gobind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology)

देश का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय (Agricultural University) की स्थापना 17 नवंबर (November) 1960 को पंतनगर (Pantnagar) में जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) द्वारा कराई गई थी। वर्तमान में यह उधम सिंह नगर जिले में स्थित है। इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति डॉक्टर केनेथ एंथोनी पार्कर स्टीवेंसन (First Vice-Chancellor Dr Kenneth Anthony Parker Stevenson) थे।

इस विश्वविद्यालय ने देश में हरित क्रांति (Green revolution) लाने के साथ ही शोध (Research) के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए है। यह विश्वविद्यालय अब तक अनाज की 215 से अधिक प्रजातियां (Species) विकसित कर चुका है। इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत 10 कॉलेज व एक इंजीनियरिंग कॉलेज (College and an engineering college) है।

उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (Horticulture and Forestry University in Uttarakhand)

इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में भरसा (पौड़ी) (Bhrsa (Pauri)) की गई है। पहले यह पंतनगर विश्वविद्यालय (Pantnagar University) के रानीचौरी टिहरी परिषद (Ranichauri Tehri Council) में शुरू किया गया था।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार (Gurukul Kangri University, Haridwar)

यह देश का अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है, जो प्राचीन भारतीय विद्याओं (Ancient Indian Disciplines) के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक विषयो (Modern scientific Subjects), प्रबंध (Management), प्रौद्योगिकी तथा कंप्यूटर (Technology & Computers) की उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। यहां आज भी गुरुकुलीय आवास व्यवस्था (Gurukuliy Housing System) है।

इसके तहत स्नातक शिक्षण काल (Graduate Teaching Time) 15 वर्ष का है I प्रथम 12 वर्ष तक विद्यालय के आश्रम व्यवस्था (Ashram System) में रहना पड़ता है। इसके पश्चात छात्र स्नातक तथा स्नातकोत्तर (Undergraduate and Postgraduate) पाठ्यक्रम पूर्ण करता है। इसका संपूर्ण शिक्षण (Full Tuition) कार्य 6 संस्कारों (Sacraments) में समाहित (Contained) है। इसके प्राच्य विद्या (Oriental Studies) संकाय के अंतर्गत वेद, संस्कृत, दर्शन, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति तथा योग (Vedas, Sanskrit, Philosophy, Ancient Indian History and Culture and Yoga) की उच्च शिक्षा दी जाती है। इस विषय में शोध की भी व्यवस्था है।

इस विद्यालय की स्थापना दयानंद सरस्वती (Dayananda Saraswati) के परम शिष्य स्वामी श्रद्धानंद (Swami Shraddhanand) ने 1900 में पंजाब (Punjab) की गुजरांवाला (Gujranwala) में की थी। लेकिन 2 मार्च (March) 1902 को इस का स्थानांतरण (Transfer) कर हरिद्वार के कांगड़ी (Kangri, Haridwar) में कर दिया। 1924 में इसे कांगड़ी (Kangari) गांव से हटाकर कनखल और ज्वालापुर (Kankhal and Jwalapur) के बीच स्थापित किया गया 1962 में हीरक जयंती (Hirk Jubilee) के अवसर पर इसे विश्वविद्यालय का दर्जा (University Status) दिया गया।

कुमाऊं विश्वविद्यालय ,नैनीताल (Kumaon University, Nainital)

वर्ष 1973 में स्थापित कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaon University) उच्च शिक्षा एवम् शोध (Higher Education and Research) की एक अग्रणी संस्था है। इसके तीन परिसर (Campus) नैनीताल (Nainital), अल्मोड़ा (Almora) तथा भीमताल (Bhimtal) में स्थापित है। इस में समृद्ध (Prosperous) 35 महाविद्यालय (College)  तथा संस्थान (Institute) कुमाऊं के 6 जनपदों में फैले हुए है। इस महाविद्यालय में 2003-04 से सिस्को नेटवर्किंग (Cisco Networking) व्यवस्था पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (Hemvati Nanad Bahuguna Garhwal Central University)

गढ़वाल विश्वविद्यालय (Garhwal University) की स्थापना श्रीनगर (Srinagar) में 1973 में हुई थी। अप्रैल, 1989 में इसका नाम परिवर्तित (Change Name) कर हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय (Hemvati Nanad Bahuguna University) कर दिया गया था। केंद्रीय विश्वविद्यालय (Central University) बनने से पहले इस विश्वविद्यालय में कुल 3 परिषद (Campus) श्रीनगर (Srinagar) मुख्यालय का बिरला परिसर (Birla Campus), पौड़ी (Pauri) का डा. गोपाल रेड्डी परिसर (Dr. Gopal Reddy Campus) तथा टिहरी (Tehri) का स्वामी रामतीर्थ बादशाही थौल परिसर (Swami Ramtirth Badshahi Thaul Campus) थे। 15 जनवरी (January) 2009 को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद टिहरी स्थित परिसर (Tehri Campus) को अलग कर दिया गया है।

श्री देव सुमन विश्वविद्यालय (Shri Dev Suman University)

अगस्त (August), 2010 में हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (HNB Central University) के टिहरी परिषद को अलग कर राज्य विश्वविद्यालय (State University) बनाने हेतु इसका नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Pandit Deen Dayal Upadhyay) उत्तराखंड विश्वविद्यालय (Uttarakhand University) रखा गया था। फिर 2012 में इसका नाम श्री देव सुमन विश्वविद्यालय (Shri Dev Suman University) कर दिया गया है। इस विश्वविद्यालय को बनाने का मुख्य उद्देश्य पूर्व में गढ़वाल विश्वविद्यालय से समृद्ध संस्थानों को सम्बद्धता प्रदान करना है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय (Dev Sanskriti University)

उत्तराखंड विधानसभा (Uttarakhand Assembly) ने सर्वसम्मति से 22 मार्च (March) 2002 को हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने का एक विधेयक पारित किया । निजी क्षेत्र का यह विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार (Shantikunj Haridwar) में स्थापित किया गया है। इसका संचालन वेदमाता गायत्री ट्रस्ट (Vedmata Gayatri Trust) द्वारा किया जाएगा। इस विश्वविद्यालय में साधना (Practice), शिक्षा (Education), स्वास्थ्य (Health) और स्वावलंबन (Independency) नामक 4 संकाय खोले गए है। डॉ प्रणव पंड्या (Dr. Pranav Pandya) इसके कुलपति तथा डॉक्टर एस.पी. मिश्रा (Dr SP Mishra) इसके प्रथम वी.सी. है।

हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय (Himgiri Nabh University)

मल्टीमीडिया व अन्य सूचना प्रौद्योगिकी (Multimedia and other information technology) उपस्करों द्वारा राज्य के उच्च शिक्षा को प्रचार-प्रसार एवं दूरस्थ इलाको में इसकी प्रोत्साहन के लिए हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय की स्थापना अहमदाबाद (Ahmedabad) के तालीम रिसर्च फाउंडेशन (Talim Research Foundation) द्वारा की गई है। विश्वविद्यालय का मुख्यालय देहरादून (Dehradun) में होगा तथा राज्य के सभी जिलों में इसके अध्ययन केंद्र स्थापित किए जायेंगे।

इक्फाई विश्वविद्यालय (ICFAI University)

इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंसियल एनालिसिस ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (Institute of Financial Analysis of Indian University) की स्थापना देहरादून (Dehradun) में की जा रही है। प्रारंभ में इसमें फाइनेंसियल फाइट पाठ्यक्रम चलाया जाएंगे बाद में अन्य पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जायेगी।

पतंजलि योग विद्यापीठ (Patanjali Yoga School)

राज्य सरकार ने 25 मार्च (March) 2006 को एक प्रस्ताव द्वारा हरिद्वार (Haridwar) स्थित पतंजलि योग विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय (Patanjali Yog Vidyapeeth Deemed University) का दर्जा प्रदान किया और स्वामी रामदेव (Swami Ramdev) को इसका आजीवन कुलाधिपति (Lifelong Chancellor) नामित किया।

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स्वामी राम विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय (Swami Rama Vidyapeeth Deemed University)

महान संत एवं योगी और समाज सुधारक (Social Reformer) डॉक्टर स्वामी राम (Dr. Swami Ram) की स्मृति में देश-विदेश में पहले उनके शिष्यों द्वारा 1989 में जौलीग्रांट (Jolly Grant) नामक स्थान पर स्थापित ‘हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट’ (Himalayan Institute Hospital Trust) है जिसके अंतर्गत एक मेडिकल कॉलेज (Medical college), एक स्कूल ऑफ नर्सिंग (School of Nursing) तथा एक ग्राम्य विकास केंद्र (Rural Development Center) है। इसे 2007 में डीम्ड विश्वविद्यालय (Deemed University) का दर्जा दिया गया। इस ट्रस्ट के मेडिकल कॉलेज (Medical College) को उत्तराखंड का प्रथम मेडिकल कॉलेज (Uttarakhand’s first medical college) होने का गर्व प्राप्त है। अब यह राज्य का प्रथम मेडिकल विश्वविद्यालय (The state’s first medical university) भी हो गया है।

संस्कृत विश्वविद्यालय (Sanskrit University)

राज्य में संस्कृत शिक्षा के प्रोत्साहन (Incentive) के लिए हरिद्वार (Haridwar) के रानीपुर झाल (Ranipur Jhhal) के समीप दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple) की तर्ज पर विश्व संस्कृत धाम के रूप में इस विश्वविद्यालय को विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इस का प्रथम कुलपति बाल स्वरूप ब्रह्मचारी (Bal Svrup Brahmachari) को नियुक्त किया है।

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (Uttarakhand Technical University)

राज्य में सरकारी एवं गैर सरकारी डिग्री स्थल के प्राविधिक संस्थान (Technical Institute) को एक संस्थान के अंतर्गत लाने के उद्देश्य से देहरादून (Dehradun) में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (Uttarakhand Technical University) की स्थापना की है।

तकनीकी शिक्षा (Technical Education)

प्राविधिक शिक्षा (Technical Education) के महत्व को देखते हुए प्रदेश में इसके विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिप्लोमा एवं डिग्री (Diploma and Degree) स्तरीय प्राविधिक संस्थाओं की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है :-

राज्य में डिप्लोमा स्तरीय  प्राविधिक शिक्षा हेतु 40 राजकीय तथा 25 से अधिक निजी पॉलिटेक्निक संस्थान (Political Institute) है। रुड़की (Roorkee) स्थित के.एल. पॉलिटेक्निक (K.L. Polytechnic) है I इसकी स्थापना 1956 में की गई थी।

डिग्री स्तरीय प्राविधिक शिक्षा के लिए राज्य में कुल 27 इंजीनियरिंग कॉलेज (College of Engineering) है, जिनमें से मुख्यत: राज्य सरकार का एक तकनीकी विश्वविद्यालय (Technical University), देहरादून (Dehradun)2 इंजीनियरिंग कॉलेज (अल्मोड़ा तथा पौड़ी गढ़वाल) (Engineering College (Almora and Pauri Garhwal)) में, 2 केंद्रीय सरकार के संसथान (Central government Institutions) (आईआईटी रुड़की व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर में) (IIT Roorkee and National Institute of Technology, Srinagar), 1 राज्य सरकार का कृषि एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (पंतनगर) (Agriculture and Technology Institute (Pantnagar)) तथा 15 से अधिक निजी संस्थान है।

कुछ प्रमुख प्रतिष्ठित स्कूल/कॉलेज (Some Reputed School/College)

उत्तराखंड के कुछ प्रमुख प्रतिष्ठित स्कूल व कॉलेज इस प्रकार है :-

श्री गुरु रामराय एजुकेशन मिशन, देहरादून (Shri Guru Ram Rai Education Mission, Dehradun)

शिक्षा के क्षेत्र में राज्य में गुरु रामराय एजुकेशन मिशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस मिशन की स्थापना 1950 में श्री महंत इंद्रेश चरणदास (Shri Mahant Indresh Charandas) ने की थी। सर्वप्रथम 1950 में देहरादून (Dehradun) में एक विद्यालय खोला गया। इसके बाद अनेक विद्यालय खोले में वर्तमान में इस मिशन में कुल 123 विद्यालय है, जिसमें से 80 उत्तराखंड (Uttarakhand) में, 28 पंजाब (Punjab) में , 14 उत्तर प्रदेश (U.P.) में तथा एक दिल्ली (Delhi) में है।

दून कॉलेज (Doon College)

देहरादून (Dehradun) में इस प्रतिष्ठित कॉलेज की स्थापना 1935 में प्रसिद्ध बैरिस्टर और वायसराय की काउंसिल के सदस्य (Barrister and Viceroy’s member of the Council) सतीश रंजन दास (Satish Ranjan Das) द्वारा उच्च शिक्षा और अंग्रेजी के विकास के लिए की गई थी। यह भारत का प्रथम पंजीकृत स्कूल (This is India’s first registered school) है।

सेंट जोसेफ एकेडमी (St. Joseph Academy)

1934 में देहरादून (Dehradun) में स्थापित इस प्रतिष्ठित एकेडमी से भारत को अब तक कुल 3 नौसेना अध्यक्ष (Admiral) (सुशील कुमार, विष्णु भगवान व विजय सिंह शेखावत (Sushil Kumar, Vishnu and Vijay Singh Shekhawat)) मिल चुके है।

DAV कॉलेज (DAV College)

देहरादून (Dehradun) में DAV कॉलेज की स्थापना 1902 में ठाकुर पूर्ण सिंह नेगी (Thakur Purn Singh Negi) ने एक संस्कृत विद्यालय (Sanskrit school) के रुप में की थी। इस कॉलेज में उत्तराखंड के अनेक ख्याति प्राप्त लोगों ने शिक्षा अर्जित की है।

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