राष्ट्रपति की योग्यता, चयन का तरीका और प्रमुख तथ्य

राष्ट्रपति की योग्यता, चयन का तरीका और प्रमुख तथ्य

भारत का राष्ट्रपति देश का सबसे सर्वोच्च पद और तीनों भारतीय सेनाओं का प्रमुख होता है तथा भारत के प्रथम नागरिक जाना जाता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद का प्रावधान किया गया है। भारतीय संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 56 के द्वारा भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच साल का होता है। राष्ट्रपति के बर्खास्तगी और अनुपस्थिति में ही उपराष्ट्रपति कार्यभार सँभालता है। भाग 5 के अनुच्छेद 70 द्वारा संसद को राष्ट्रिपति के कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार है।

भारत के राष्ट्रपति के उम्मीदवार के लिए आवश्यक योग्यता 

राष्ट्रपति के उम्मीदवार के लिए वह भारत का नागरिक होना चाहिए। आयु कम से कम 35 साल होनी चाहिए। लोकसभा का सदस्य होने की पात्रता होनी चाहिए। इलेक्टोरल कॉलेज के पचास प्रस्तावक और पचास समर्थन करने वाले होने चाहिए।

राष्ट्रपति की शपथ

राष्ट्रपति निर्वाचित हो जाने के बाद अपना पदभार सँभालने से पूर्व भारत के प्रधान न्यायधीश के समक्ष शपथ ग्रहण करते है, यदि मुख्य न्यायधीश अनुपस्थिति हो तो उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायधीश के समक्ष शपथ ग्रहण करते है।

राष्ट्रपति का वेतन 

इस समय राष्ट्रपति की तनख्वाह 1.50 लाख रुपए प्रतिमाह है और अन्य भत्ते अलग से।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ व अधिकार 

26 जनवरी, 1950 को संविधान के अस्तित्व में आने के साथ ही देश ने ‘संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य’ के रूप में नई यात्रा शुरू की। परिभाषा के मुताबिक गणराज्य (रिपब्लिक) का आशय होता है कि राष्ट्र का मुखिया निर्वाचित होगा, जिसको राष्ट्रपति कहा जाता है।राष्ट्रपति की शक्तियाँ कुछ इस प्रकार से हैं:

अनुच्छेद 53 : संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। वह इसका उपयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा। इसकी अपनी सीमाएँ भी हैं:
1. यह संघ की कार्यपालिका शक्ति (राज्यों की नहीं) होती है, जो उसमें निहित होती है।
2.संविधान के अनुरूप ही उन शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है।
3. सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर की हैसियत से की जाने वाली शक्ति का उपयोग विधि के अनुरूप होना चाहिये।

अनुच्छेद 72  द्वारा प्राप्त क्षमादान की शक्ति के तहत राष्ट्रपति, किसी अपराध के लिये दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, निलंबन, लघुकरण और परिहार कर सकता है। मृत्युदंड पाए अपराधी की सज़ा पर भी फैसला लेने का उसको अधिकार है।

अनुच्छेद 80 के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर राष्ट्रपति, साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्य सभा के लिये मनोनीत कर सकता है।

अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति, युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में आपातकाल की घोषणा कर सकता है।

अनुच्छेद 356  के तहत राष्ट्रपति द्वारा किसी राज्य के संवैधानिक तंत्र के विफल होने की दशा में राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

अनुच्छेद 360 के तहत भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग में वित्तीय संकट की दशा में वित्तीय आपात की घोषणा का अधिकार राष्ट्रपति को है।

अनुच्छेद 74 के अधीन निर्णय करने के लिए वह बाध्य नहीं है। वह संसद के दोनों सदनों द्वारा पास किये गए बिल को अपनी सहमति देने से पहले ‘रोक’ सकता है। वह किसी बिल (धन विधेयक को छोड़कर) को पुनर्विचार के लिये सदन के पास दोबारा भेज सकता है।

अनुच्छेद 75 के मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को जब स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो राष्ट्रपति अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए ही सरकार बनाने के लिये लोगों को आमंत्रित करता है। ऐसे मौकों पर उसकी भूमिका निर्णायक होती है। 

राष्ट्रपति को पद से कैसे हटाया जा सकता है?

राष्ट्रपति को उसके पद से महाभियोग के ज़रिये हटाया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा में सदस्य को चौदह दिन का नोटिस देना होता है। इस पर कम से कम एक चौथाई सदस्यों के दस्तख़त ज़रूरी होते हैं। फिर सदन उस पर विचार करता है। अगर दो-तिहाई सदस्य उसे मान लें तो फिर वो दूसरे सदन में जाएगा। दूसरा सदन उसकी जांच करेगा और उसके बाद दो-तिहाई समर्थन से वो भी पास कर देता है तो फिर राष्ट्रपति को पद से हटा हुआ माना जाएगा। 

राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

राष्ट्रपति का निर्वाचन इलेक्टोरल कॉलेज के द्वारा किया जाता है। इन इलेक्टोरल कॉलेज में निर्वाचक मंडल के सदस्य होते हैं (लोकसभा, राज्यसभा, राज्यों के विधानसभा के विधायक, विधान परिषद् के सदस्य उसके सदस्य नहीं होते)। राष्ट्रपति चुनाव के लिए मशीन का इस्तेमाल नहीं होता है।

चुनाव में कौन-कौन भाग लेते है

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान देने का अधिकार संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) के सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा दो केंद्रशासित प्रदेशों, दिल्ली और पुद्दुचेरी, के विधायको मतदान देने का अधिकार होता है। लेकिन किसी भी मनोनीत सदस्य व विधान परिषद् के सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में अपना मत देने का अधिकार नही होता है। लेकिन इन सभी के मतों का मूल्य अलग-अलग होता है। लोकसभा और राज्यसभा के मत का मूल्य एक होता है और विधानसभा के सदस्यों का अलग होता है। ये राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होता है ।

सिंगल ट्रांसफरेबल वोट क्या है

इस चुनाव में एक खास तरीके से वोटिंग होती है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहते हैं। यानी वोटर एक ही वोट देता है, लेकिन वह तमाम उम्मीदवारों में से अपनी वरीयता तय कर देता है। यानी वह बैलट पेपर पर बता देता है कि उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी, तीसरी कौन। यदि पहली पसंद वाले वोटों से विजेता का फैसला नहीं हो सका, तो उम्मीदवार के खाते में वोटर की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।

कैसे तय होता है यह वेटेज?

विधायकों के वोट का वेटेज

विधायक के मामले में जिस राज्य का विधायक हो, उसकी जनसंख्या देखी जाती है। इसके साथ उस प्रदेश के विधानसभा सदस्यों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। वेटेज निकालने के लिए प्रदेश की जनसंख्या को विधायकों की संख्या से भाग किया जाता है। इस तरह जो नंबर मिलता है, उसे फिर 1000 से भाग किया जाता है। अब जो आंकड़ा प्राप्त होता है, वही उस राज्य के एक विधायक के वोट का वेटेज होता है। 1000 से भाग देने पर अगर शेष 500 से ज्यादा हो तो वेटेज में 1 जोड़ दिया जाता है।

उदाहरण – उत्तराखंड की कुल जनसंख्या 4491239 (जनगणना 1971 के आधार पर), व कुल विधायकों की संख्या 70 है।
विधायकों का वोट वेटेज =  4491239 / 70*1000 = 64
अतः एक विधायक के वोट का वेटेज 64 है।

सांसदों के वोट का वेटेज

सांसदों के मतों के वेटेज का गणित अलग है। सबसे पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं के विधायकों  के वोटों का वेटेज जोड़ा जाता है। अब इस सामूहिक वेटेज को राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों की कुल संख्या से भाग किया जाता है। इस तरह जो नंबर मिलता है, वह एक सांसद के वोट का वेटेज होता है। अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो वेटेज में एक का इजाफा हो जाता है।

वोटों की गिनती

राष्ट्रपति के चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती है। राष्ट्रपति वही बनता है, जो मतदाताओं यानी सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल वेटेज का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल करे। यानी इस चुनाव में पहले से तय होता है कि जीतने वाले को कितना वोट यानी वेटेज पाना होगा। इस समय राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो इलेक्टोरल कॉलेज है, उसके सदस्यों के वोटों का कुल वेटेज 10,98,882 है। तो जीत के लिए कैंडिडेट को हासिल करने होंगे 5,49,442 वोट। जो प्रत्याशी सबसे पहले यह कोटा हासिल करता है, वह प्रेजिडेंट चुन लिया जाता है।

राष्ट्रपति से सम्बंधित प्रमुख अनुच्छेद 

अनुच्छेद 52 – राष्ट्रपति पद का प्रावधान किया गया है।
अनुच्छेद 53 –  संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है।
अनुच्छेद 54 – राष्ट्रपति का निर्वाचक मण्डल इसमें संसद और विधानसंभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते है। 70 वां संविधान संशोधन 1992 द्वारा दिल्ली और पांडिचेरी को इसके अन्तर्गत शामिल किया गया है। राष्ट्रपति के निर्वाचन में मनोनीत तथा विधान परिषदों के सदस्य भाग नहीं लेते है।
अनुच्छेद 55 – निर्वाचन की विधि  एकलसंक्रमणीय अनुपातिक मत पद्धति से होता है।
अनुच्छेद 56 – राष्ट्रपति का कार्यकाल या पद अवधि 5 वर्ष।
अनुच्छेद 57 – राष्ट्रपति पुर्ननिर्वाचित होने की योग्यता।
अनुच्छेद 58 – राष्ट्रपति बनने की योग्यता ।
अनुच्छेद 59 – राष्ट्रपति पद के लिए शर्त।
अनुच्छेद 60 – राष्ट्रपति की शपथ।
अनुच्छेद 61 – के अन्र्तगत कार्यकाल से पूर्व महावियोग से हटा सकते है। अपना त्याग पत्र उपराष्ट्रपति को देता है। उपराष्ट्रपति इसकी सुचना लोकसभा अध्यक्ष को देता है।1/4 सदस्यों के प्रस्ताव पर 14 दिन की पूर्व सुचना राष्ट्रपति को देनी होती है। ऐसा प्रस्ताव संसद के 2/3 बहुमत से प्रस्तावित है। अभी तक किसी राष्ट्रपति पर महावियोग प्रस्ताव नहीं लाया गया है।
अनुच्छेद 62 – राष्ट्रपति पद की आकस्मिक रिक्तिता।
अनुच्छेद 72 – राष्ट्रपति की माफी प्रदान करने का अधिकार – राष्ट्रपति मृत्युदण्ड को पूर्णतय माफ कर सकता है। सजा की अवधि बदल सकता तथा प्रकृति को परिवर्तीत कर सकता है।
अनुच्छेद 74 – इसमें मंत्रीपरिषद का वर्णन दिया है।
अनुच्छेद 75 – प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनुच्छेद 76 – महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनुच्छेद 79 – के अन्तर्गत राष्ट्रपति संसद या व्यवस्थापिका का अभिन्न अंग है।
अनुच्छेद 80(2) – के अन्तर्गत राष्ट्रपति राज्य सभा में 12 सदस्यों को मनोनित करता है।
अनुच्छेद 85 – के अन्तर्गत राष्ट्रपति संसद का सत्र आहुत, सत्रावसान और भंग करने का अधिकार।
अनुच्छेद 86 – प्रत्येक सत्र के प्रारम्भ में तथा नवगठित लोक सभा का पहला सत्र तथा संयुक्त् अधिवेशन को अभिभाषित(भाषण) करता है।
अनुच्छेद 87 – संसद का प्रत्येक वर्ष का प्रथम स्तर राष्ट्रपति अभिभाषित करता है इसका भाषण मत्रिमण्डल द्वारा तैयार किया जाता है।
अनुच्छेद 99- इसके अन्तर्गत राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर (अस्थायी अध्यक्ष) की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 110 – धनविधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से लोकसभा में रखा जाता है। इसे लोकसभा अध्यक्ष प्रमाणीत करता है।
अनुच्छेद 108 – संसद के संयुक्त अधिवेशन को बुलाने का अधिकार।
अनुच्छेद 123 – राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति। सिफारिश मंन्त्रीपरिषद या मत्रिमण्डल की अधिकतम अवधि 6 माह और 6 सप्ताह।
अनुच्छेद 124 – इसके अन्तर्गत मुख्या न्यायधीश सहित अन्य न्यायधीश की(सर्वोच्च न्यायलय) न्युक्ति करता है।
अनुच्छेद 148 – नियंत्रक व महालेखा की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनुच्छेद 155 – राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनुच्छेद 208 – राष्ट्रीय वित्त आयोग की नियुक्ति करने का अधिकार।(1 अध्यक्ष और 4 सदस्य)।
अनुच्छेद 331 – के अन्तर्गत दो सदस्यों को(एंग्लो इंडियन) लोक सभा में मनोनित करता है।
अनुच्छेद 338 – अनुसुचित जाति, अनुसुचित जनजाति आयोग की नियुक्ति करने का अधिकार।
अनुच्छेद 340 – ओ. बी. सी. आयोग की नियुक्ति का अधिकार। उच्चायोक्त व विदेशों में राजदूत नियुक्त करने का अधिकार।
अनुच्छेद 352 – देश में आपातकाल, कारण – युद्ध, युद्ध जैसा वातावरण, आन्तरिक अशान्ति (44 वां संविधान संशोधन 1978 हटा दिया इसकी जगह सशस्त्र विद्रोह रखा है।)
अनुच्छेद 356 – राज्यों में राष्ट्रपति शासन।
अनुच्छेद 360 – वित्तीय आपातकाल।

राष्ट्रपति से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति – डॉ. राजेंद्र प्रसाद 
  • दो बार राष्ट्रपति का पदभार सँभालने वाले व्यक्ति – डॉ. राजेंद्र प्रसाद 
  • राष्ट्रपति जिन्होंने लिए जेबी वीटो का प्रयोग किया था – ज्ञानी जैल सिंह
  • भारत की पहली महिला राष्ट्रपति  – श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल
  • भारत का वह राष्ट्रपति, जो पूर्व में लोकसभा अध्यक्ष भी थे – नीलम संजीव रेड्डी
  • भारत के राष्ट्रपति जो निर्विरोध चुने गए थे— नीलम संजीव रेड्डी 
  • भारत के राष्ट्रपति जिनकी मृत्यु कार्यकाल खत्म होने से पहले हुई— डॉ. जाकिर हुसैन 
  • कौन-सा व्यक्ति कार्यवाहक राष्ट्रपति तथा उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा— एम. हिदायतुल्ला
  • भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति – डॉ. जाकिर हुसैन
  • भारत के पहले सिक्ख राष्ट्रपति – ज्ञानी जैल सिंह 
  • वह उपराष्ट्रपति जो राष्ट्रपति भी बने – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भारत के सभी राष्ट्रपति व उनका कार्यकाल 

  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद  – कार्यकाल: 26 जनवरी 1950 से 13 मई, 1962
  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन – कार्यकाल: 13 मई, 1962 से 13 मई 1967
  • डॉ. ज़ाकिर हुसैन  – कार्यकाल: 13 मई, 1967 से 3 मई, 1969
  • श्री वराहगिरि वैंकट गिरि – कार्यकाल: 3 मई, 1969 से 20 जुलाई 1969 तथा 24 अगस्त, 1969 से 24 अगस्त, 1974
  • डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद  – कार्यकाल: 24 अगस्त 1974 से 11 फरवरी, 1977
  • श्री नीलम संजीव रेड्डी – कार्यकाल: 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई, 1982
  • ज्ञानी जैल सिंह  – कार्यकाल: 25 जुलाई, 1982 से 25 जुलाई, 1987
  • श्री आर. वेंकटरमण  – कार्यकाल: 25 जुलाई, 1987 से 25 जुलाई, 1992
  • डॉ. शंकर दयाल शर्मा  – कार्यकाल: 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997
  • श्री के.आर. नारायणन  – कार्यकाल: 25 जुलाई, 1997 से 25 जुलाई, 2002
  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम  – कार्यकाल: 25 जुलाई, 2002 से 25 जुलाई, 2007
  • श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटील – कार्यकाल: 25 जुलाई, 2007 से 25 जुलाई, 2012
  • श्री प्रणब मुखर्जी – कार्यकाल: 25 जुलाई, 2012 से 25 जुलाई, 2017
  • श्री राम नाथ कोविन्द – कार्यकाल: 25 जुलाई, 2017 से अब तक

 

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