रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर

रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर

रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर ( संस्मरण और रेखाचित्र में अंतर ) : रेखाचित्र किसे कहते हैं, रेखाचित्र के तत्व, रेखाचित्र का महत्व, संस्मरण किसे कहते हैं, संस्मरण के तत्व, संस्मरण का महत्व आदि महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

रेखाचित्र किसे कहते हैं

रेखाचित्र गद्य साहित्य की एक आधुनिक विधा है जिसमें एक लेखक शब्दों का प्रयोग करके किसी विशेष व्यक्ति की आकृति, स्वभाव या विशेषताओं का चित्रण करता है। रेखाचित्र वास्तव में अंग्रेजी के शब्द स्कैच (Sketch) का परिवर्तित रूप है जिसमें शब्द, रेखा एवं चित्रण का कुशलता पूर्वक उपयोग किया जाता है। जिस प्रकार स्केच में रेखाओं के माध्यम से किसी व्यक्ति या किसी तत्व का चित्रण किया जाता है ठीक उसी प्रकार रेखाचित्र में भी किसी व्यक्ति या वस्तु का शब्दों के माध्यम से चित्रण किया जाता है। रेखाचित्र में किसी वस्तु या व्यक्ति के भाव को कम से कम शब्दों के उपयोग से सजीव एवं भावपूर्ण तरीके से अंकन करने का प्रयास किया जाता है। यह एक भावप्रधान रचना होती है जो किसी व्यक्ति या विषय का मार्मिक एवं प्रभावी रूप से चित्रण करने का कार्य करती है।

रेखाचित्र के तत्व

हिंदी भाषा में रेखाचित्र के मुख्य रूप तीन प्रकार के तत्व होते हैं:-

  • एकात्मक रेखाचित्र
  • चित्रात्मक रेखाचित्र
  • तटस्थ रेखाचित्र

एकात्मक रेखाचित्र

रेखा चित्र में मुख्य रूप से किसी विषय की एकात्मता होती है जिसमें किसी व्यक्ति या वस्तु से संबंधित वर्णन किया जाता है। एकात्मक रेखाचित्र के अंतर्गत कहानी की रचना में विस्तारपूर्वक केवल एक ही विषय के बारे में बताया जाता है। यह किसी कहानी का मुख्य अंश होता है। एकात्मक रेखाचित्र की विशेषता यह है कि इसमें कहानी के पात्र के अलावा अन्य तत्वों का भी मुख्य रूप से वर्णन किया जाता है। इसके अलावा एकात्मक रेखाचित्र में किसी विशेष व्यक्ति की भावनाओं, सामाजिक कार्यों, विचारधारा आदि का भी चित्रण किया जाता है।

चित्रात्मक रेखाचित्र

किसी भी लेखक को रेखाचित्र की रचना करने के लिए चित्रात्मक शैली का विशेष रूप से ध्यान रखना बेहद अनिवार्य होता है। इसमें शब्दों को पाठक के सम्मुख कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है जिससे विषय को समझने में आसानी हो सके। कई विशेषज्ञों के अनुसार चित्रात्मक रेखाचित्र किसी भी विषय को प्रस्तुत करने हेतु एक महत्वपूर्ण अंग होता है।

तटस्थ रेखाचित्र

तटस्थता को रेखाचित्र का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार रेखाचित्र में तटस्थता की अधिकता होती है एवं वह पूर्ण रूप से सफल रेखाचित्र होता है। इसके अलावा जिस रेखाचित्र में तटस्थता होती है तो उसकी रचना को संपूर्ण रेखाचित्र के नाम से जाना जाता है।

रेखाचित्र का महत्व

रेखाचित्र पूर्ण रूप से चित्र नहीं होता है बल्कि यह किसी वस्तु, व्यक्ति, घटना आदि का संवेदनशीलता से विवरण देता है। किसी भी रेखाचित्र में लेखक के निजी व्यक्तित्व का कोई विशेष महत्व नहीं होता है क्योंकि इसका लेखक के जीवन से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं होता है। यह संक्षिप्त होता है अर्थात इसमें कम से कम शब्दों का प्रयोग किया जाता है। रेखाचित्र वास्तव में एक दृश्य कला होती है जो मुख्य रूप से द्वि-आयामी साधन को चिन्हित करता है। रेखाचित्र को अंकित करने के लिए कलम, खड़िया, चारकोल, पेंसिल, रंगीन पेंसिल, मोम आदि का प्रयोग किया जाता है।

 

संस्मरण किसे कहते हैं

किसी विशेष व्यक्ति के संबंध में स्मृति के आधार पर की गई रचना को संस्मरण (memoir) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से भूतकाल की अनेकों काल्पनिक भावनाओं या किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की विशेषताओं को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त करने का कार्य करता है। संस्मरण में प्राचीन काल में घटित किसी महत्वपूर्ण घटना को अधिक महत्व दिया जाता है। इसमें लेखक केवल उन्हीं घटनाओं का वर्णन करता है जिसे उसने स्वयं देखा या अनुभव किया होता है। इसके अलावा संस्मरण में लेखक किसी व्यक्ति एवं घटना की आत्मीयता का कलात्मक रूप से विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। इसका संबंध महापुरुषों से होता है जिन्होंने प्राचीन काल में समाज में किसी प्रकार का परिवर्तन किया हो। संस्मरण को साहित्यिक निबंध की एक प्रवृत्ति भी माना जाता है।

संस्मरण के तत्व

संस्मरण के तत्व कुछ इस प्रकार हैं:-

  • आत्म संस्मरण
  • अतीत की स्मृति
  • प्रमाणिकता
  • व्यक्तित्वता

आत्म संस्मरण

आत्म संस्मरण की रचना में लेखक स्वयं के द्वारा होने वाले अनुभूतियों के माध्यम से रचना करता है। इसमें वह केवल अपनी स्मृति के माध्यम से ही रचना करता है। रेखाचित्र की तरह ही संस्मरण भी साहित्य की एक विधा है। इसमें लेखक स्वयं अपने द्वारा देखे गए, सुने गए या अनुभव किए हुए यथार्थ को ही पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है। इसके अलावा लेखक आत्म संस्मरण में अपने अनुभव एवं संघर्ष को भी साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करने का कार्य करता है।

अतीत की स्मृति

संस्मरण की रचना भूतकाल में घटित किसी महत्वपूर्ण घटना या किसी महापुरुष पर आधारित होती है जिसमें लेखक रोचक पलों, लंबी यात्रा एवं जीवन की किसी महत्वपूर्ण घटना के बारे में उल्लेख करता है। इसे सभी घटनाओं को एकत्रित करके व्यवस्थित रूप से व्यक्त किया जाता है जिससे पाठकों को अतीत की घटनाओं के बारे में संपूर्ण जानकारी ज्ञात हो सके। संस्मरण को रेखाचित्र, कहानी लेखन, साहित्य आदि से अधिक महत्व दिया जाता है।

प्रमाणिकता

प्रमाणिकता किसी भी संस्मरण का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। प्रत्येक संस्मरण में लेखक को घटना का प्रमाण देना अनिवार्य होता है क्योंकि इसके माध्यम से पाठकों एवं श्रोताओं को संस्मरण की जटिलता समझाई जा सकती है। संस्मरण विधा में कल्पना का कोई विशेष स्थान नहीं होता है, यह केवल सत्य घटना पर आधारित होती है। इसके अलावा यदि किसी भी संस्मरण में कल्पना का समावेश होता है तो इसके कारण संस्मरण की विधा नष्ट हो जाती है। इसीलिए संस्मरण में प्रमाणिकता का होना अत्यंत आवश्यक होता है।

व्यक्तित्वता

किसी भी संस्मरण में व्यक्तित्वता की विशेष भूमिका होती है। माना जाता है कि व्यक्तित्वता के बिना संस्मरण की रचना नहीं की जा सकती है। इसमें मुख्य रूप से किसी महापुरुष के जीवन की महत्वपूर्ण घटना का वर्णन किया जाता है। इसमें केवल उन्हीं घटनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाती है जिसका संबंध समाज से होता है।

संस्मरण का महत्व

संस्मरण की रचना मुख्य रूप से लेखक के स्वयं की अनुभूति के माध्यम से होती है। संस्मरण एक कथा ना होकर कथाभास है जिसमें अतीत की किसी महत्वपूर्ण घटनाओं का परिवेश अनिवार्य रूप से होता है। यह अतीत की घटनाओं की विस्तृत जानकारी देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। संस्मरण आत्मकथा एवं निबंध के बीच की एक विधा होती है जिसमें लेखक के निजी दृष्टिकोण की प्रधानता होती है। वर्तमान समय में संस्मरण को गद्य की विधा में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

 

रेखाचित्र और संस्मरण में अंतर

रेखाचित्र और संस्मरण में निम्नलिखित अंतर देखे जा सकते हैं (Difference between Sketch and Memoir in hindi) :-

  • रेखाचित्र में लेखक पूर्ण रूप से तटस्थ रहता है जबकि संस्मरण में लेखक का तटस्थ होना अनिवार्य नहीं होता है बल्कि इसमें आत्मीयता एवं व्यक्तित्व के गुण होते हैं।
  • रेखाचित्र किसी भी व्यक्ति का किया जा सकता है जबकि संस्मरण केवल महापुरुषों का ही किया जाता है।
  • रेखाचित्र में सांकेतिकता के आधार पर चित्रण किया जाता है जबकि संस्मरण में स्मृति की अनुभूतियों के आधार पर चित्रण किया जाता है।
  • रेखाचित्र सांकेतिक एवं व्यंजन दोनों ही रूप में हो सकता है परंतु संस्मरण केवल अभिधामूलक होता है।
  • रेखाचित्र के विषयों में विविधताएं हो सकती है परंतु संस्मरण के विषय में किसी विशेष व्यक्ति या किसी महत्वपूर्ण घटना का ही परिवेश होता है।
  • रेखाचित्र में मुख्य रूप से कलात्मक चित्रण की प्रधानता होती है जबकि संस्मरण में स्मृति के भाव की प्रधानता होती है।
  • रेखाचित्र बड़ा या विशाल हो सकता है जब परंतु संस्मरण संक्षिप्त होता है।
  • रेखाचित्र में चित्रात्मक शैली का प्रयोग किया जाता है जबकि संस्मरण में विवरणात्मक शैली का प्रयोग किया जाता है।
  • रेखाचित्र में कई प्रकार के शब्दों के द्वारा चित्रण किया जाता है जबकि संस्मरण में पूर्व में घटित घटनाओं का चित्रण किया जाता है।
  • रेखाचित्र का संबंध किसी भी काल से हो सकता है जबकि संस्मरण का संबंध सदैव अतीत एवं भूतकाल से होता है।

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