उत्तराखंड करेंट अफेयर्स 14 जनवरी 2017 – 21 जनवरी 2017

  1. सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास के इलाके में रहें वालो के ख़िलाफ़ लिए गए नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई।
    विस्तार :- उत्तराखंड के हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास की गफूर बस्ती इलाके के लोगों को सुप्रीम कोर्ट से 18 जनवरी (बुधवार) को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें हाई कोर्ट ने 50 हजार आबादी वाले इस इलाके से कब्जा हटाने और वहां के मकानों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने मामले को दोबारा हाई कोर्ट के पास भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से याचिकाकर्ता बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए है। बस्ती में स्कूल, कॉलेज आदि भी है और लोग कई दशकों से वहां रह रहे हैं। इस मामले में लोगों को नोटिस जारी होना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाके के लोग 13 फरवरी तक हाई कोर्ट के सामने अपनी अर्जी दाखिल करें और हाई कोर्ट तमाम पक्षकारों के मत सुने और फिर इस मामले में फैसला दे। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर हाई कोर्ट से मामले का निपटारा करने को कहा है।
  2. भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में पहली बार संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस किस शुरुआत 21 जनवरी से।
    विस्तार :-  संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस देहरादून के  भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में पहली बार आयोजित की जा रही है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। बैठक में रक्षा मंत्री, तीनों सेनाप्रमुखों के साथ ही एनएसए सहित देश की सुरक्षा से जुड़े तमाम लोग शिरकत करेंगे।
  3. उत्तराखंड के प्रथम राज्यपाल बरनाला जी का निधन
    विस्तार :- उत्तराखंड के पहले राज्यपाल और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला जी के निधन पर उत्तराखंड में शोक की लहर है। उत्तराखंड शासन ने एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया गया। बरनाला जी को 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन होने पर केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने राज्यपाल का जिम्मा सौंपा था। बरनाला इस पद पर सात जनवरी 2003 तक थे। इसके बाद वह तमिलनाडु के राज्यपाल पद पर आसीन हुए।
  4. श्रद्धालुओं के लिए आदिबद्री धाम के कपाट खुले।
    विस्तार :- आदिबद्री धाम के कपाट मकर संक्रान्ति (14 जनवरी) से आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। मकर संक्रान्ति के ब्रह्म मुहूर्त से ही भगवान आदि बद्रीश की पूजा व महाभिषेक पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के मौके पर जहां विभिन्न स्थानों से आये श्रद्धालुओं ने भगवान आदिबद्रीश के दर्शन किये वहीं पूण्य लाभ की कामना की। आदिबद्री धाम ही एक मात्र तीर्थ स्थल है, जहां साल में शीतकाल में मात्र एक माह के लिए कपाट बंद होते हैं। जबकि अन्य धामों के कपाट छह माह के लिए बंद होते हैं। यहां पोष मास की संक्रन्ति पर जहां कपाट बंद होते हैं। वहीं मकर संक्रांति के पर्व पर कपाट खोले जाते है।
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