उत्तराखंड में ऊर्जा के स्रोत व विद्युत परियोजनाएं

उत्तराखंड में ऊर्जा (Source of energy in Uttarakhand)

उत्तराखंड में खनिज (Mineral), कोयला (Coal), पेट्रोलियम (Petroleum) आदि की कमी होते हुए भी जल का अपार भंडार (Boundless Store) है, जिस कारण जल विद्युत (Hydropower) की व्यापक संभावनाएं है।

केंद्र सरकार के आकलन (Estimation) के अनुसार यदि चीन (China) के अनुरूप लघु जल विद्युत परियोजनाओं (Small Hydro Power Projects) को विकसित (Develop) किया जाए तो, यहां लगभग 40,000 मेगावाट (MW) जल विद्युत (Hydropower) का उत्पादन किया जा सकता है। उपयुक्त संभावनाओं के बावजूद 2011 तक राज्य में कुल मिलाकर केवल 3,618 मेगावाट (MW) के आस-पास ही जल विद्युत (Hydropower) और थोड़ी मात्रा में सौर्य (Solar) आदि विद्युत (Power) का उत्पादन क्षमता सृजित (Create) हो पाई है।

2009 के अंत तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 25,000 मेगावाट (MW) क्षमता की नई परियोजनाए (New Project) चिन्हित (Marked) की जा चुकी थी, जिनमें से लगभग 22,716 मेगावाट (MW) की 59 नई परियोजना निर्माणाधीन (New project Under Construction) थी। पर्यावरणीय (Environment) कारणों से इनमें से कई परियोजनाओं का निर्माण-कार्य (Construction work) रोक दिया गया है।

वर्तमान में उत्पादनरत 17 बडी परियोजनाओं में से 13 राज्य सेक्टर की, 3 केंद्र सेक्टर की और 1 निजी सेक्टर की है I जबकि 14 लघु परियोजनाओं में से 11 राज्य सेक्टर व 3 निजी सेक्टर की है।

निर्माणाधीन परियोजनाओं में से सर्वाधिक परियोजनाएं NTPC, NHPC, THDC, SJVNL आदि केंद्रीय एजेंसियों (Central Agencies) के पास, 20% उत्तराखंड जल विद्युत निगम (Uttarakhand Hydroelectric Corporation) के पास और शेष 15% जय प्रकाश, जी.बी.के., जी.एम.आर, रिलायंस (Jay Prkash, G.B.K, G.M.R, Reliance) आदि निजी कंपनियों (Private Firms) के पास है। अन्य राज्य अथवा केंद्र द्वारा स्थापित किसी परियोजना से राज्य को रॉयल्टी (Royalty) के रूप में 12% बिजली नि:शुल्क मिलती है।

Table of Contents

ऊर्जा नीति (Energy Policy)

राज्य के गठन के बाद सरकार ने राज्य के अपार जल संसाधन को ध्यान में रखते हुए जिस ऊर्जा नीति का निर्धारण किया है, उनमें से प्रमुख बिंदु अधोलिखित है:-

  • परियोजनाओं को राज्य ऊर्जा निगम तथा नेशनल पावर कॉरपोरेशन (State Power Corporation and National Power Corporation) की अध्यक्षता में संचालित किया जाएगा।
  • विद्युत परियोजनाओं (Power Projects) में निजी क्षेत्रों (Private Sectors) की सहभागिता (Participation) बढ़ाई जाएगी।
  • राज्य में पहले से अधूरी पड़ी 15 छोटी जल विद्युत (Hydro-power) परियोजनाएं राज्य जल विद्युत निगम (State Hydroelectric Power Corporation) द्वारा संचालित की जायेंगी ।
  • पावर ग्रिड कॉरपोरेशन (Power Grid Corporation) के सहयोग से रुड़की, किच्छा व पिथौरागढ़ (Roorkee, Kichha and Pithoragarh) में तीन नये सब स्टेशनों (Sub-Stations) का निर्माण किया जाएगा। जिसमें राज्य का अपना स्वतंत्रत ग्रिड (Independent Grid) बन सके।
  • विद्युत का उत्पादन पर्यावरण एवं लोगों के पुनर्वास समस्याओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ।
  • ऊर्जा नीति के क्रियान्वयन के लिए एक सदस्यीय विद्युत नियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) का गठन किया जाएगा।
  • 25 मेगावाट (MW) तक की परियोजनाएं लघु (Small) व 25 से अधिक मेगावाट (MW) की परियोजनाएं बड़ी परियोजनाएं (Large Projects) कहलाएंगे।
  • 5 मेगावाट (MW) से कम क्षमता के जल विद्युत परियोजनाओं (Hydro Projects) पर 15 वर्षों तक रॉयल्टी (Royalty) में छूट दी जाएगी, उसके बाद 18% रॉयल्टी (Royalty) ली जाएगी।
  • कंपनियों के लिए प्रीमियर की राशि ₹5 लाख के प्रति मेगावाट (MW) से घटा कर ₹5,000 प्रति आवेदन और आवेदन प्रक्रिया (Application Process) शुल्क ₹25,000 कर दी गई है।
  • परियोजना की स्थापना संबंधी प्रस्तावओं (offers) की स्वीकृति मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी (Committee) करेगी।

संगठनात्मक ढांचा (Organizational Structure)

राज्य के गठन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) से ऊर्जा विभाग (Department of Energy) का प्रशासनिक नियंत्रण (Administrative control) अपने हाथ में लेते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा 1 अप्रैल (April) 2001 को उत्तराखंड विद्युत निगम (Uttarakhand Power Corporation) का गठन किया गया। फिर उपयुक्त निगम के नियंत्रण में विद्युत उत्पादन (Power Production), पारेषण तथा वितरण (Transmission and Distribution) के लिए तीन अलग-अलग निगमों का गठन किया गया। उनका संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (Uttarakhand Jal Vidyut Nigam Limited)

इस निगम का गठन 1 अप्रैल (April) 2001 को गठित उत्तराखंड विद्युत निगम (Uttarakhand Power Corporation) के अंतर्गत राज्य की जल क्षमता का अधिक से अधिक उपयोग करने हेतु जल विद्युत उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया गया। वर्तमान में इस निगम के नियंत्रण में 20 से अधिक जल विद्युत उत्पादन केंद्र है। जहाँ 1,365 मेगावाट (MW) जल विद्युत (Hydropower) का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा 20 से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन है। यह निगम ही राज्य की परियोजनाओं के निर्माण हतु निजी क्षेत्र या केंद्रीय संगठनों को परियोजनाओं को आवंटित (Allocate) करता है।

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टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (Tehri Hydro Development Corporation)

केंद्र (Central) तथा उत्तर प्रदेश सरकार (Government of U.P.) के संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) के रूप में 12 जुलाई (July) 1988 को इस कॉर्पोरेशन (Corporation) की स्थापना की गई। फरवरी (February) 1989 में टिहरी जल विद्युत परियोजना (Tehri Hydro Power Project) का निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (Irrigation Department of U.P.) से लेकर इस कारपोरेशन को सौप दिया गया।

पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited)

इस का गठन 1 जून (June) 2004 को राज्य के बिजली ट्रांसमिशन की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया । इस निगम का काम 132 के.वी. (K.V.) और उससे ज्यादा क्षमता से ज्यादा की बिजली सप्लाई करने के लिए नेटवर्क तैयार करना और सुचारू (Smoothly) बिजली सप्लाई को कायम करना है।

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (Uttarakhand Power Corporation Limited)

इस कंपनी का गठन UJVNL और UTCUL से बिजली लेकर उपभोक्ताओं तक वितरण के लिए किया गया है। 132 के.वी. से नीचे के सब-स्टेशनों पर नियंत्रण इस निगम के हाथ में होता है।

उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (Uttarakhand Renewable Energy Development Agency)

इस एजेंसी की स्थापना राज्य में पुनर्नवीकरण (Renewal) एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों (Alternative Energy Sources) के विकास एवं प्रचार-प्रसार (Propaganda) के लिए की गई है। इसका मुख्यालय अल्मोड़ा (Headquarter Almora) में तथा क्षेत्रीय कार्यालय सभी जिलों में है। यह एजेंसी सौर तथा पवन (Solar and Wind) ऊर्जा के साथ-साथ लघु जल विद्युत परियोजनाओं तथा वाटर मिल्स (घराट) (Water Mills (Gharat)) को भी अपडेट करने का कार्य करती है।

2005 तक इस एजेंसी द्वारा 2.09 मेगावाट (MW) की 33 जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया गया था। जिसमें 162 गांवों को रोशन किया गया।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (Uttarakhand Electricity Regulatory Commission)

इस आयोग की स्थापना राज्य में विद्युत व्यवसाय (Business) के विनियमन (Regulation) तथा विद्युत दरों (Electricity Rates) के निर्धारण के है।

पावर ग्रिड कारपोरेशन (Power Grid Corporation)

इसका गठन पावर ग्रिड की स्थापना एवं उसके संचालन के लिए किया गया है।

विद्युत परियोजनाएं (Power Projects)

जल विद्युत की अपार संभावनाओं वाले इस राज्य में 1906-07 से ही लघु जल विद्युत परियोजनाओं (Small Hydropower Projects) की स्थापना होने लगी थी। राज्य के प्रमुख परियोजनाएं निम्नलिखित है :-

ग्लोगी जल विद्युत परियोजना (Glogi hydropower Project)

500×2 किलोवाट (Kilowatt) क्षमता वाली इस जल विद्युत परियोजना की स्थापना 1914 में मंसूरी (Mansouri) में भट्टा फाल (Bhatta Fall) पर की गई थी। यह मैसूर (Mysore) के बाद यह देश का दूसरा और उत्तर भारत का प्रथम विद्युत संयंत्र (Power Plant) था। वर्तमान में इसका पुनः कायाकल्प (Again Rejuvenating) किया जा रहा है

पथरी परियोजना (Pathari Project)

स्वतंत्रता पूर्व, गंगा नहर पर, हरिद्वार, 20.40 मेगावाट (MW) क्षमता वाली इस परियोजना की स्थापना की गई।

मोहम्मद पुर परियोजना (Mohammad Pur Project)

स्वतंत्रता पूर्व यह परियोजना गंगा नहर पर, हरिद्वार में 9.30 मेगावाट (MW) की इस परियोजना की स्थापना की गई।

खटीमा परियोजना (लोहिया हैंड) (Khatima (Lohia Head) Project)

1955 में, उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar), शारदा नदी (Sharda River) पर 41.40 मेगावाट (MW) क्षमता वाली परिजनों की स्थापना की गई।

 ढकरानी परियोजना (Dhakrani Project)

1965-1970 तक इस परियोजना की स्थापना देहरादून (Dehradun) में 33.75 मेगावाट (MW) विद्युत (Power) के लिए की गई।

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ढालीपुर परियोजना (Dhalipur Project)

1965-1970 तक यमुना नदी (Yamuna River) पर देहरादून (Dehradun) में 51 मेगावाट (MW) क्षमता की इस परियोजना की स्थापना की गई।

रामगंगा परियोजना (Ramganga Project)

1976-78 से रामगंगा नदी (Ramganga River) पर पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) में 198 मेगावाट (MW) की इस परियोजना की स्थापना की गई।

चीला परियोजना (Cheela Project)

1980-81 में गंगा नदी (Ganga River) पर पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) में 144 मेगावाट (MW) की इस परियोजना की स्थापना की गई।

खौदारी परियोजना (Khaudari Project)

1983-84 में यमुना नदी (Yamuna River) पर देहरादून (Dehradun) में 120 मेगावाट (MW) क्षमता वाली इस परियोजना की स्थापना की गई।

टनकपुर परियोजना (Tanakpur Project)

1993 में शारदा नदी (Sharda River) पर चंपावत (Champawat) जिले में 120 मेगावाट (MW) की इस परियोजना की स्थापना की गई।

टिहरी परियोजना (Tehri Project)

भागीरथी (Bhagirathi) और भिलंगना नदी (Bhilngna River) के संगम पर स्थित भारत सरकार (Government of India) के इस बहुउद्देशीय परियोजना (Multipurpose Project) के तहत 260.5 मीटर ऊंचे काफर बांध (Kaafar Dam) (मिट्टी तथा पत्थर से बना हुआ) का निर्माण किया गया हैं, जोकि एशिया (Asia) का सबसे ऊंचा तथा दुनिया का चौथा सबसे ऊंचा बांध (Dam) है। इस परियोजना की विशालता के कारण इसे ‘राष्ट्र का गांव’ (‘Nation’s Village’) की संज्ञा दी गई है। परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित है :-

  • केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त परियोजना (Joint project of the Center and U. P. Government) को 1972 में योजना आयोग ने अपनी स्वीकृति प्रदान की और 1978 से सिंचाई विभाग (Irrigation Department) द्वारा इस बांध का निर्माण कार्य शुरू किया गया। कार्य की धीमी प्रगति के कारण 1988 में केंद्र सरकार ने इसके निर्माण की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली और इस परियोजना से, टिहरी जल बांध निगम (Tehri Hydro Dam Corporation) की स्थापना कर 1989 में निर्माण की जिम्मेदारी निगम को सौंप दी। 1990 में इस निगम को विस्थापित लोगों (Displaced people) के पुनर्वास (Rehabilitation) की भी जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • राज्य के गठन के बाद उत्तर प्रदेश (U.P.) और दिल्ली (Delhi) के अलावा उत्तराखंड (Uttarakhand) भी इसका एक हिस्सेदार बन गया।
  • कुल 2,400 मेगावाट (MW) के विद्युत उत्पादन क्षमता वाली इस परियोजना में दो चरण है। प्रथम चरण में 1000 मेगावाट (MW) की टिहरी बांध एवं जल विद्युत परियोजना (Tehri Dam and Hydro Power Project) है। जबकि द्वितीय में 1000 मेगावाट (MW) की टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट (Tehri Pumped Storage Plant) तथा 400 मेगावाट (MW) की कोटेश्वर बांध एवं जल विद्युत परियोजना (Koteshwar Dam and Hydro Power Project) है।
  • इस परियोजना के मुख्य बांध और जलाशय से चार अलग सुरंगे (Diversion Tunnel) भी निकाली गई है, जिनमे से प्रत्येक 11 मीटर व्यास (Diameter) एवं घोड़े की नाल के आकार (Shape of Horseshoe) वाले है, जिनकी कुल लंबाई 3 किलोमीटर है।
  • 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत इसके जलाशय (स्वामी रामतीर्थ सागर) (Reservoir (Swami Ramtirtha Sagar)) की कुल जलधारण क्षमता (Water Holding Capacity) 354 करोड़ घन मीटर है, जिसमें 261 करोड घन मीटर जल क्रियाशील है। विद्युत उत्पादन के लिए इस जलाशय के जल स्तर को कम से कम 740 मीटर की ऊंचाई तक निरंतर (Continuous) बनाए रखना होगा
  • इस परियोजना का प्रथम चरण 30 जुलाई (July) 2006 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया। अब 1400 मेगावाट (MW) के दूसरे चरण पर तेजी से काम चल रहा है। दिसंबर (December) 2007  तक लगभग इस परियोजना पर लागत 8000 करोड रुपए खर्च हो चुके है।
टिहरी परियोजना के लाभ (Benefits of Tehri Project)
  • 2400 मेगावाट (MW) विद्युत का उत्पादन ।
  • वर्तमान में 4 लाख हेक्टेयर (Hectare) सिंचित क्षेत्र में सिंचाई के अलावा 2.7 लाख हेक्टेयर (Hectare) अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा का विकास करना है।
  • दिल्ली (Delhi) के 40 लाख लोगों के लिए प्रतिदिन 300 क्यूसेक (Cusec) तथा उत्तर प्रदेश (U.P.) के विभिन्न नगरो तथा गांव के लोगों के लिए प्रतिदिन 200 क्यूसेक (Cusec) पेयजल की उपलब्धता ।
  • उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल (Uttar Pradesh, Bihar and West Bengal) में बाढ़ (Flooding) में कमी।
  • स्थानीय लोगों को रोजगार (Employment) के अवसर ।
  • देश को प्रतिवर्ष ₹2000 करोड़ का लाभ तथा उत्तराखंड को रॉयल्टी (Royalty) के रूप में कुल उत्पादन का 12% बिजली मुफ्त में ।
विस्थापन और पुनर्वास (Displacement and Rehabilitation)
  • टिहरी परियोजना (Tehri project) से लगभग 1 लाख लोगों का निवास प्रभावित हुआ, जिनके पुनर्वास के लिए 582 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई
  • परियोजना से 1815 में स्थापित टिहरी शहर (Tehri Town)आसपास के 39 गाँव पूर्ण रुप से और 86 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हुए । इसके जलाशय (Reservoir) में पुराने टिहरी शहर (Old Tehri Town) पूर्ण रुप से डूब गया है
  • टिहरी शहर (Tehri Town) के लोगों को मूल शहर से 24 किलोमीटर दक्षिण में नव स्थापित नगर नई टिहरी (New Tehri) तथा देहरादून (Dehradun) एवं ऋषिकेश (Rishikesh) नगरों में पुनर्वासित (Rehabilitated) किया गया है।
  • परियोजना से प्रभावित ग्रामीण लोगों को रायवाला (देहरादून), पशुरोग (ऋषिकेश, देहरादून), पथरी (हरिद्वार), बंजारावाला एवं भानियावाला (Raiwala (Dehradun), Pashurog (Rishikesh), Pathri (Haridwar), Bnjarawala and Bhaniawala) आदि स्थानों पर पुनर्वासित किया गया है।
परियोजना संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (Project Related Key Facts)
  • इस बाँध का डिजाइन प्रोफेसर जेम्स ब्रून (Professor James Brune) ने किया था। शुरु में यह मात्र 600 मेगावाट (MW) की परियोजना थी और इसकी लागत (Cost) 197 करोड़ रुपए थी। लेकिन 1986 में सोवियत रूस (Russia) के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव (President Mikhail Gorwacyov) के भारत आगमन और टिहरी बांध (Tehri Dam) निर्माण को मदद के लिए समझौता होने के साथ ही केंद्र सरकार ने इस परियोजना का विस्तार कर, इसके प्रथम चरण में 1000 मेगावाट (MW) तथा द्वितीय चरण में 400 मेगावाट (MW) करने की घोषणा की ।

विष्णु-प्रयाग जल विद्युत परियोजना (Vishnu Prayag Hydroelectric Project)

चमोली (Chamoli) जिले में अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर 650 मेगावाट (MW) की इस जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (Department of Uttar Pradesh Power Corporation) एवं प्राइवेट कंपनी (Private Company) के माध्यम से कराया गया। बीच में लगभग 12 वर्षों तक धन के अभाव के कारण इसका निर्माण कार्य रुक गया तथा राज्य विभाजन के बाद निर्माण कार्य पुन: शुरू हुआ और 400 मेगावाट (MW) के इसके प्रथम चरण में 2006 से विद्युत उत्पादन शुरु हो गया

धौली गंगा फेज-I परियोजना (Dhauli Ganga Phase-I Project)

280 मेगावाट (MW) की भारत सरकार (Indian Government) की यह जल विद्युत परियोजना पूर्वी धौलीगंगा नदी (Dhauli Ganga River) पर धारचुला (Dharchula) के पास स्थित है। इस परियोजना को 2005 में चालू किया गया इस परियोजना पर बांध (Dam) 56 मीटर ऊंचा तथा 317 मीटर लंबा है। इसका निर्माण सी. एफ. आर. डी. (कंक्रीट फेज रॉक फिल डेम) (C.F.R.D. (Concrete Phase Rock Fill Dam)) से किया गया है। भारत में पहली बार कट ऑफ वॉल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस बाँध का निर्माण NHPC द्वारा कराया गया है। कुमाऊं क्षेत्र में भूमिगत पावर हाउस (Underground Power House) और सुरंगों वाली यह पहली परियोजना है। 

मनेरी भाली परियोजना I एवं II (Maneri Bhali Project I and II)

90 मेगावाट (MW) की मनेरी भाली परियोजना (Maneri Bhali Project) 1983 से कार्यरत है। यह भागीरथी नदी (Bhagirathi River) पर उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले में स्थित है ।

304 मेगावाट (MW) के मनेरी भाली परियोजना-II (धरासु) (Dharasu)

इस परियोजना का निर्माण 1976 में शुरू किया गया था। लेकिन धन के अभाव के कारण 1990 में इसका निर्माण कार्य रोक दिया गया, जिसे 2002-03 में पुनः शुरू किया गया परियोजना फरवरी (February) 2008 से चालू हो गई है।

श्रीनगर जल विद्युत परियोजना (Srinagar Hydro-power Project)

नर्मदा नदी (Narmada River) पर निर्माणाधीन 330 मेगावाट (MW) की इस परियोजना के 82.5 मेगावाट (MW) के प्रथम टरबाइन (Turbine) को 2008 में चालू कर दिया गया।

पाला-मनेरी परियोजना (Pala Maneri Project)

480 मेगावाट (MW) क्षमता वाली जल विद्युत परियोजना उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले में भागीरथी नदी (Bhagirathi River) पर निर्माणाधीन है इसे शीघ्र ही पूरा होने की संभावना है।

किशो बाँध परियोजना (Kisho Dam Project)

देहरादून (Dehradun) जिले में टॉस नदी (Tons River) पर इस बांध में  600 मेगावाट (MW) विद्युत उत्पादन करने की क्षमता है।

उत्यासू बाँध परियोजना (Utyasu Dam Project)

पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) जिले में अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर इस बाँध से 1000 मेगावाट (MW) विद्युत उत्पादन होने की संभावना है।

लोहारी नाग-पाला परियोजना (Lohari Nag-Pala Project)

उत्तरकाशी (Uttarkashi) जनपद में भागीरथी नदी (Bhagirathi River) पर इस बांध से 520 मेगावाट (MW) विद्युत उत्पादन होने की संभावना है।

कोटलीभेल परियोजना (Kotlibhel Project)

टिहरी (Tehri) जनपद में गंगा नदी (Ganga River) पर इस बांध से 100 मेगावाट (MW) विद्युत उत्पादन होने की संभावना है।

पंचेश्वर बांध परियोजना (Pancheshwar Dam Project)

1996 की संधि (Treaty) के  अनुरूप भारत और नेपाल सरकार (Indian and Nepal Government) की 5000 मेगावाट (MW) की यह परियोजना काली नदी (Kali River) पर बनाई जाएगी। परियोजना से उत्पन्न बिजली और पानी को आधा-आधा बांट लिया जाएगा। इसका बांध टिहरी से 2.5 गुना बड़ा होगा।

नव निर्माणाधीन परियोजना (New Under Construction Project)

राज्य में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (Uttarakhand Jal Vidhut Nigam Limited), टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (Tehri Hydro Development Corporation), राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (National Thermal Power Corporation), राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (National Hydroelectric Power Corporation), सतलुज जल विद्युत निगम (Satluj Jal Vidhut Nigam Limited), International Plant Propagators’ Society तथा निजी कंपनियों के अधीन कई लघु एवं बड़ी परियोजनाएं निर्माणाधीन है।

योजना कार्यक्रम (Plan)

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (Rajiv Gandhi Rural Electrification Scheme)

इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में वर्ष 2007 तक प्रत्येक गांव तथा वर्ष 2009 तक प्रत्येक घर को विद्युतीकरण (Electrification) करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिए मुख्य पावर लाइनों के अलावा सौर ऊर्जा (Solar Energy) का उपयोग किया जा रहा है।

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना (Rajeev Gandhi Electrification Project)

इस योजना के तहत 2009 तक राज्य में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले ग्रामीणों के घरों में विद्युत संयोजन प्रदान किया जाना था। इस योजना हेतु उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) एवं रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Rural Electrification Corporation Ltd) के मध्य 23 जून (June) 2005 को एक त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite agreement) हुआ, जिसमें उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand), उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Uttarakhand Power Corporation Limited) एवं रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड शामिल है। इससे उत्तराखंड के  हर घर का विद्धुतिकरण करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

कुटीर ज्योति योजना (Kutir Jyoti Scheme)

यह योजना गरीबी रेखा (Poverty Line) के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को नि:शुल्क विद्युत सुविधा प्रदान करने के लिए शुरु की गई है। इस योजना में भी मुख्य पावर लाइनों के अलावा सौर्य ऊर्जा (Solar Energy) तथा घराट (पनचक्की) का उपयोग किया जा रहा है।

ऊर्जा पार्क (Energy Park)

राज्य में 10 जनपद स्तरीय ऊर्जा पार्क तथा एक राज्य स्तरीय ऊर्जा पार्क (देहरादून) में स्थापित किया गया है।

माइक्रो हाइडल परियोजना (Micro Hydel Project)

राज्य में दूरस्थ गांवों (Remote villages) में विद्युतीकरण के लिए 20 माइक्रो हाइडल परियोजना (Micro Hydel Project) चलाई जा रही है। इन परियोजना के स्थापना एवं संचालन में उपभोक्ता समितियों की भी सहायता ली जाती है।

पढ़ें उत्तराखंड में बोली जाने वाली भाषाएँ एवं बोलियाँ

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