उत्तराखंड में परिवहन के साधन

Transportation ways & modes available in Uttarakhand state

राज्य में प्रयुक्त परिवहन साधनो का संक्षिप्त वर्णन अधोलिखित है :-

Transportation modes in Uttarakhand

सड़क तंत्र (Road network)

जटिल भौगोलिक संरचना (Complex Geological Structure) के कारण लगभग 40% भू-भाग (Terrain) पर अभी भी सड़कों का विकास न होने के बावजूद राज्य के कुल यातायात में सड़क यातायात का 85% से अधिक है।

राज्य के कुमाऊ मंडल (Kumaon) की अपेक्षा गढ़वाल मंडल (Garhwal) में सड़कों की संख्या एवं लंबाई अधिक है। गढ़वाल मंडल की अधिकांश सड़के नदियों के समांतर (Parallel) बनाई गई है।

राज्य सरकार के आंकड़ों (Figures) के अनुसार 2011 के मध्य तक राज्य में सभी विभागों के अधिन सड़कों की कुल लंबाई 33,914 किलोमीटर थी, जिनमें से लगभग आधी सड़के ही पक्की थी।

2004 तक राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) की कुल संख्या 9 थी, लेकिन पांच नए राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के बाद अब इनकी संख्या 14 और 2011 के मध्य तक उनकी कुल लंबाई 2,657 किलोमीटर हो गई थी।

कुल राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) उनमें से 1376 किलोमीटर का रख-रखाव सामाजिक निर्माण विभाग (Social Works Department) और शेष का रखरखाव सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation) करता है।

राज्य से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग निम्नलिखित है

S. R. NH No.Routeaलम्बाई (किमी)
158उत्तर प्रदेश सीमा – मंगलौर – रुड़की – हरिद्वार – ऋषिकेश – शिवपुरी – देवप्रयाग – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – कर्णप्रयाग – चमोली – जोशीमठ – बद्रीनाथ – माना373
272हिमाचल प्रदेश सीमा – ढालपुर – सहसपुर – देहरादून – बुलावा- हरिद्वार100
372 Aउत्तर प्रदेश सीमा – माजरा – देहरादून15
473रुड़की – भगवानपुर – उत्तर प्रदेश सीमा20
574हरिद्वार – उत्तर प्रदेश सीमा – जसपुर – काशीपुर – रुद्रपुर – किच्छा- सितारगंज – उत्तर प्रदेश सीमा153
687उत्तर प्रदेश सीमा – रुद्रपुर – पंतनगर – हलद्वानी – नैनीताल – भवाली – अल्मोड़ा – रानीखेत – द्वाराघाट – गैरसैंण –  कर्णप्रयाग284
794ऋषिकेश – टिहरी – धरासू – खरसाली – यमुनोत्री160
8108धरासू – उत्तरकाशी – मनेरी-गौरीकुंड – गंगोत्री127
9109रुद्रप्रयाग –  गुप्तकाशी – केदारनाथ76
10119उत्तर प्रदेश सीमा – कोटद्वार – पौड़ी – श्रीनगर135
11121काशीपुर – राष्ट्रीय राजमार्ग 119 पर को बुबाखाल के पास मिलती है252
12123राष्ट्रीय राजमार्ग 72 के पास हरबतपुर में जुड़ता है – विकासनगर – कलसी – नौगाँव95
13125सितारगंज – खटीमा- टनकपुर – चम्पावत- पिथौरागढ़201

सड़कों के निर्माण व संरक्षण में सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation), डी.जी.बी.आर (D.G.B.R), लोक निर्माण विभाग (P.W.D),  वन विभाग (Forest Department), जिला परिषद (District Council) एवं नगर पालिका (Municipality) आदि संस्थाएं (Institutions) योगदान करती है।

सड़क परिवहन (Road Transportation) के चालकों हेतु देहरादून (Dehradun) की तरह हल्द्वानी (Haldwani) में भी एक चालक प्रशिक्षण केंद्र (Driver Training Center) की स्थापना की जा रही है।

सड़क परिवहन (Road Transportation)

राज्य में यात्री एवं माल यातायात (Passenger and Goods Traffic) का सबसे प्रमुख साधन सड़क परिवहन (Road Transportation) है। यहां की अर्थव्यवस्था (Economy) अब परिवहन व्यवसाय पर आधारित होने लगी है। यह बहुत तीव्र गति से व्यवसाय का रूप ग्रहण करता जा रहा है।

इस समय प्रदेश के कुल सड़क परिवहन (Road Transportation) व्यवसाय (Business) में 80 प्रतिशत योगदान राज्य के निजी ट्रांसपोर्टरों (Private transporters) के वाहनों का और शेष 20% सरकारी व अन्य प्रांतों (Other Provinces) से आने वाले वाहनों का है।

यद्यपि राज्य में राज्य सड़क परिवहन निगम, गढ़वाल मंडल विकास निगम एवं कुमाऊं मंडल विकास निगम (Road Transport Corporation, Garhwal Mandal Vikas Nigam  and Kumaon Mandal Vikas Nigam) आदि राजकीय कंपनियों (State Companies) द्वारा बसों का संचालन किया जाता है।

राज्य सड़क परिवहन के अधिकांश भाग पर गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड, गढ़वाल मोटर यूजर्स को-ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसायटी लिमिटेड, टिहरी गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड तथा सीमान्त सहकारी संघ (Garhwal Motor Honors Union Limited, Garhwal Motor Users Cooperative Transport Society Ltd., Tehri Garhwal Motor Owners’ Union Limited, Kumaon Motor Owners Cooperative Union Limited and Frontier Cooperative Federation) आदि निजी कंपनियों (Private Companies) का विस्तार है।

गढ़वाल मोटर आनर्स यूनियन लिमिटेड (Garhwal Motor Honors Union Limited), एशिया की प्रमुख यातायात कंपनी में से एक है। जिसकी स्थापना 1941 में कोटद्वार (पौड़ी) (Kotdwar (Pauri)) में हुई थी। इसका एक कार्यालय (Office) ऋषिकेश (Rishikesh) में भी है।

कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (Kumaon Motor Honours Union Limited) की स्थापना सन् 1939 में काठगोदाम  (Kathgodam) में हुई थी। उसका कार्यालय रामनगर तथा टनकपुर (Ramnagar and Tanakapur) में है।

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रेल पथ (Rail Track)

जटिल भौगोलिक परिस्थितियों (Geographical Terrain) के कारण यहां रेलपथ (Railway Track) का विस्तार बहुत कम हो पाया है। जितना हुआ है, उनमें से 283.76 किलोमीटर बड़ी लाइन व 61.15 किलोमीटर छोटी लाइन है।

राज्य के केवल छह जिलों (हरिद्वार, देहरादून, पौडी, उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत (Haridwar, Dehradun, Pauri, Udham Singh Nagar, Nainital and Champawat)) में रेल लाइन बिछाई गई है। राज्य के छोटे-बड़े कुल 41 रेल स्टेशन है।

छह जिलों में से सर्वाधिक रेल ट्रैक वाला जिला हरिद्वार (Haridwar) और सबसे कम रेल ट्रैक वाला जिला पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) है।

1 जनवरी (January) 1896 को लक्सर जंक्शन (Laksar Junction) को हरिद्वार (Haridwar) से जोड़ा गया तथा सन् 1900 में हरिद्वार से देहरादून (Haridwar to Dehradun) को जोड़ा गया। हरिद्वार-देहरादून (Haridwar-Dehradun) रेल मार्ग राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) के मध्य से होकर गुजरती है। इस लाइन को 1897 में बिछाया गया था।

टनकपुर से बागेश्वर (Tanakpur to Bageshwar) तक निर्माण हेतु प्रस्तावित रेलपथ को मार्च 2012 में राष्ट्रीय परियोजना (National Project) का दर्जा दिया गया है। अतः इनमें आने वाले खर्च का पूरा वहन केंद्र सरकार (Central Government) करेगी।

रेल परिवहन (Rail Transport)

देहरादून, रायवाला, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, रामनगर, रुद्रपुर, किच्छा, लालकुआं, हल्द्वानी, काठगोदाम तथा टनकपुर (Dehradun, Rayvala, Rishikesh, Haridwar, Roorkee, Kashipur, Ramnagar, Rudrapur, Kichchha, Lalkuwan, Haldwani, Kathgodam and Tanakpur) आदि राज्यों की प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जिनसे यात्री एवं माल का परिवहन होता है।

काठगोदाम (नैनीताल) (Kathgodam (Nanital)) और कोटद्वार (पौड़ी) (Kotdwar (Pauri Garhwal)) बड़ी रेल लाइनों के टर्मिनल स्टेशन है। टनकपुर (चंपावत) (Tanakpur (Champawat)) छोटी रेल लाइन का टर्मिनल स्टेशन (Terminal Station) है।

मार्च (March) 1900 में स्थापित देहरादून (Dehradun) रेलवे स्टेशन उत्तराखंड में उत्तर रेलवे का सबसे आखिरी स्टेशन है।

वर्ष 2000 के, मॉडल स्टेशन (Model Station) के लिए देहरादून रेलवे स्टेशन को साफ-सफाई, अच्छी यात्रा सुविधाएं प्रदान करने तथा अन्य व्यवस्थाओं (Other Arrangements) के लिए सितंबर 2003 में ISO का दर्जा प्रदान किया गया। यह दर्जा पाने वाला यह राज्य का पहला स्टेशन है।

देहरादून (Dehradun) से देश के विभिन्न स्थानों के लिए संचालित होने वाली ट्रेनों में से एक (जन शताब्दी एक्सप्रेस (Jan Shatabdi Express)) को नवंबर 2004 में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र (Quality Certifications) ISO 9001-2001 प्राप्त हुआ।

हवाई सेवा (Air Services)

राज्य के प्रमुख हवाई अड्डे निम्नलिखित है :-

  1. जोली ग्रांट (Jolly Grant) – देहरादून (Dehradun)
  2. पंतनगर (फूल बाघ) (Pant Nahar (Phulbhag)) – उधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar)
  3. नैनी सैनी (Naini Saini) –   पिथौड़ागढ़ (Pithoragarh)
  4. गोचर (Gochar) – चमोली (Chamoli)
  5. चिन्यालीसौड़ (Chinyalisaud) –   उत्तरकाशी (Uttarakashi)
  • नैनी-सैनी एयरपोर्ट (Airport) को ATR-72 के विमानों के परिचालन (Operations) लायक बनाया जा रहा है।
  • पंतनगर को कार्गो एयरपोर्ट (Cargo Airport) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • जॉली ग्रांट हवाई अड्डे (Jolly Grant Airport) को विस्तृत कर बोइंग और एयरबस (Boeing and Airbus) उतारने लायक बनाया गया है।
  • देहरादून-नई दिल्ली (Dehradun- New Delhi) के बीच नियमित वायु सेवा प्रारंभ की गई है।
  • गोचर (Gochar) में हेलिकॉप्टर सर्विस (Helicopter Service) हेतु हैंगर (Hangar) का निर्माण किया गया है। राज्य के सभी जिलो तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर एक-एक हेलिपैड का निर्माण किया गया है। इसके अलावा राज्य में सेना के 10 हेलिपैड है।
  • नैनीताल (Nainital) व कार्बेट (Carbbet) आने वाले पयर्टकों हेतु बाजपुर (Bajpur) में छोटे विमान (Small Plane) हेतु एक पोर्ट (Port) का निर्माण किया जा रहा है।
  • केदारनाथ (Kedarnath) के लिए 16 मई (May) 2003 से पवन हंस कंपनी (Pawan Hansh Company) द्वारा हेलीकाप्टर (Helicopter) सेवा प्रारंभ की गई है। यह हेलीकॉप्टर (Helicopter) अगस्त्यमुनि (Agastymuni) तथा फाटा (Phata) नामक स्थान से संचालित होते है।
  • अगस्तमुनि से केदारनाथ तक जाने एवं अगस्तमुनि वापस पहुंचने का हेलीकॉप्टर मार्ग 40 मिनट का है। यह सेवा केवल केदारनाथ के पट खुले रहने तक ही उपलब्ध होती है।
  • हरिद्वार (Haridwar) में एक एविएशन अकादमी (Aviation Academy) और हवाई अड्डे (Airport) का निर्माण किया जा रहा है।
  • गोचर हवाई अड्डे (Airport) को हेलीकॉप्टर सर्विस (Helicopter Service) हब (Hub) के रुप में विकसित किया जाना है।

    जलमार्ग (Sluice)

राज्य में प्रभावित होने वाली गंगा (Ganga), यमुना (Yamuna) तथा कुछ अन्य नदियों में संचालित छोटी-बड़ी नौकाओं (Small-Big Boats) द्वारा स्थानीय तथा आस-पास के क्षेत्रों में आवागमन किया जाता है।

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