नाजीवाद क्या है - नाजीवाद के प्रमुख सिद्धांत, विकास

नाजीवाद क्या है – नाजीवाद के प्रमुख सिद्धांत, विकास

नाजीवाद क्या है, नाजीवाद का उदय (नाजीवाद का उदय कब हुआ), नाजीवाद के प्रमुख सिद्धांत कौन-कौन से थे, नाजीवाद के विकास, नाजीवाद की किन्ही पांच विशेषताओं का वर्णन करें, नाजीवाद का प्रवर्तक कौन था, नाजीवाद के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए, जर्मनी में नाजीवाद के उदय पर चर्चा करें आदि प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

नाजीवाद क्या है (what is nazism in hindi)

नाजीवाद एक ऐसी विचारधारा थी जिसका नेतृत्व जर्मनी में एडोल्फ हिटलर द्वारा किया गया था जिसके कारण एडोल्फ हिटलर को नाजीवाद का संस्थापक भी कहा जाता है। नाजीवाद वह व्यवस्था थी जो सरकार एवं देश की आम जनता के मध्य एक नए संबंधों को दर्शाने का कार्य करती थी। नाजीवाद की शुरुआत सर्वप्रथम जर्मनी में हुई। नाजीवादी विचारधारा का उदय फासीवाद के बाद हुआ था जिसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र को सर्वोच्चता प्रदान करना था। नाजीवादी विचारधारा के अंतर्गत देश के प्रति कट्टर राष्ट्रवाद, विदेशी विरोध एवं देश प्रेम जैसी भावनाओं को बढ़ावा दिया गया।

नाजीवाद वह व्यवस्था है जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार की हर योजना में जनता व समाज की बराबर भागीदारी रहती है। नाजीवादी विचारधारा की स्थापना एडोल्फ हिटलर ने की थी जिसे जर्मनी का सबसे क्रूर व निर्दयी तानाशाह भी कहा जाता है। जर्मनी में नात्सी यहूदियों के प्रति नफरत की भावना रखते थे जिसके कारण यूरोप और जर्मनी में घटी सभी घटनाओं के लिए यहूदियों को ही जिम्मेदार माना जाता था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों का कत्लेआम होने के पीछे भी नात्सी ही जिम्मेदार थे।

नाजीवाद का उदय (नाजीवाद का उदय कब हुआ)

नाजीवाद का उदय सर्वप्रथम जर्मनी में हुआ था, जिसकी शुरुआत एडोल्फ हिटलर ने की थी। 20 वीं सदी के शुरुआती दौर में जर्मनी को एक शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था। इस दौरान जर्मनी ने ऑस्ट्रेलियाई साम्राज्य से संधि करके पहला विश्व युद्ध लड़ा था जो सन 1914-1918 के मध्य लड़ा गया था। इस युद्ध के परिणाम स्वरूप जर्मनी की आर्थिक स्थिति पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा, जिसके कारण वहां नाजीवाद का उदय हुआ। जर्मनी में एडोल्फ हिटलर ने कई सामाजिक कार्यक्रमों को संचालित किया जिसके कारण नाजीवाद की गति में वृद्धि हुई। हिटलर अपने द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रमों की मदद से जर्मनी के नागरिकों को समान रूप से अधिकार व सम्मान दिलाना चाहता था। हिटलर द्वारा किए जाने वाले इन प्रयासों से जर्मनी के लोगों में उम्मीद की एक नई किरण जागृत हुई जिससे प्रभावित होकर जर्मनी के विशेष वर्ग के लोगों ने भारी मात्रा में हिटलर का समर्थन करते हुए नाजीवाद से जुड़े सभी कार्यक्रमों में भाग लिया। धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को जर्मनी के सभी नागरिकों ने समर्थन दिया जिसके फलस्वरुप जर्मनी में नाजीवाद का उदय तेजी से होने लगा। सन 1933 में एडोल्फ हिटलर के सत्ता में आने के पश्चात जर्मनी में तानाशाही की शुरुआत हुई जिसे नाजीवाद के रूप में भी जाना जाता है।

इसके अलावा जर्मनी में नाजीवाद के उदय के कई मुख्य कारण भी थे जैसे जनता के बीच साम्यवाद का डर, देश में आर्थिक मंदी की स्थिति, वाइमर गणतंत्र की असफलता, यहूदियों के प्रति विरोध की नीति, हिटलर का प्रबल व्यक्तित्व, जर्मनी की कानून व्यवस्था आदि। सन 1919 में पेरिस में हुए शांति सम्मेलन में जर्मनी ने वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर किए थे जो देश हित की भावना से उचित नहीं थे। दरअसल वर्साय की संधि सबसे विवादित संधि थी जिस पर जर्मनी ने अपने हस्ताक्षर किए थे। कई इतिहासकारों ने वर्साय की संधि को एक आरोपित संधि के नाम से भी संबोधित किया। वर्साय की संधि वास्तव में अन्याय पूर्ण तरीके एवं द्वेष की भावना से रची गई थी जिसकी शर्तें अत्यधिक अन्याय पूर्ण एवं कठोर थी। इस संधि के द्वारा जर्मनी में तरह-तरह के जुर्माने लगाए गए जिसके कारण जर्मनी की आर्थिक स्थिति अन्य देशों के मुकाबले कमजोर पड़ती गई। यही कारण है कि जर्मनी में नाजीवाद का उदय तेजी से हुआ।

नाजीवाद के प्रमुख सिद्धांत कौन-कौन से थे

नाजीवाद के कई सिद्धांत हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:-

  • शांति विरोधी
  • साम्यवादी विरोधी
  • लोकतंत्र विरोधी
  • अखिल जर्मन साम्राज्य का निर्माण
  • रक्त एवं मिट्टी का सिद्धांत
  • प्रजातियों शुद्धता का सिद्धांत

शांति विरोधी

नाजीवाद फासीवाद की तरह ही शांति विरोधी है। नाजीवाद के अनुसार शांति व्यवस्था, प्रगति की राह में बाधा के रूप में कार्य करता है। नाजीवादी विचारकों का मानना था कि केवल युद्ध ही उन्नति के मार्ग को प्रशस्त कर सकता है। परंतु शांति व्यवस्था युद्ध में रुकावट पैदा करता है जो फासीवाद एवं नाजीवाद के दृष्टिकोण से उचित नहीं था।

साम्यवाद विरोधी

नाजीवाद साम्यवाद का विशेष रूप से विरोधी था क्योंकि साम्यवाद के अंतर्गत राज्य को नियंत्रित करने की नीतियों पर कार्य किया जाता है। नाजीवाद के अंतर्गत राज्य को नियंत्रित ना करके नागरिकों पर अधिकार किया जाता है। इसके अलावा साम्यवाद में हर नागरिक को बराबरी का अधिकार प्रदान किया जाता है जबकि नाजीवाद में केवल शक्तिशाली वर्ग के लोगों को ही अधिकार प्रदान किए जाते हैं।

लोकतंत्र विरोधी

नाजीवाद को लोकतंत्र का विरोधी कारक माना जाता है। यह वह व्यवस्था है जिसके अंतर्गत फैसले लेने का अधिकार केवल एक व्यक्ति को दिया जाता है। यह लोकतंत्र को भीड़ तंत्र मानता था जिसके कारण नाजीवाद पूर्ण रूप से लोकतंत्र का विरोध करता था।

अखिल जर्मन साम्राज्य का निर्माण

नाजीवाद का उद्देश्य अखिल जर्मन साम्राज्य का निर्माण करना था। हिटलर के अनुसार जर्मन की सीमाएं एक संयोग का फल है जिन्हें मानव द्वारा निर्मित किया गया है एवं मानव द्वारा ही इसे परिवर्तित भी किया जा सकता है। नाजीवाद अपने इस सिद्धांत से जर्मनी में खोए हुए सभी प्रदेशों को सम्मिलित करना चाहता था।

रक्त एवं मिट्टी का सिद्धांत

एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के किसानों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाकर यह सिद्धांत दिया कि किसान जर्मन प्रजाति के महान प्रतिनिधि हैं। वास्तव में हिटलर द्वारा किसानों को महत्व देने के पीछे सैन्यवाद को बढ़ावा देने का उद्देश्य था। इसके अलावा हिटलर ने कृषक समुदाय के लोगों को सैनिक समूह में भर्ती कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का भी प्रयास किया एवं एक विशाल सैनिक संगठन का निर्माण भी किया।

प्रजातीय शुद्धता का सिद्धांत

हिटलर के कथनानुसार केवल जर्मन के नागरिक ही श्रेष्ठ नस्ल के लोग हैं जो मानव संस्कृति की प्रगति का आधार है। केवल इतना ही नहीं हिटलर के अनुसार मानव संस्कृति के प्रगति का आधार आर्यों ने तैयार किया है जो अन्य सभी प्रजातियों पर शासन कर सकते हैं।

नाजीवाद के विकास

पेरिस में हुए शांति सम्मेलन के पश्चात जर्मनी ने वर्साय की संधि हस्ताक्षर किए। यह प्रथम विश्व युद्ध के बाद का समय था जब जर्मनी में फासीवाद का उदय अपनी चरम सीमा पर था। इस दौरान जर्मनी ने एक बड़ी धनराशि युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में आरोपित की थी जिसके कारण जर्मनी का सैन्य बल कमजोर पड़ गया था। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों को जर्मनी से अलग किया गया जिसके कारण जर्मनी की जनता का अपमान हुआ। इस घटना के बाद हिटलर ने जर्मनी की जनता के सम्मान को पुनः स्थापित करने की घोषणा की जिसके फलस्वरुप उसे भारी मात्रा में जन समर्थन हासिल हुआ। वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने के साथ ही हिटलर की तानाशाही का भी उदय हुआ जिसने नाजीवाद को एक नई गति प्रदान की।

नाजीवाद की किन्ही पांच विशेषताओं का वर्णन करें

नाजीवाद की पांच मुख्य विशेषताएं कुछ इस प्रकार है:-

  • कट्टर राष्ट्रवाद
  • राष्ट्रहित
  • देश प्रेम
  • विदेशी विरोध
  • आर्य एवं जर्मन हित

कट्टर राष्ट्रवाद

नाजीवाद के अंतर्गत देश के प्रति कट्टर राष्ट्रवाद की भावना को उजागर किया गया। इस व्यवस्था में सरकार एवं आम नागरिकों के बीच संबंधों को बेहतर करने का प्रयास किया गया जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों को देश की सरकार के अनुरूप चलाना था।

राष्ट्रहित

नाजीवाद के द्वारा राष्ट्र के हित को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता था। इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य सरकार एवं नागरिकों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने का कार्य करके राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाने का प्रयास किया जाता था।

देश प्रेम

देश प्रेम नाजीवाद की एक प्रमुख विशेषता थी। इसके अंतर्गत देश के प्रति प्रेम की भावना को नागरिकों के बीच स्थापित किया गया जो नाजीवाद के दृष्टिकोण से अति आवश्यक था। वर्साय की संधि के बाद जर्मनी के लोगों में देशभक्ति की भावना लुप्त होती जा रही थी जिसके कारण एडोल्फ हिटलर ने देश प्रेम की भावना को सामाजिक रूप से बढ़ावा देने का प्रयास किया।

विदेशी विरोध

नाजीवाद एक ऐसी विचारधारा थी जिसमें विदेश की नीतियों का सामाजिक रुप से विरोध प्रदर्शन किया जाता था। यह एक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के वातावरण में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु एक रणनीति थी जिसे “स्वहितकारी रणनीति” के नाम से भी जाना जाता है।

आर्य एवं जर्मन हित

नाजीवाद में आर्य एवं जर्मन हित को प्राथमिकता दी जाती थी। हिटलर के अनुसार केवल आर्य ही एक संपन्न वर्ग को संबोधित कर सकते थे। हिटलर ने जर्मनी में यहूदी विरोध की नीति को अपनाकर आर्य एवं जर्मन के हित के लिए कई कार्य किए जिसके कारण जर्मनी में नाजीवाद का विकास हुआ।

नाजीवाद का प्रवर्तक कौन था

एडोल्फ हिटलर को नाजीवाद का प्रवर्तक कहा जाता है। नाजीवाद हिटलर की एक ऐसी विचारधारा थी जिसने आम जनता को बेहद प्रभावित किया। एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल सन 1889 में ऑस्ट्रिया में हुआ था। विश्व भर में हिटलर को एक क्रूर शासक के रूप में जाना जाता है। हिटलर “राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी” का नेतृत्व करता था जिसे “नाजी दल” के नाम से भी जाना जाता है। हिटलर ने सन 1933 से 1945 तक जर्मनी में शासन किया। एडोल्फ हिटलर को द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए जिम्मेदार माना जाता है क्योंकि उसके आदेश पर ही नात्सियों ने पोलैंड पर आक्रमण किया था। हिटलर द्वारा संचालित किए जाने वाले नाजी दल के सदस्यों ने यहूदियों को प्रथम विश्वयुद्ध की हार के लिए दोषी माना। हिटलर ने जर्मनी में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।

नाजीवाद के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए

नाजीवाद का प्रमुख उद्देश्य आम जनता के बीच एक नए संबंधों को स्थापित करके देश में कट्टर राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देना था। इसके अलावा नाजीवाद के कारण जर्मनी में यहूदियों को घृणा की नजर से देखा जाता था जिसके कारण नात्सी यहूदियों के प्रति भेदभाव की भावना रखते थे। केवल इतना ही नहीं नाजीवाद साम्यवाद एवं फासीवाद का भी कट्टर विरोधी था।

जर्मनी में नाजीवाद के उदय पर चर्चा करें

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया की नाजीवाद का उदय सर्वप्रथम हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी में हुआ था। नाजीवाद के कारण जर्मनी में कई राजनीतिक क्रांतिकारी परिवर्तन हुए जो हिटलर द्वारा संचालित किए गए। बीसवीं सदी में नाजीवाद नागरिकों के बुद्धि बल, विवेक एवं तर्क के कट्टर विद्रोह का प्रतीक माना जाता था। इसके अलावा नाजीवाद जर्मनी में साम्यवाद, फासीवाद, व्यक्तिवाद, उदारवाद एवं जनतंत्र का भी विरोध किया करता था।

पढ़ें –

प्रातिक्रिया दे

Your email address will not be published.

*