मिश्रण और यौगिक में अंतर (Difference Between Mixture and Compound)

मिश्रण और यौगिक में अंतर (Difference Between Mixture and Compound)

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Table of Contents

मिश्रण और यौगिक (Mixtures and Compounds)

मिश्रण किसे कहते हैं (What is the Mixture in hindi)

जब दो या दो से अधिक तत्वों अथवा यौगिकों को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है तो ऐसे तत्व को मिश्रण के नाम से जाना जाता है। यह रासायनिक रूप से संयुक्त नहीं होते हैं एवं इनके अनुपात में भी भिन्नता हो सकती है। यह आमतौर पर वे पदार्थ होते हैं जिनका निर्माण ठोस, द्रव एवं गैसों को मिलाने की प्रक्रिया के कारण होता है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों अथवा यौगिकों का वह संयोजन होता है जिनमें मौजूद घटक एक दूसरे के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया करने में असमर्थ होते हैं। इसके अलावा मिश्रण में विभिन्न प्रकार के अभिकर्मक (reagent) की भी उपस्थिति होती है। अभिकर्मक वह पदार्थ होते हैं जिन्हें किसी तंत्र में रासायनिक अभिक्रिया उत्पन्न करने के लिए मिलाया जाता है।

मिश्रण के प्रकार (Type of Mixture in hindi)

रासायनिक विज्ञान में मिश्रण को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है जैसे:-

  • समांगी मिश्रण (homogeneous mixture)
  • विषमांगी मिश्रण (heterogeneous mixture)
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture)

समांगी मिश्रण वह पदार्थ होते हैं जो आसानी से किसी पदार्थ में घुलनशील हो जाते हैं। इस प्रकार के पदार्थों का संगठन सभी स्थानों पर एक समान होता है जिसके कारण इन्हें समांगी मिश्रण कहा जाता है।

समांगी मिश्रण के उदाहरण (Examples of Homogeneous Mixtures)
  • नमक का घोल
  • चीनी का घोल
  • समुद्री जल
  • शराब एवं पानी का मिश्रण
  • सोडा एवं पानी का मिश्रण
  • पेट्रोल और तेल का मिश्रण आदि।
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)

विषमांगी मिश्रण वह पदार्थ या यौगिक होते हैं जिनका निर्माण अनिश्चित अनुपात में विभिन्न प्रकार के तत्व या यौगिकों को मिलाने से होता है। इस प्रकार के मिश्रण के घटकों की संरचना समान नहीं होती है जिसके कारण इनके अव्ययी कणों को अलग-अलग देखा जा सकता है।

विषमांगी मिश्रण के उदाहरण (Examples of Heterogeneous Mixtures)
  • नमक और सल्फर का मिश्रण
  • जल एवं तेल का मिश्रण
  • लोहे की छीलन आदि।

मिश्रण के प्रमुख घटक (Major Components of Mixture)

मिश्रण के प्रमुख घटकों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है:-

  • विलायक (solvent)
  • विलेय (soluble)
विलायक (Solvent)

विलायक वह माध्यम होता है जो किसी मिश्रण में मिलाएं गए ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थों को सामग्री में घुलनशील होने में सहायता प्रदान करते हैं। किसी मिश्रण में विलायक की संरचना सर्वोत्तम मानी जाती है। यह किसी भी मिश्रण में ठोस, गैसीय एवं तरल अवस्था में उपस्थित हो सकते हैं। क्लोरोफॉर्म (chloroform), एसिटिक एसिड (acetic acid), गैसोलीन (gasoline), नाइट्रोजन (nitrogen) आदि विलायक के उदाहरण माने जाते हैं।

विलेय (Soluble)

जो पदार्थ द्रव में घुलनशील होकर विलियन का निर्माण करते हैं उन्हें विलेय के नाम से जाना जाता है। यह गैस, ठोस एवं द्रव तीनों ही अवस्था में विलायक में आसानी से घुल सकते हैं। इसके अलावा यह जल में पूर्णत: लुप्त हो जाते हैं। हवा में मौजूद ऑक्सीजन (oxygen), कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) एवं नाइट्रोजन (nitrogen) विलेय के प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।

मिश्रण के उदाहरण (Examples of Mixtures)

  • वायु
  • रेत
  • सीमेंट
  • गीली मिट्टी
  • रक्त
  • प्लास्टिक
  • अम्ल वर्षा
  • मूत्र
  • जिलेटिन आदि।

मिश्रण को अलग करने की विधि (Method of Separating Mixtures in hindi)

किसी भी मिश्रण को उनके घटकों के आधार पर विभाजित किया जा सकता है। मिश्रण एक भौतिक अवस्था होती है जिस को निम्न प्रकार से अलग किया जा सकता है:-

  • वाष्पीकरण (evaporation)
  • आंशिक आसवन (fractional distillation)
  • उधर्वपातन (subversion)
  • रवाकरण (raving)
  • आसवन विधि (distillation method)
वाष्पीकरण (Evaporation)

वाष्पीकरण वह प्रक्रिया होती है जिसके माध्यम से किसी भी मिश्रण को विभाजित किया जा सकता है। किसी भी पदार्थ या यौगिक को एक निश्चित तापमान पर गर्म करने से उस पदार्थ का शुद्धिकरण किया जा सकता है। दरअसल वाष्पीकरण की सहायता से पदार्थ अपने क्वथनांक (boiling point) पर अपघटित हो जाते हैं जैसे मीथेन (methane), अल्कोहल (alcohol), एसीटोन (acetone) इत्यादि।

आंशिक आसवन (Fractional Distillation)

रसायन विज्ञान में आंशिक आसवन विधि के माध्यम से उन मिश्रित द्रव्यों को विभाजित किया जा सकता है जिनके क्वथनांक में बेहद कम अंतर होता है। अधिकतर मिश्रण को आसवन विधि के द्वारा पृथक किया जा सकता है अर्थात यह द्रवीय मिश्रण को अलग करने की एक विधि होती है। आंशिक आसवन के पहले भाग को वाष्पीकरण एवं दूसरे भाग को संघनन कहा जाता है।

उधर्वपातन (sublimation)

उधर्वपातन वह भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी भी ठोस पदार्थ को गैसीय रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान किसी पदार्थ की मूल अवस्था मध्यवर्ती द्रव अवस्था में परिवर्तित नहीं होती है। इस विधि के माध्यम से दो ठोस मिश्रणों को विभाजित किया जा सकता है जैसे अमोनियम क्लोराइड (ammonium chloride), नेप्थलीन (naphthalene), कपूर (camphor) इत्यादि।

रवाकरण (raving)

किसी भी अकार्बनिक ठोस मिश्रण को रवाकरण के माध्यम से अलग किया जा सकता है। रवाकरण वह विधि होती है जिसमें अशुद्ध ठोस मिश्रण को एक उचित विलायक के साथ मिलाकर एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है एवं उसे गर्म अवस्था में ही किसी कीप के माध्यम से छानकर अलग कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद विलियन को निम्न तापमान पर ठंडा किया जाता है जिसके पश्चात शुद्ध पदार्थ क्रिस्टल के रूप में विलियन से पृथक हो जाते हैं।

आसवन विधि (Distillation Method)

जब किसी मिश्रित द्रव के अवयवों को उनके वाष्पन-सक्रियताओं में भिन्नता के आधार पर उन्हें अलग किया जाता है तो इस विधि को आसवन विधि के नाम से जाना जाता है। इसमें मुख्य रूप से किसी दो द्रव्यों के क्वथनांक को पृथक किया जाता है अर्थात यह द्रव के मिश्रण को अलग करने की एक विशेष विधि होती है।

मिश्रण के गुण (Properties of Mixtures)

मिश्रण के गुण कुछ इस प्रकार हैं:-

  • किसी भी मिश्रण में उपयोग किए जाने वाले पदार्थों या अवयवों को रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से आसानी से अलग-अलग किया जा सकता है।
  • मिश्रण में पाई जाने वाले अवयव की मात्रा किसी भी अनुपात में उपस्थित हो सकती है।
  • मिश्रण का निर्माण करने वाले पदार्थ या अवयव गैसीय, ठोस एवं द्रवीय अवस्था में हो सकते हैं।
  • किसी भी मिश्रण में उपस्थित प्रत्येक अवयव अपने रासायनिक गुणों को दर्शाने का कार्य करता है।

 

यौगिक किसे कहते हैं (What is Compound in hindi)

यौगिक वह पदार्थ होते हैं जिसका निर्माण दो या दो से अधिक तत्वों या पदार्थों को एक निश्चित तापमान में रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से किया जाता है। यह तत्व या पदार्थ रासायनिक बंधों के द्वारा आपस में जुड़े हुए रहते हैं। जिन यौगिकों का निर्माण रासायनिक तत्वों से मिलकर होता है उन्हें भौतिक प्रयासों से एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है, बल्कि इन्हें केवल रासायनिक तरीकों से ही विभाजित किया जा सकता है। रासायनिक यौगिक बेहद सरल एवं बेहद जटिल भी हो सकते हैं क्योंकि यह यौगिक का निर्माण करने वाले परमाणुओं की संख्या पर निर्भर करते हैं।

यौगिक के प्रकार (Type of Compound in hindi)

यौगिक के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:-

  • कार्बनिक यौगिक (organic compounds)
  • अकार्बनिक यौगिक (inorganic compound)
कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds)

कार्बनिक यौगिक वह पदार्थ होते हैं जिनका निर्माण कार्बन (Carbon), हाइड्रोजन (hydrogen), नाइट्रोजन (nitrogen) आदि तत्वों से मिलकर होता है। इनके बीच सह-संयोजक बंध पाए जाते हैं जो कार्बनिक विलियन में आसानी से घुलनशील हो जाते हैं। आसान भाषा में कहा जाए तो कार्बनिक यौगिक वास्तव में कार्बन युक्त यौगिक होते हैं जो लगभग सभी जीवित जीवों में पाए जाते हैं। यह सभी जैविक जीवों का प्रमुख घटक होते हैं जिसके कारण इन्हें डीएनए श्रंखला (DNA chain) एवं कार्बोहाइड्रेट (carbohydrates) में आसानी से देखा जा सकता है। यह आमतौर पर कार्बन एवं हाइड्रोजन के परमाणु से संयोजित होते हैं। इसके अलावा कार्बनिक यौगिक सल्फर (Sulphur) , ऑक्सीजन (oxygen), बोरोन (Boron), नाइट्रोजन (nitrogen), फास्फोरस (phosphorus) आदि के साथ भी संयोजित हो सकते हैं।

अकार्बनिक यौगिक (Inorganic Compound)

जिस यौगिक में कार्बन जैसे प्रमुख तत्वों की उपस्थिति नहीं होती है तो उन्हें अकार्बनिक यौगिक के नाम से जाना जाता है। यह विशेष रूप से ऑक्सीजन के साथ अन्य धातुओं जैसे लोहा (Iron), सोडियम (sodium), कॉपर (copper), कैल्शियम (calcium) आदि की सहायता से प्रतिक्रिया करते हैं। अकार्बनिक यौगिक विद्युत के सुचालक माने जाते हैं अर्थात इनमें बिजली का प्रवाह बेहतर ढंग से होता है। इसके अलावा इनकी आणविक संरचना बेहद सरल एवं सहज होती है तथा इनका अणुभार भी कम होता है।

यौगिक के उदाहरण (Examples of Compounds)

यौगिक के उदाहरण कुछ इस प्रकार हैं:-

  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
  • पानी (H2O)
  • नमक (NaCl)
  • सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4)
  • ग्लूकोज (C6H12O6) आदि।

यौगिक के गुण (Properties of Compounds)

यौगिक के गुण कुछ इस प्रकार हैं:-

  • रसायन विज्ञान के अनुसार यौगिकों का निर्माण प्रकाश, विद्युत, ऊष्मा आदि का अवशोषण या निष्कासन के द्वारा होता है।
  • प्रत्येक यौगिक शुद्ध एवं समांगी पदार्थ होते हैं।
  • यौगिक का निर्माण अलग-अलग प्रकार के परमाणुओं को एक निश्चित अनुपात में संयोजित करने के माध्यम से होता है।
  • यौगिक बेहद प्रबल बंधों के द्वारा जुड़े हुए रहते हैं जिसके कारण साधारण भौतिक विधियों से इसका विभाजन नहीं किया जा सकता है।
  • प्रत्येक यौगिक का एक निश्चित गलनांक एवं क्वथनांक होता है।
  • किसी भी यौगिक का गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से अलग होता है।

 

मिश्रण और यौगिक में अंतर (Difference Between Mixture and Compound in hindi)

मिश्रण और यौगिक में निम्नलिखित अंतर होते हैं:-

  • मिश्रण का निर्माण दो या दो से अधिक पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिलाने के द्वारा होता है जबकि यौगिक का निर्माण दो या दो से अधिक तत्व को एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग के माध्यम से किया जाता है।
  • मिश्रण का निर्माण एक भौतिक परिवर्तन कहलाता है जबकि यौगिक का निर्माण एक रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।
  • मिश्रण के अवयवों को एक उचित तापमान पर गर्म करके अलग-अलग किया जा सकता है जबकि यौगिक के अवयवों को किसी भी भौतिक विधि के द्वारा पृथक करना संभव नहीं होता है।
  • मिश्रण का संगठन परिवर्तनीय होता है जबकि यौगिक का संगठन सर्वदा स्थाई होता है।
  • मिश्रण में घटकों के गुणधर्म विद्यमान होते हैं जबकि यौगिक में घटकों के गुणधर्म सदैव भिन्न-भिन्न होते हैं।

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