भारत में चक्रवातों की उत्पत्ति

भारत में चक्रवात मुख्यतः बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं तथा पश्चिम से पूर्व की दिशा में गति करते हुए पूर्वी घाट से टकराते है। परिणामस्वरूप पूर्वी घाट में वर्षा तथा विनाश का कारण बनते हैं। सितंबर माह के अंत तक बंगाल की खाड़ी गरम हो जाती है। खाड़ी की ये ऊष्ण जल सतह… Keep Reading

मानसून का निवर्तन (लौटता मानसून)

21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं। 22 जून से सूर्य दक्षिणायन होना प्रारम्भ कर देता है। 23 सितंबर को सूर्य वापस विषुवत रेखा के ठीक ऊपर चमकता है। तथा 22 दिसंबर को सूर्य की लम्बवत किरणें मकर रेखा के ऊपर पड़ती हैं। इसके परिणाम स्वरूप पश्चिमोत्तर भारत में बना… Keep Reading

शीत ऋतु में होने वाली वर्षा

भारत में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा 20 दिसंबर से लेकर मार्च तक होती है। शीत ऋतु में मानसून के दो क्षेत्र है पहला पश्चिमोत्तर भारत के पहाड़ी एवं मैदानी भाग तथा तमिलनाडु का कोरोमण्डल तट। शीत ऋतु में वर्षा दो कारणों से होती है – पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पूर्वी मानसून 1. पश्चिमी विक्षोभ यह… Keep Reading

दक्षिण पश्चिम मानसून

21 मार्च को सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत चमकता है। उसके बाद धीरे-धीरे उत्तरायण होने लगता है तथा 21 जून तक कर्क रेखा के ऊपर पहुंच जाता है। इसके साथ साथ ITCZ (Inter Tropical Conversion Zone, अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) भी उत्तर की तरफ खिसकने लगता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में गर्मी बढ़ने लगती है।… Keep Reading

ग्रीष्म ऋतु में मौसम की क्रियाविधि

भारत में मानसून का सर्वाधिक भाग लगभग 90% दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है। जोकि भारत में जून माह में भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी क्रियाविधि को समझने के लिए मार्च से जून तक के मौसम को समझना आवश्यक है। 21 मार्च को सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत चमकता है।… Keep Reading

भारतीय जलवायु

भारत में उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पायी जाती है। भारतीय जलवायु में दो मुख्य विशेषताएँ हैं – उष्णकटिबंधीय मानसूनी इन दोनों विशेषताओं का भारतीय मानसून पर विशेष प्रभाव पड़ता है। भारतीय जलवायु को समझने के लिए इन दोनों विशेषताओं को समझना आवश्यक है। आइये इन दशाओं (Conditions) का विस्तृत अध्ययन करें- भारत की जलवायु 1. उष्णकटिबंधीय जलवायु… Keep Reading

भारत में पायी जाने वाली भूगर्भिक चट्टानें

भारत में पायी जाने वाली भूगर्भिक चट्टानें :- धरातल के नीचे पायी जाने वाली चट्टानों को भूगर्भिक संरचना कहा जाता है। पृथ्वी के ठंडा होने से अब तक 6 प्रकार की चट्टानों का निर्माण हुआ है। इनका निर्माण अलग-अलग समय काल हुआ है। भारत के अलग-अलग भाग में अलग-अलग प्रकार की चट्टानें पायी जाती हैं।… Keep Reading

भारत के महत्वपूर्ण स्टील प्लांट

भारत के महत्वपूर्ण स्टील प्लांट :- भारत में वर्तमान समय में 600 से अधिक स्टील प्लांट हैं। इन सभी में छोटे-बड़े स्तर पर स्टील निर्माण का कार्य हो रहा है। भारत के प्रमुख शुरुआती स्टील प्लांट जिनका निर्माण भारत ने अन्य देशों की सहायता से किया है जिनका विवरण निम्नवत हैं, वर्तमान में भी ये उत्पादन… Keep Reading

भारत के प्रमुख खनिज, उनकी खानें एवं राज्य

भारत के प्रमुख खनिज, उनकी खानें एवं राज्य:- भारत में पाये जाने वाले प्रमुख खनिज, उनकी खानें एवं राज्य यहाँ दिए गए हैं। भारत में मुख्य रूप में लोहा, कोयला, मैंगनीज, तांबा, सोना एवं बाक्साइट आदि खनिज पाये जाते है । इन सभी खनिजों की प्रमुख खाना का विवरण नीचे दिया गया है। Mineral resources… Keep Reading

चट्टानों के प्रकार

चट्टानों के प्रकार:- चट्टान मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं – आग्नेय, अवसादी एवं कायांतरित। Types of rocks in Hindi Notes for UPSC and PCS. चट्टान या शैल (रॉक) किसे कहते हैं ? पृथ्वी की सतह के कठोर भाग को चट्टान या शैल कहते है। इसे उत्पत्ति के आधार पर तीन प्रकार में बाँटा गया… Keep Reading

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