बंगाल का इतिहास

बंगाल का इतिहास

बंगाल का इतिहास: बंगाल का इतिहास यूँ तो सोलहवीं शताब्‍दी में मुगल काल के प्रारम्भ होने से भी पुराना है। जहाँ पर अनेक मुस्लिम राजाओं, सुल्तानों और बंगाल के नवाबों ने शासन किया। इन्हीं से जुड़े प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं उन्हीं को ध्यान में रखकर बंगाल के इतिहास की जानकारी यहाँ दी गयी है।

बंगाल के नवाब

मुर्शिद कुली खां (1700-1727 ई०)

  • औरंगजेब ने 1700 ई० में मुर्शिद कुली खां(पहले हिन्दु ब्राह्मण था) को बंगाल का दीवान बनाया था।
  • 1707 ई० में औरंगजेब की मृत्य के बाद मुर्शिद कुली खां एवं अजीमुश्शान (औरंगजेब का पोता) के बीच विवाद शुरू हो गया। इस विवाद के चलते मुर्शिद कुली खां ने अपनी राजधानी को ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित कर लिया। इसके साथ ही इसने मुगल सल्तनत को दिया जाने वाला वार्षिक कर भी बन्द कर दिया।
  • इसके समय में तीन प्रमुख विद्रोह हुए थे –
    • उदय नारायण, सीता नारायण का विद्रोह।
    • सुजाद खां का विद्रोह।
    • नजाद खां का विद्रोह।
  • 1717 ई० में मुगल बादशाह फारूखशियर ने इसे बंगाल का सुबेदार बना दिया।
  • 1719 ई० में उड़ीसा को बंगाल में मिला दिया एवं उड़ीसा की दीवानी भी मुर्शिद कुली खां के अंतर्गत आ गयी।
  • मुर्शिद कुली खां इजारेदारी प्रथा का जनक था। इस प्रथा के अन्तर्गत किसानों को उनकी आय बढ़ाने हेतु ऋण दिया जाता था।
  • इसी के काल से बंगाल में शासन की वंशानुगत प्रथा की शुरुआत हुयी।

शुजा उद्दीन-मोहम्मद-खान (1727-1739 ई०)

  • मुर्शिद कुली खां की 1727 ई० में मृत्यु के बाद इसका दामाद शुजा उद्दीन-मोहम्मद-खान बंगाल का नवाब बना। ये पहले उड़ीसा का उप-सूबेदार था।
  • वर्ष 1732 ई० में बिहार को भी बंगाल में मिला दिया गया।
  • इसने 1732 ई० में अलीवर्दी खां को बिहार का उप-सूबेदार बनाया। आगे चलकर यही शुजा उद्दीन-मोहम्मद-खान की सबसे बड़ी गलती साबित हुयी।

सरफराज खान (1739-1740 ई०)

  • शुजा उद्दीन-मोहम्मद-खान की 1739 ई० में मृत्यु के बाद उसका पुत्र सरफराज खान अगला नवाब बना।
  • इसने हैदरजंग (आलम-उद्दौला-हैदरगंज) की उपाधी धारण की थी।
  • सरफराज खान एक अयोग्य और कमजोर शासक था।
  • 1740 ई० में बंगाल के उप-सूबेदार अलीवर्दी खां ने अपने सहयोगी हाजी अहमद और जगत सेठ की सहायता से विद्रोह किया।
  • 1740 ई० में ही सरफराज और अलीवर्दी खां के मध्य हुए गिरिया के युद्ध में सरफराज खान पराजित हुआ और उसकी मृत्यु हो गयी।

अलीवर्दी खां (1740-1756 ई०)

  • गिरिया के युद्ध के बाद 1740 ई० में अलीवर्दी खां बंगाल का अगला नवाब बना।
  • बंगाल का नवाब बनते ही इसने “मिर्ज़ा मुहम्मद ख़ाँ” की उपाधी धारण की।
  • अलीवर्दी खां ने 2 करोड़ रूपये का नजराना तत्कालीन मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला को भेजा था। इसके ऐवज में मुगल बादशाह ने अलवीवर्दी खां को बंगाल का नवाब स्वीकृत करने का घोषणा पत्र जारी किया।
  • अलीवर्दी खां बंगाल का प्रथम नवाब था जिसे मुगलों के द्वारा आधिकारिक रूप से बंगाल का प्रथम नवाब घोषित किया गया था।
  • इसके शासनकाल में 1740-1751 ई० तक हर वर्ष मराठों से इसका संघर्ष चलता रहा, जिसमें अलीवर्दी खां को अच्छी-खासी हानि पहुँची। अंततः 1751 ई० में मराठों के साथ शांति संधि कर ली, जसके अंतर्गत-
    • अलीवर्दी खां हर वर्ष मराठों को 12 लाख रूपये चौथ कर के रूप में देगा।
    • उड़ीसा, मराठों को सौंप दिया जाएगा।
  • इसने अपने शासन काल में अंग्रेजों को बंगाल में व्यापार करने का अधिकार दो दिया, परन्तु किलेबंदी और सेना रखने का अधिकार नहीं दिया था।
  • अलीवर्दी खां का कोई भी पुत्र नहीं था। अपने जीवन काल में ही इसने अपनी सबसे छोटी बेटी के पुत्र सिराजुद्दौला को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया था।

सिराजुद्दौला (1756-1757 ई०)

  • अलीवर्दी खां की मृत्यु के उपरान्त 23 वर्ष की आयु में सिराजुद्दौला बंगाल का अगला नवाब बना।
  • सिराजुद्दौला के नवाब बनते ही उसका विरोध होना शुरू हो गया, विरोध करने वालों में मुख्यतः 2 गुट थे –
    • अलीवर्दी खां की बड़ी पुत्री घसीटी बेगम जिसका विवाह ढाका के नवाब से हुआ था, जो स्वंय बंगाल की नवाब बनना चाहती थी। इसके सहयोग में इसके दो दीवान राजबल्लभ और कृष्णबल्लभ थे।
    • अलीवर्दी खां की दूसरी पुत्री का पुत्र (जिसका विवाह पूर्णिया के नवाब से हुआ था) का पुत्र शौकतजंग।
  • इस विद्रोह के चलते 1756 ई० में मनिहारी का युद्ध सिराजुद्दौला और शौकतजंग के मध्य हुआ, जिसमें सिराजुद्दौला की जीत हुई और शौकतजंग की मृत्यु हो गयी।
  • इसी समय काल में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य सप्तवर्षीय युद्ध चल रहा था। इसी युद्ध के दौरान दोनों ने ही अपनी कम्पनियों की किले बंदी करना प्रारम्भ कर दिया।
  • सिराजुद्दौला ने इस किले बंदी का विरोध किया, और इसे तत्काल रोकने का आदेश जारी किया। जिसके परिणाम स्वरूप फ्रांसीसी कम्पनी ने तो किलेबंदी रोक दी, परन्तु अंग्रेजी कम्पनी ने किले बंदी रोकने से इनकार कर दिया।
  • इसके साथ ही अंग्रेजी कम्पनी 1717 ई० में मुगल बादशाह फारूखशियर द्वारा दिए गए फरमान “दसतक” का भी गलत इस्तेमाल कर रही थे।
  • बंगाल में किलेबंदी करना और “दसतक” का गलत उपयोग ही, आगे चलकर प्लासी के युद्ध का मुख्य कारण बना।

 

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