शिक्षित गरीबी क्या है

शिक्षित गरीबी क्या है ? भारत में शिक्षित गरीबी का कारण बनता है

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गरीबी क्या है ? – what is poverty in hindi

गरीबी क्या है परिभाषा – गरीबी वह सामाजिक क्रिया है जिसमें समाज का एक हिस्सा अपने जीवन की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता एवं न्यूनतम स्तर पर भी जीवन को निर्वाह नहीं कर पाता। गरीबी वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है। समाज में गरीबी का आशय लोगों के जीवन निर्वाह के निम्न स्तर से लगाया जाता है। आम भाषा में कहा जाए तो एक निर्धन व्यक्ति सामाजिक रूप से गरीब होता है और गरीबी के दलदल में फंसे व्यक्तियों को भरपेट एवं संतुलित भोजन नहीं मिल पाता जिसके कारण उसका शरीर कमजोर एवं बीमारियों से घिरा हुआ रहता है। गरीब व्यक्ति अपने एवं अपने परिवार का विकास नहीं कर पाता जिसके कारण वह सामाजिक दौड़ में पीछे रह जाता है।

गरीबी के प्रकार

सामाजिक दृष्टि से देखा जाए तो गरीबी के दो रूप होते हैं :-

  • सापेक्ष गरीबी
  • निरपेक्ष गरीबी

सापेक्ष गरीबी

जो देश दूसरे देशों की तुलना में अधिक निर्धन होते हैं या जिस देश के या वर्ग के लोगों का जीवन निर्वाह करने का स्तर अन्य देशों की तुलना में नीचे होता है उन्हें सापेक्ष रुप से गरीब कहा जाता है। यू.एन.ओ. की रिपोर्ट के अनुसार, उन देशों को सापेक्ष रूप से निर्धन या गरीब माना जाता है जिनकी प्रति व्यक्ति कुल आय प्रतिदिन $ 1 से कम होती है। भारत की प्रति व्यक्ति आय $ 330 प्रति वर्ष के लगभग है, इसलिए भारत को निर्धन देशों की सूची में निचला स्थान प्राप्त है।

निरपेक्ष गरीबी

निरपेक्ष गरीबी की दृष्टि से उन लोगों को गरीब माना जाता है जिनका जीवन निर्वाह का स्तर इतना नीचे होता है कि वह अपने जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाते। जो व्यक्ति अपने शरीर के न्यूनतम पोषक आहार को पूरा करने में भी असमर्थ होते हैं उन्हें निरपेक्ष गरीबी की सूची में रखा जाता है।

शिक्षित गरीबी क्या होती है ?

शिक्षित गरीबी से अर्थ ऐसी गरीबी से होता है जिसमें व्यक्ति अशिक्षा के कारण गरीब नहीं बल्कि शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगार रहने के कारण गरीब होता है, व्यक्ति शिक्षा और डिग्री तो प्राप्त कर लेता है लेकिन कोई भी हुनर न सीख पाने के कारण बेरोजगार ही रह जाता है जिस कारण वह गरीब ही रहता है और अपना पालन-पोषण करने में भी सक्षम नहीं होता है। शिक्षित गरीबी भावनात्मक एवं सामाजिक विकास पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डालती है।

भारत में शिक्षित गरीबी का कारण बनता है

भारत की गिनती उन शीर्ष 5 देशों में की जाती है जिन देशों में विश्वविद्यालयों में जाने वाले छात्रों की संख्या सर्वाधिक है लेकिन योग्यतापरक और हुनरमंद शिक्षा के अभाव के कारण स्वरोजगार सृजन करने में असमर्थ होते हैं और नौकरी के लिए सरकारी अथवा निजी क्षेत्र पर निर्भर होते हैं एवं नौकरियों की कमी के कारण बेरोजगार ही रह जाते हैं। अधिक जनसँख्या, निम्न स्तरीय शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा के दौरान स्किल रिलेटेड शिक्षा का न मिलना आदि भारत में शिक्षित गरीबी का प्रमुख कारण हैं।

जनसंख्या

भारत एक बड़ी आबादी वाला देश है जहां अधिक जनसंख्या के कारण देश की अर्थव्यवस्था के चलते प्रत्येक व्यक्तियों की शिक्षा संबंधी मांगे पूरी नहीं हो पाती। भारत में हर वर्ष लाखों युवा ग्रेजुएट होकर रोजगार के लिए निकलते हैं परंतु उन्हें आसानी से नौकरी नहीं मिल पाती जिसके कारण शिक्षित गरीबी की समस्या में वृद्धि होती है।

निम्न स्तरीय शिक्षण संस्थान

भारत की शिक्षण पद्धति अन्य देशों के मुकाबले बेहद कमजोर है। भारत में विद्यार्थियों को पुराने पाठ्यक्रम को पढ़ने एवं ग्रेड प्राप्त करने हेतु प्रशिक्षित किया जाता है जिसके कारण विद्यार्थी अपने शिक्षण संस्थानों में दिए गए पाठ्यक्रम को केवल रटते हैं एवं शिक्षा के मुख्य उद्देश्य से भटक जाते हैं। इस प्रकार की शिक्षा पद्धति हमारे भारत देश की उन्नति के लिए पर्याप्त नहीं है। युवा ऐसी शिक्षा से एग्जाम तो पास कर लेते हैं और डिग्री भी प्राप्त कर लेते हैं लेकिन रोजगार सृजन करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं वह नौकरी के लिए दूसरों पर ही निर्भर रहते हैं और बेरोजगार रह जाते हैं।

महिलाओं का सशक्त ना होना

भारत में अधिकतर महिलाएं शिक्षा पूरी होने के बाद मुख्य रूप से विवाह की संभावनाओं एवं अन्य पारिवारिक अपेक्षाओं को पूरा करने में लग जाती हैं एवं नौकरी करने का विचार छोड़ देती हैं। पारिवारिक दबाव या अन्य समस्याओं के कारण ज्यादातर महिलाएं भविष्य में मिलने वाले अच्छे अवसरों का विचार छोड़ देते हैं जो शिक्षित गरीबी का एक कारण माना जाता है।

पढ़ें — भारत में बढ़ती गरीबी एवं बेरोजगारी के मुख्य कारण

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