रेडियोधर्मी प्रदूषण क्या है - प्रदूषण के प्रकार, स्रोत, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपाय

रेडियोधर्मी प्रदूषण क्या है – प्रदूषण के प्रकार, स्रोत, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपाय

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रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution) क्या है

जब वायुमंडल में रेडियोधर्मी पदार्थों का उत्सर्जन अधिक मात्रा में होने लगता है तो उसको रेडियोधर्मी प्रदूषण के नाम से जाना जाता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण का प्रभाव जीव-जंतुओं, पर्यावरण, मानव, जलीय जीवों आदि पर पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, रेडियोधर्मी प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए इतना हानिकारक होता है कि इसके कारण लोगों की मृत्यु भी हो सकती है। रेडियोधर्मी प्रदूषण अन्य प्रदूषणों की तुलना में अधिक हानिकारक होता है क्योंकि इसका प्रभाव वायुमंडल में लंबे समय तक रहता है।

वैज्ञानिक भाषा में रेडियोधर्मी प्रदूषण को नाभिकीय प्रदूषण भी कहा जाता है। इसमें मौजूद पदार्थ के कण बेहद सूक्ष्म रूप में होते हैं जो सैकड़ों वर्षों तक वातावरण को प्रदूषित करते रहते हैं। रेडियोधर्मी पदार्थों से विकिरण होने वाली किरणें बेहद प्रभावशील एवं विनाशकारी होती हैं।

रेडियोधर्मी प्रदूषण के प्रकार (types of radioactive pollution in hindi)

रेडियोधर्मी पदार्थों के विघटन में दो प्रकार के विकिरण का उत्सर्जन होता है पहला कणिकीय विकिरण एवं दूसरा विद्युत चुम्बकीय विकिरण। इनमें परमाणु के एक या एक से अधिक प्रकार होते हैं जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन आदि।

कणिकीय विकिरण

वातावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों के कणों के अत्यधिक मात्रा में उत्सर्जन होने वाले प्रदूषण को कणिकीय प्रदूषण के नाम से जाना जाता है। यह वे सूक्ष्म कण होते हैं जो वायुमंडल में लम्बे समय तक मौजूद रहकर प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

विद्युत चुम्बकीय विकिरण

जब किसी आवेशित कण के वेग में बदलाव की स्थिति उत्पन्न होती है तब विद्युत चुंबकीय विकिरण की उत्पत्ति होती है। यह वे स्वयं-प्रसारित तरंगे होती हैं जिन्हें प्रकाश भी कहा जाता है परंतु यह प्रकाश वास्तव में विद्युत चुंबकीय विकिरण का केवल एक सूक्ष्म भाग है। विद्युत चुंबकीय विकिरण से उत्सर्जित होने वाली तरंगों की गति प्रकाश की गति के अनुरूप होती है। विद्युत चुम्बकीय विकिरण प्रदूषण का मुख्य कारण उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल को माना जाता है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत

रेडियोधर्मी प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोत माने जाते हैं पहला प्राकृतिक प्रक्रियाएं एवं दूसरा मानवीय क्रियाएं। रेडियोधर्मी प्रदूषण का प्रभाव अत्यंत विनाशकारी होता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण कई जानलेवा बीमारियां जैसे रक्त कैंसर, त्वचा कैंसर, अस्थि कैंसर एवं टीवी जैसी जानलेवा बीमारी होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

प्राकृतिक स्रोत

प्राकृतिक स्रोत में वे किरणें शामिल हैं जो सीधा अंतरिक्ष से पृथ्वी की सतह पर पहुंचती हैं। यह किरणें बेहद प्रभावशाली होती हैं जिनका पर्यावरण पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है। इन किरणों के कारण पृथ्वी पर जीव-जंतु, पेड़-पौधे, जलीय जीव एवं मानव जाति बेहद नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। इसके अलावा पृथ्वी पर मौजूद चट्टानों में पाए जाने वाले रेडियोधर्मी तत्वों के कारण भी रेडियोधर्मी प्रदूषण होता है। इनमें यूरेनियम, थोरियम, रेडियम आदि जैसे तत्व पाए जाते हैं जो निरंतर रेडियोधर्मी विकिरण को वातावरण में छोड़ते रहते हैं।

मानवीय क्रियाएं

मानवी क्रियाओं का मुख्य स्रोत परमाणु विस्फोट एवं अन्य रेडिएशन के स्रोतों को माना जाता है। यह मानव निर्मित स्त्रोत होते हैं जो पूर्णतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं। विश्व के लगभग सभी देश परमाणु संपन्न देश बनने के लिए अक्सर परमाणु परीक्षण करते रहते हैं जिसके कारण पृथ्वी के वायुमंडल में रेडियोधर्मी प्रदूषण की मात्रा तीव्र गति से बढ़ने लगी है। इसके अलावा नाभिकीय रिएक्टर में रिसाव व उस से निकलने वाले कचरे, रेडियोधर्मी अयस्कों के खनन, परमाणु हथियारों के निर्माण, परमाणु से बने इंधन के प्रयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, एवं एक्स-रे किरणों के कारण रेडियोधर्मी प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है जिसका पृथ्वी के वातावरण एवं संपूर्ण मानव जाति पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण के प्रभाव (effects of radioactive pollution in hindi)

  • रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण में वृद्धि होती है। रेडियोधर्मी प्रदूषण के संपर्क में आने वाले हर जीव-जंतुओं की जीवन प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण का प्रभाव काफी लंबे समय तक रहता है जिसके कारण पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं एवं मनुष्यों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इस प्रदूषण के कारण लगभग हर वर्ष पृथ्वी पर मृत्यु के दर में वृद्धि देखी गई है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण पृथ्वी पर रह रहे लगभग सभी प्राणियों के गुणसूत्रों में परिवर्तन होने लगता है जिसके कारण उनकी पीढ़ियां विकलांगता एवं अनुवांशिक रोग का शिकार हो जाती हैं। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि रेडियोधर्मी प्रदूषण का प्रभाव कई वर्षों तक रहता है तथा इसी के कारण सभी प्राणियों को कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी रोगों से गुजर में पड़ता है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण के प्रभाव से गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु भी हो सकती है। रेडियोधर्मी प्रदूषण का परिणाम इतना भयावह होता है कि इससे गर्भस्थ शिशु शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण पृथ्वी पर मौजूद पेड़ पौधों की पत्तियां तक प्रभावित हो सकती हैं। इसके कारण पेड़ पौधे दूषित हो जाते हैं जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है। दरअसल, रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण पेड़ पौधों की पत्तियां आपस में चिपक जाती हैं जिसके कारण इन पत्तियों को आहार के रूप में खाने वाले पशुओं के शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण मृदा दूषित हो जाती है जिसके कारण कृषिकों की आय पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। दरअसल यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व का विनाश कर उसे विषैला बना देता है जिसके कारण मिट्टी बंजर हो जाती है। यही कारण है कि यह किसानों की फसल को नुकसान पहुंचता है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण के नियंत्रण के उपाय (रेडियोधर्मी प्रदूषण के उपाय)

  • रेडियोधर्मी प्रदूषण की रोकथाम के लिए रेडियोधर्मी सामग्री के रिसाव होने की संभावना पर ध्यान देना चाहिए ताकि इससे पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके। रेडियोधर्मी तत्वों को संग्रहित कर इसे सुरक्षा पूर्ण तरीके से उपयोग करना चाहिए।
  • विश्व में मौजूद सभी देशों को परमाणु निर्मित हत्यारों के उत्पादन तथा परीक्षण पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, जिससे पर्यावरण को रेडियोधर्मी प्रदूषण से बचाया जा सके। कई देश परमाणु शक्ति को पाने के लिए विभिन्न प्रकार के हानिकारक परीक्षण करते हैं जिसके कारण रेडियोधर्मी प्रदूषण में वृद्धि होती है। विश्व के सभी देशों को एकजुट होकर परमाणु हथियारों के उत्पादन को रोकना चाहिए।
  • वर्तमान समय में कई देश परमाणु ऊर्जा का अधिक प्रयोग करते हैं जिसके फल स्वरूप रेडियोधर्मी प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है। सभी देशों को परमाणु ऊर्जा का सीमित प्रयोग करना चाहिए जिससे पृथ्वी के वायुमंडल की सुरक्षा की जा सके।
  • विश्व भर में रेडियोधर्मी कचरे में विकिरण का स्तर बढ़ता जा रहा है क्योंकि कई देश आज भी इसका प्रबंधन सामान्य कचरे की तरह करते हैं। ऐसा ना करके रेडियोधर्मी कचरे को मोटे एवं ठोस पात्र में संग्रहित करना चाहिए जिससे रेडियोधर्मी प्रदूषण से पृथ्वी को बचाया जा सके। इसके अलावा परमाणु कचरे का पुनर्प्रयोग (Reuse) किया जाना चाहिए जिससे परमाणु शक्ति को संग्रहित करने में सहायता होगी।
  • विश्व भर के देशों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में दुर्घटना के विरुद्ध विशेष सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिससे पर्यावरण में रेडियोधर्मी प्रदूषण की मात्रा को कम किया जा सके।
  • सभी देशों को परमाणु विस्फोट पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिससे मानव जाति को रेडियोधर्मी खतरे से बचाया जा सके।

रेडियोधर्मी पदार्थ के नाम

सन 1898 में क्यूरी दंपति ने कठोर परिश्रम कर 30 टन पिथ ब्लेंडी नामक पदार्थ की कई रासायनिक अभिक्रियाएं की जिसके फलस्वरूप उन्हें विभिन्न प्रकार के तत्व प्राप्त हुए। इसके साथ ही उन्होंने एक नए रेडियोएक्टिव पदार्थ की खोज की जो उस समय की एक बड़ी खोज थी। इनमें यूरेनियम, पोलोनियम, एक्टिनियम, रेडियम, थोरियम आदि रेडियो एक्टिव पदार्थ मौजूद थे जिन्हें रेडियोधर्मी पदार्थों के नाम से भी जाना जाता है।

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