हेपेटाइटिस बी और एड्स में क्या अंतर है

हेपेटाइटिस बी और एड्स में क्या अंतर है

हेपेटाइटिस बी और एड्स में क्या अंतर है (एचआईवी और हेपेटाइटिस बी के बीच का अंतर) : हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) क्या होता है, हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) के लक्षण एवं बचाव, एड्स क्या होता है (AIDS- Acquired Immune Deficiency Syndrome), एड्स के लक्षण एवं बचाव आदि प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।

हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) क्या होता है

हेपेटाइटिस बी एक संक्रमणकारी रोग है जो शरीर में रक्त के माध्यम से फैलता है। हेपेटाइटिस बी एक वायरस के कारण होता है जो मुख्य रूप से लिवर के अंदर संक्रमण पैदा करता है। यह लिवर को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाता है। यह संक्रमण मनुष्य के साथ-साथ बंदरों की प्रजाति के लिवर को भी संक्रमित कर सकता है। हेपेटाइटिस बी के कारण लिवर में सूजन एवं जलन की समस्या उत्पन्न होती है। वर्तमान समय में विश्व की कुल जनसंख्या के एक तिहाई लोग हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। यह रक्त के माध्यम से, असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से एवं किसी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा उपयोग की गई सुई के कारण फैल सकता है। यह संक्रमण नवजात शिशु पर अधिक प्रभावशाली होता है। कुछ वयस्क लोग हेपेटाइटिस बी के संक्रमण से आसानी से मुक्त हो जाते हैं परंतु कम उम्र के बच्चे या कुछ वयस्क लोगों को इस वायरस से आसानी से छुटकारा नहीं मिल पाता जिसके कारण यह संक्रमण चिरकालिक (Chronic) संक्रमण का रूप धारण कर लेता है।

हेपेटाइटिस बी बेहद खतरनाक होता है क्योंकि या एक शांत संक्रमण होता है जिसकी जानकारी संक्रमित व्यक्तियों को देरी से मिलती है। विश्व में अधिकांश लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं परंतु उन्हें इस संक्रमण का आभास नहीं हो पाता है। हेपेटाइटिस बी से लिवर कैंसर होने की संभावना होती है। यह वायरस कई वर्षों तक अविरत रूप से लीवर पर हमला करता रहता है जिसकी जानकारी मरीज को काफी समय बाद मिलती है।

हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) के लक्षण

हेपेटाइटिस बी एक संक्रमित बीमारी है जिसके लक्षण को पहचान पाना आसान नहीं होता है। शुरुआती दौर में हेपेटाइटिस बी संक्रमित मरीजों को थकान महसूस होना, भूख ना लगना, पेट दर्द, सिर दर्द, आंखों में पीलापन होना, जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द की समस्या होना, पेशाब का रंग गाढ़ा होना एवं उल्टी आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस संक्रमण के कारण रोटी का लीवर संक्रमित हो जाता है जिसके कारण उसमें सूजन आ जाती है। शरीर में हेपेटाइटिस बी बढ़ जाने के कारण लिवर काम करना बंद कर देता है जिससे मरीज की मृत्यु तक हो सकती है। हेपेटाइटिस बी का संक्रमण इतना प्रभावशाली होता है कि वह आसानी से खत्म नहीं होता और शरीर में तेजी से बढ़ता रहता है। यह संक्रमण इतना शक्तिशाली होता है कि वह शरीर के बाहर भी कई महीनों तक जीवित रह सकता है।

हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) से बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हेपेटाइटिस बी से बचाव करने के कई तरीके होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:-

  • सुरक्षित यौन संबंध बनाने से हेपेटाइटिस बी से बचाव किया जा सकता है।
  • दूसरों के इस्तेमाल की गई सूईंयों का प्रयोग करने से बचाव करके।
  • संक्रमित व्यक्ति के रक्त के सीधे संपर्क में आने से बचाव करके।
  • नवजात शिशुओं के जन्म के तुरंत बाद एवं छठे महीने से 18 वें महीने के बीच टीकाकरण करके इसका बचाव किया जा सकता है।
  • यदि किसी गर्भवती महिला को हेपेटाइटिस बी संक्रमण है तो ऐसी स्थिति में बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 12 घंटों के भीतर इससे संबंधित टीकाकरण करके बचाव किया जा सकता है।
  • हेपेटाइटिस बी वैक्सीन संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावशाली तरीका माना जाता है।

एड्स क्या होता है (AIDS- Acquired Immune Deficiency Syndrome)

एड्स वह खतरनाक संक्रमण होता है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर या विफल कर देता है। वर्तमान समय में एड्स विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एवं रक्त के आदान-प्रदान करने से होता है। इसके अलावा यह संक्रमण मां के द्वारा शिशु को भी संक्रमित कर सकता है। एड्स कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक संक्रमण है जो मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को क्षीर्ण कर देता है। यह मुख्य रूप से शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले कोशिकाओं को प्रभावित करता है एवं उन्हें धीरे-धीरे नष्ट कर देता है जिससे रोगी की प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एड्स संक्रमित व्यक्तियों का शरीर 6 से 10 वर्ष तक सामान्य प्रतीत होता है। इसके पश्चात शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता है। यह एक लाइलाज बीमारी होती है जो दूसरों को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।

एड्स के लक्षण

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एड्स के निम्नलिखित लक्षण होते हैं:-

  • बार-बार बुखार आना
  • थकावट महसूस होना
  • सूखी खांसी होना
  • तेजी से वजन का घटना
  • शरीर में दर्द की शिकायत रहना
  • त्वचा पर दाग धब्बे पड़ना
  • याददाश्त का कमजोर होना

एड्स से बचाव

एड्स से बचाव करने के निम्नलिखित तरीके होते हैं:-

  • जीवन-साथी के प्रति वफादार रहकर किसी अन्य से यौन संबंध ना बनायें।
  • यौन संबंध बनाने के समय निरोध (कंडोम) का उपयोग करके।
  • किसी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सुई का प्रयोग ना करें।
  • सूई एवं अन्य चिकित्सीय उपकरणों को कम से कम 20 मिनट पानी में उबालकर उसे जीवाणु रहित करके ही उपयोग में लें।
  • तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अनजान व्यक्ति से रक्त ना लें एवं सुरक्षित रक्त के लिए केवल एच आई वी की पूरी जांच किए हुए रक्त को ही ग्रहण करें।

हेपेटाइटिस बी एवं एड्स में अंतर

हेपेटाइटिस बी और एड्स में निम्नलिखित अंतर होते हैं:-

  • हेपेटाइटिस बी मुख्य रूप से रोगी के लीवर को प्रभावित करता है जबकि एड्स मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है।
  • हेपेटाइटिस बी के संक्रमण को खत्म किया जा सकता है परंतु एड्स संक्रमण को खत्म नहीं किया जा सकता।
  • हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण उपलब्ध है अतः इससे टीके लगवा कर बचाव किया जा सकता है जबकि एड्स का बचावी टीकाकरण मौजूद नहीं है।
  • हेपेटाइटिस बी एड्स संक्रमण से लगभग 100 गुना अधिक संक्रमित करने की क्षमता रखता है।

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