साबुन और अपमार्जक में अंतर (soap and detergent)

साबुन और अपमार्जक में अंतर (soap and detergent)

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साबुन क्या है

उच्च अणुभार वाले संतृप्त या असंतृप्त बड़ी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों अथवा पोटैशियम लवणों के मिश्रण को साबुन कहा जाता है। साबुन को मुख्य रूप से वनस्पति तेल, वसा, कास्टिक पोटाश एवं कास्टिक सोडा के जलीय मिश्रण को एक उचित तापमान पर गर्म करके रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से साबुन का निर्माण किया जाता है। साबुन ग्लिसरॉल मुक्त होता है। साबुन एक ऐसा पदार्थ होता है जो पानी में घुलकर एक प्रकार का झाग उत्पन्न करता है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के सफाई कार्यों में किया जाता है। साबुन में कई प्रकार के फैटी एसिड के साथ-साथ सोडियम एवं पोटैशियम आदि के लवण की भी उपस्थिति होती है। इसके अलावा साबुन में तेल, वसा, लाई एवं पानी जैसे जरूरी तत्वों का मिश्रण भी होता है।

साबुन की विशेषताएं

साबुन की विशेषताएं कुछ इस प्रकार हैं:-

  • साबुन में नमी की उपस्थिति 10% से अधिक नहीं होती है।
  • साबुन अल्कोहल में आसानी से विलेय हो जाता है।
  • इसमें क्षार की उपस्थिति नहीं होती है क्योंकि क्षार त्वचा एवं वस्त्रों को नुकसान पहुंचाता है।
  • साबुन में जीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है जिसके कारण इसे सावधानीपूर्वक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • एक अच्छे साबुन में मुख्य रूप से कीटाणुनाशक पदार्थ पाए जाते हैं।
  • साबुन का निर्माण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि साबुन मुलायम एवं चिकना रहे क्योंकि खुरदुरा साबुन त्वचा को कई प्रकार से हानि पहुंचा सकता है।

साबुन (Soap) के प्रयोग

साबुन का उपयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है:-

  • साबुन का प्रयोग विभिन्न प्रकार के संक्रमण को खत्म करने के लिए किया जा सकता है। स्नान करते समय साबुन का उपयोग करने से शरीर के लगभग सभी जीवाणुओं को बाह्य रूप से खत्म करने में आसानी होती है।
  • साबुन का उपयोग नहाने के अलावा कपड़े की सफाई करने के लिए भी किया जाता है। यह कपड़ों से गंदगी को दूर करके उसे साफ एवं स्वच्छ रखता है। इसके अलावा साबुन का उपयोग करने से कपड़ों से कीटाणुओं को भी आसानी से समाप्त किया जा सकता है।
  • साबुन का प्रयोग घर की साफ सफाई करने के लिए किया जाता है। यह घर की दीवारों एवं फर्श को स्वच्छ रखता है। इसके अलावा साबुन का उपयोग पुराने मकानों में जल रिसाव को रोकने के लिए भी किया जाता है।
  • साबुन का उपयोग चेहरा धोने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि किसी विशेष प्रकार के साबुन से चेहरे को धोने से चेहरे की रंगत में सुधार आता है। केवल इतना ही नहीं साबुन का उपयोग दाढ़ी बनाने एवं हाथ धोने जैसे कार्यों में भी किया जाता है।

अपमार्जक (Detergent) क्या है

अपमार्जक वह कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिसका उपयोग मुख्य रूप से कपड़े धोने एवं घर की साफ सफाई के लिए किया जाता है। अपमार्जक का शाब्दिक अर्थ साफ करने वाला पदार्थ होता है। यह कठोर एवं द्रव दोनों ही अवस्था में मौजूद हो सकता है। अपमार्जक को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है पहला टिकिया अपमार्जक एवं दूसरा पाउडर अपमार्जक। टिकिया अपमार्जक का इस्तेमाल मुख्य रूप से हाथों से कपड़े धोने के लिए किया जाता है जबकि पाउडर अपमार्जक का प्रयोग आधुनिक मशीनों द्वारा कपड़े एवं फर्श की साफ सफाई करने हेतु किया जाता है। अपमार्जक एक जटिल पदार्थ होता है जिसमें सोडियम, कार्बन, मैग्नीशियम, कैल्शियम आदि तत्वों का मिश्रण होता है। साबुन की तरह ही अपमार्जक को भी बाह्य रूप से इस्तेमाल में लाया जाता है।

अपमार्जक की विशेषताएं

अपमार्जक की विशेषताएं कुछ इस प्रकार हैं:-

  • अपमार्जक तेल रहित होते हैं अर्थात इनमें तेल के गुण नहीं पाए जाते।
  • अपमार्जक कठोर एवं तरल दोनों प्रकार से जल में आसानी से घुलनशील हो सकते हैं।
  • इनका जलीय विलयन उदासीन होता है एवं यह जल में घुलकर अधिक मात्रा में झाग को उत्पन्न करते हैं जिससे साफ सफाई के कार्य बेहतर ढंग से होते हैं।
  • अपमार्जक कपड़ों को बिना किसी नुकसान पहुंचाए हुए आसानी से कपड़ों के कोमल रेशों की सफाई कर सकते हैं।
  • अपमार्जक वह कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिसमें साबुन की तरह ही मैल साफ करने वाले विशेष गुण पाए जाते हैं।

अपमार्जक के प्रयोग

अपमार्जक का प्रयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है:-

  • अपमार्जक का उपयोग मुख्य रूप से घर की वस्तु, कपड़े, फर्श आदि को साफ करने में किया जाता है।
  • अपमार्जक का उपयोग आधुनिक मशीनों में बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है जो मुख्य रूप से कपड़ों की धुलाई करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • इसका उपयोग जल में कठोर एवं मृदु दोनों ही प्रकार से किया जा सकता है।
  • अपमार्जक में मुख्य रूप से एल्किल सल्फेट (R-O-SO3 Na+) एवं एल्किल बेंजीन सल्फोनेट (R-C2H5-SO3 Na+ ) के सोडियम लवण पाए जाते हैं।
  • अपमार्जक में ऐसे प्रष्ट संक्रियक पदार्थ पाए जाते हैं जिनके तनु विलयन में साफ सफाई करने की क्षमता साबुन की तुलना में अधिक होती है।

साबुन और अपमार्जक में अंतर

साबुन और अपमार्जक में निम्न प्रकार के अंतर देखे जा सकते हैं:-

  • साबुन में कम आर्द्रता का गुण पाया जाता है जबकि अपमार्जक में साबुन की तुलना में अधिक आर्द्रता गुण पाया जाता है।
  • कुछ विशेष प्रकार के साबुन का निर्माण करने के लिए पेट्रोलियम से कच्चा पदार्थ प्राप्त किया जाता है परंतु अपमार्जक का निर्माण करने के लिए केवल वनस्पति तेल से कच्चे पदार्थों को प्राप्त किया जाता है।
  • साबुन युक्त पानी नदियों में मिलकर किसी भी प्रकार का प्रदूषण उत्पन्न नहीं कर सकते क्योंकि इसका निर्माण जैव निम्नकरणीय पदार्थों के माध्यम से किया जाता है जबकि अपमार्जक युक्त पानी नदियों को प्रदूषित कर सकता है क्योंकि यह कई प्रकार के रासायनिक एवं कार्बनिक पदार्थों से मिलकर बना होता है।
  • साबुन का उपयोग कठोर जल से कपड़े धोने के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि यह जल में देरी से घुलनशील होता है जबकि अपमार्जक का उपयोग कठोर जल से कपड़े धोने के लिए आसानी से किया जा सकता है क्योंकि यह जल में जल्दी घुलनशील होता है।
  • साबुन में मुख्य रूप से वसीय अम्लों के सोडियम अथवा पोटेशियम लवण पाए जाते हैं जबकि अपमार्जक में एल्किल वेजीन सल्फोनिक अम्ल के सोडियम लवण पाए जाते हैं।
  • साबुन कठोर जल में आसानी से कपड़ों को साफ नहीं कर सकते जबकि अपमार्जक मृदु जल के अतिरिक्त कठोर जल में भी कपड़ों को साफ कर सकते हैं।
  • साबुन तेल युक्त होते हैं जिसके कारण इनमें सफाई का गुण कम होता है जबकि अपमार्जन तेल रहित होते हैं जिसके कारण इनमें सफाई का गुण साबुन की तुलना में अधिक होता है।
  • साबुन का जलीय विलियन क्षारीय होता है जबकि अपमार्जक का जलीय विलियन उदासीन होता है।

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