Category archive

History - page 2

विजयनगर साम्राज्य

विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.) की स्थापना राजा हरिहर ने की थी। ‘विजयनगर’ का अर्थ होता है ‘जीत का शहर’। मध्ययुग के इस शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य की स्थापना के बाद से ही इस पर लगातार आक्रमण हुए लेकिन इस साम्राज्य के राजाओं ने इन आक्रमणों का कड़ा जवाब दिया। यह साम्राज्य कभी दूसरों के… Keep Reading

शाहजहां (1628-1658 ई.)

शाहजहां जहांगीर का पुत्र तथा अकबर का पोता था, इसका जन्म 5 जनवरी 1592 लाहौर में हुआ था। इसके बचपन का नाम खुर्रम था। अहमदनगर और मुग़ल साम्राज्य के बीच 1617 ई. में संधि हुई थी, जिसमें जहांगीर के पुत्र खुर्रम ने अहम् भूमिका निभाई थी, जिससे प्रसन्न होकर जहांगीर ने खुर्रम को शाहजहां की उपाधि… Keep Reading

जहाँगीर (1605-1627 ई.)

जहांगीर का जन्म 30 अगस्त, 1569 को फतेहपुर सीकरी में हुआ था। इसके पिता अकबर तथा माता जयपुर की राजकुमारी जोधाबाई थी। जहांगीर के बचपन का नाम ‘मुहम्मद सलीम‘ था। आगे चलकर सलीम को जहांगीर के नाम से जाना जाने लगा। अकबर की मृत्यु के पश्चात आगरा में 3 नवम्बर, 1605 को जहांगीर का राज्याभिषेक हुआ, और उसने मुग़ल… Keep Reading

अकबर (1556-1605 ई०)

जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर मुग़ल साम्राज्य के दूसरे शासक हुमायूँ और हमीदा बानू बेगम का बेटा था। अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 को मुग़ल साम्राज्य की राजधानी में न होकर अमरकोट के राजा वीरमाल के महल में हुआ था। क्यूंकि 1540 ई० को बिलग्राम (कन्नौज) में हुमायूँ और शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें हुमायूँ पराजित हुआ और दिल्ली पर शेरशाह सूरी ने कब्ज़ा… Keep Reading

शेरशाह सूरी (1540-45 ई०)

शेरशाह सूरी का जन्म 1472 ई० में हुआ था और इसके बचपन का नाम फरीद था। शेरशाह सूरी [1] के पिता का नाम हसन खाँ था जौनपुर के एक छोटे से जागीरदार थे। ये मूल से अफगानी थे। दक्षिण बिहार के सूबेदार बहार खाँ लोहानी ने शेरशाह सूरी को शेर खाँ की उपाधि से नवाजा था। यह उपाधि शेरशाह सूरी… Keep Reading

हुमायूँ (1530-1556 ई०)

बाबर की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य की गद्दी पर बाबर का बड़ा बेटा हुमायूँ बैठा। 30 वर्ष की आयु में आगरा में हुमायूँ को मुग़ल सल्तनत का ताज पहनाया गया था। हुमायूँ को नासिर-उद-दीन मुहम्मद के नाम से भी जाना जाता था। हुमायूँ ने अपने मुग़ल साम्रज्य को अपने तीन भाइयों (कामरान, अस्करी और हिन्दाल) के बीच बाँटा था,… Keep Reading

मुग़ल साम्राज्य (1526-1707)

पानीपत के मैदान में 21 अप्रैल, 1526 को इब्राहिम लोदी और चुगताई तुर्क जलालुद्दीन बाबर के बीच युद्ध लड़ा गया, जिसमें लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को पराजित कर खानाबदोश[1] बाबर ने तीन शताब्दियों से सत्तारूढ़ तुर्क अफगानी-सुल्तानों की दिल्ली सल्तनत का तख्ता पलट कर दिया और मुग़ल साम्राज्य और मुग़ल सल्तनत की नींव रखी।… Keep Reading

वर्द्धन या वर्धन वंश तथा पुष्यभूति वंश

गुप्त वंश के पतन के पश्चात छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास ‘पुष्यभूति‘ नामक शासक ने ‘वर्द्धन या वर्धन वंश’ की स्थपना की थी। वर्द्धन या वर्धन वंश को ‘पुष्यभूति वंश’ भी कहा जाता है। इसकी राजधानी थानेश्वर थी। इस वंश का सबसे महान और ख्याति प्राप्त राजा हर्षवर्धन था। हर्षवर्धन को शिलादित्य के नाम से भी जाना जाता था, ये हर्षवर्धन की… Keep Reading

दिल्ली सल्तनत – लोदी वंश (1451 -1526 ई.)

सैयद वंश का अंत कर बहलोल लोदी ने 1451 ई. में लोदी वंश की दिल्ली सल्तनत में स्थापना की थी। यह वंश 1526 ई. तक सत्ता में रहा और सफलतापूर्वक शासन किया। यह राजवंश दिल्ली सल्तनत का अंतिम सत्तारूढ़ परिवार था, जो अफगान मूल से था। लोदी वंश के शासक :- बहलोल लोदी (1451 – 1489 ई.) सिकंदर लोदी (1489 –… Keep Reading

गुप्त वंश – गुप्तकाल

गुप्त साम्राज्य की नींव रखने वाला शासक श्री गुप्त था। श्री गुप्त ने ही 275 ई. में गुप्त वंश की स्थापना की थी। मौर्य काल के बाद गुप्त काल को भी भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना गया है। गुप्त वंश की जानकारी वायुपुराण से प्राप्त होती है। गुप्तकाल की राजकीय भाषा संस्कृत थी। ये भी माना जाता है… Keep Reading